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कांग्रेस सरकार को बड़ी राहत, जज्‍जी बनें रहेंगे विधायक, उच्‍च स्‍तरीय छानबीन समिति ने पक्ष में सुनाया फैसला
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कांग्रेस सरकार को बड़ी राहत, जज्‍जी बनें रहेंगे विधायक, उच्‍च स्‍तरीय छानबीन समिति ने पक्ष में सुनाया फैसला

न्‍यूजमंच, भोपाल। हाल ही में आए राज्‍य स्‍तरीय संदेहास्‍पद अनुसू‍चित जाति प्रमाण-पत्र छानबीन समिति के एक फैसले ने बहुमत के मुहाने पर खड़ी मध्‍यप्रदेश की कांग्रेस सरकार को बड़ी राहत दी है। दरअसल, इस 18 दिसंबर को छानबीन समिति ने मध्यप्रदेश के अशोकनगर से कांग्रेस विधायक जजपाल सिंह जज्‍जी की जाति को लेकर फैसला सुनाया। समिति ने फैसले में जज्‍जी के अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़े नट जाति के प्रमाण पत्र को वैध माना है। समिति के इस फैसले के बाद जज्‍जी की विधायकी पर जाति प्रमाण पत्र को लेकर मंडरा रहा खतरा खत्‍म हो चुका है, हालांकि जज्‍जी के जातिप्रमाण पत्र की शिकायत करने वाला पक्ष छानबीन समिति के इस निर्णय को आखिरी न मानते हुए, अब भी इस मामले में वकीलों से कानूनी सलाह लेने के बाद वैधानिक प्रक्रिया अपनाए जाने की बात कह रहा है।

      उल्‍लेखनीय है कि वर्ष 2010 में एडव्‍होकेट एवं राजनेता रमेश इटौरिया द्वारा जजपाल सिंह जज्‍जी के अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र की शिकायत की गई थी। उच्‍च स्‍तरीय छानबीन समिति द्वारा इस शिकायत की जांच की गई और वर्ष 2013 में जजपाल सिंह जज्‍जी का जाति प्रमाण रद्द कर दिया। छानबीन समिति के इस फैसले को चुनौती देते हुए कांग्रेस नेता जजपाल सिंह जज्‍जी ने ग्‍वालियर हाइकोर्ट में अपील की। उन्‍होंने अपनी अपील में आधार दिया कि छानबीन समिति ने जांच के दौरान उन्‍हें सुनवाई का पर्याप्‍त अवसर नहीं दिया। जज्‍जी की अपील पर यह मामला कोर्ट में कई सालों तक विचाराधीन रहा, इस दौरान कोर्ट के सामने जज्‍जी एवं शिकायतकर्ता पक्ष ने अपने-अपने तर्क रखें। मई 2019 में इस मामले में हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया, और जज्‍जी की अपील पर विचार करते हुए कुछ निर्धारित बिंदुओं के साथ जज्‍जी के जाति प्रमाण पत्र की जांच एक बार फिर छानबीन समिति के पास भेज दी। उच्‍च स्‍तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति ने जज्‍जी के जातिप्रमाण पत्र की शिकायत करने वाले सभी पक्षों का सुना, साथ ही हाईकोर्ट द्वारा निर्देशित बिंदुओं के आधार पर भी जांच की। जांच के बाद 18 दिसंबर को छानबीन समिति ने जज्‍जी के पक्ष में फैसला सुनाया, हालांकि मीडिया के पास छानबीन समिति के फैसले की कॉपी 21 दिसंबर को पहुंची, जिसके बाद ही इस बहुप्रतीक्षित एवं चर्चित मामले की खबर आमजन तक पहुंच सकी।

एक विधायक, एक पूर्व विधायक, एक पत्रकार सहित 6 लोगों ने की थी जज्‍जी की शिकायत

कांग्रेस विधायक जजपाल सिंह ‘जज्‍जी’ के अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़े जाति प्रमाणपत्र की 6 अलग-अलग लोगों ने शिकायत की थी। इनमें गुना से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक गोपीलाल जाटव, भाजपा से जुड़े अशोकनगर के पूर्व विधायक लड्डूराम कोरी, एडव्‍होकेट एवं कांग्रेस नेता (शिकायत करने के दौरान बहुजन समाज पार्टी में थे) रमेश इटौरिया, भाजपा से जुड़े पूर्व पार्षद एवं पत्रकार देवेन्‍द्र ताम्रकार, भाजपा पार्षद रोशनराज यादव, आनंद दोहरे शामिल हैं। इनमें सबसे पहले एडव्‍होकेट रमेश इटौरिया ने जजपाल सिंह जज्‍जी के जाति प्रमाण को गलत बताते हुए शिकायत की थी।

इन आधारों पर छानबीन समिति ने जज्‍जी के पक्ष में किया फैसला

  • जज्‍जी के जाति प्रमाण पत्र को चुनौ‍ती देने वाले सभी शिकायतकर्ताओं का कहना था कि जज्‍जी द्वारा विभिन्‍न स्‍थानों पर राजस्‍व रिकार्ड में अपनी जाति सिख दर्ज की है, वहीं छानबीन समिति के समक्ष जज्‍जी ने तर्क दिया कि सिख कोई जाति नहीं होती, यह एक धर्म है। इस धर्म में विश्‍वास करने वाला किसी भी जाति वर्ग का व्‍यक्ति इस धर्म को अपना सकता है। 
  • शिकायतकर्ताओं द्वारा तर्क दिया गया कि जज्‍जी ने अपनी पूरी पढ़ाई के दौरान कहीं भी जाति के उल्‍लेख में खुद को अनुसूचित जाति से जुड़ा होना नहीं बताया, न ही उन्‍होंने कभी अनुसूचित जाति वर्ग के लिए मिलने वाली छात्रवृत्ति ली, न ही उनके परिजनों एवं बुजुर्गों ने अनुसूचित जाति वर्ग का जाति प्रमाण पत्र बनवाया, जज्‍जी ने तर्क दिया कि उन्‍हें आर्थिक रूप से सम्‍पन्‍न होने के कारण छात्रवृत्ति की जरूरत ही नहीं पड़ी और न ही उनके किसी भी परिजन को कभी जाति प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ी।
  • शिकायतकर्ताओं ने जज्‍जी की जाति को लेकर उनके पिछड़ा वर्ग के जाति प्रमाण पत्र को प्रस्‍तुत किया, साथ ही तर्क दिया कि वे सामान्‍य एवं पिछड़ा जाति वर्ग से चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन छानबीन समिति ने माना कि उच्‍च स्‍तरीय छानबीन समिति द्वारा 11 नबंवर 2004 को पारित फैसले अनुसार नट जाति का होने के कारण जज्‍जी का पिछड़ा वर्ग का प्रमाण पत्र निरस्‍त किया जा चुका है। इसलिए जज्‍जी के पिछड़ा वर्ग से जुड़े होने के तथ्‍य निराधार हो गए। वहीं सामान्‍य वर्ग से कोई भी चुनाव लड़ सकता है।
  • जाति प्रमाण पत्र की शिकायत से जुड़ा एक तथ्‍य यह भी था कि जज्‍जी ने अनुसूचित जाति वर्ग की ‘नट’ जाति से होने के बावजूद भी पंजाब से ‘कीर’ जाति का प्रमाण पत्र क्‍यों हासिल किया। इस संबंध में जजपाल सिंह जज्‍जी द्वारा तर्क दिया गया कि ‘कीर’ जाति का प्रमाण पत्र उनके ननिहाल पक्ष ने प्राप्‍त किया था, जो कि अमृतसर से बना है। इस जाति प्रमाण पत्र को हासिल करने उन्‍होंने कभी कोई प्रयास नहीं किए। जब उन्‍हें ‘कीर’ जाति का प्रमाण पत्र मिला, तो उन्‍हें लगा कि ‘कीर’ नट जाति की ही कोई उपजाति होगी। ‘कीर’ जाति अशोकनगर में पिछड़ावर्ग में दर्ज थी, इसलिए उन्‍हें पिछड़ा वर्ग का प्रमाण पत्र जारी हो गया।
  • अशोकनगर एसपी द्वारा जज्‍जी की जाति को लेकर जो जांच प्रतिवेदन समिति को दिया गया, उसमें जज्‍जी की जाति को लेकर स्‍पष्‍ट अभिमत नहीं दिया गया।
  • अशोकनगर एसपी की जांच में सामने आया कि खसरा वर्ष 1950 के भू-अभिलेख रिकार्ड में जजपाल सिंह जज्‍जी के दादा स्‍वर्गीय श्री बूढ़ सिंह का नाम पटवारी हल्‍का नंबर 28 तहसील पिपरई में दर्ज था।
  • पंजाब के तरनतारन जिले की पट्टी तहसील के खारा गांव, पटवारी हल्‍का नंबर 302 में जजपाल सिंह जज्‍जी के पूर्वज श्री बूढ़सिंह पिता नत्‍था सिंह की जाति ‘नट’ दर्ज है।
  • 1950 की स्थिति में जज्‍जी के दादा श्री बूढ़ सिंह का नाम अशोकनगर जिले के भूअभिलेखों में दर्ज है, साथ ही उनके पंजाब स्थित पैतृक गांव खारी के रिकार्ड में उनकी जाति ‘नट’ उल्‍लेखित है।
  • इन्‍हीं प्रमुख तथ्‍यों के आधार पर उच्‍च्‍ स्‍तरीय छानबीन समिति ने जजपाल सिंह जज्‍जी के अनुसूचित जाति वर्ग के उस जाति प्रमाण पत्र को वैध माना, जो उन्‍हें अशोकनगर एसडीएम ने 2008 में जारी किया था।

उच्‍च स्‍तरीय छानबीन समिति का पूरा फैसला पढ़ने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें  

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2013 में मुझे सुने बिना ही दिया था फैसला, अब लंबे संघर्ष का सुखद अंत: जज्‍जी
मेरे जाति प्रमाणपत्र को लेकर भारतीय जनता पार्टी हर स्‍तर पर मेरे खिलाफ शिकायत कर रही थी, इन्‍हीं शिकायतों को आधार बनाते हुए 2013 में छानबीन समिति ने मुझे सुने बिना ही फैसला दे दिया था और प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया था। समिति के फैसले के खिलाफ मैनें हाईकोर्ट में अपील की थी, हाईकोर्ट ने इस पर वर्ष 2018 में छानबीन समिति को दोनों का पक्ष सुनकर निर्णय करने का आदेश दिया था और निर्णय तक प्रमाण पत्र के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी। उच्‍च स्‍तरीय छानबीन समिति ने सभी शिकायतकर्ताओं एवं मेरा पक्ष सुना, दोनों पक्षों को सुनने और सभी तथ्‍यों की जांच के बाद छानबीन समिति ने प्रमाण पत्र को वैध माना है।यह मेरे लंबे संघर्ष का सुखद अंत है।
जजपालसिंह जज्जी, विधायक अशोकनगर

कांग्रेस की सरकार, इसलिए ऐसे ही फैसले की आशंका थी: ताम्रकार (एक शिकायतकर्ता)

विधायक कांग्रेस के हैं और सरकार भी कांग्रेस की है। इसलिए हमें पहले से ही आशंका थी कि छानबीन समिति का फैसला विधायक के ही पक्ष में आएगा। हम अपनी लड़ाई वैधानिक रूप से जारी रखेंगे, जीत सत्य की ही होगी।
देवेंद्र ताम्रकार, शिकायतकर्ताएवं भाजपा मीडिया प्रभारी

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