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MP By-election: बीजेपी के संकल्प पत्र से सिंधिया की तस्वीर गायब, कांग्रेस ने साधा निशाना
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MP By-election: बीजेपी के संकल्प पत्र से सिंधिया की तस्वीर गायब, कांग्रेस ने साधा निशाना

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद ज्योतिरदित्य सिंधिया की तस्वीर डिजिटल रथ के बाद संकल्प पत्र से भी गायब होने पर कांग्रेस ने निशाना साधा है। कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने कहा, डिजिटल रथ के बाद ,स्टार प्रचारकों की सूची में 10 नंबरी बनाने के बाद अब भाजपा के संकल्प पत्र से भी सिंधिया ग़ायब? किरकिरी से बचने के लिये भाजपा ने भेजी संकल्प पत्र की सॉफ़्ट कॉपी ताकि जिसको उनका फ़ोटो जोड़ना है वो अतिरिक्त पेज लगाकर जोड़ ले लेकिन भाजपा ने फ़ोटो शामिल नहीं किया। आख़िर सिंधिया का कितना अपमान करेगी भाजपा? जो भाजपा कहती थी सिंधिया हमारी पार्टी का मुख्य चेहरा, कांग्रेस की सरकार सिंधिया के कारण बनी, उस भाजपा ने ही सिंधिया को हर जगह से ग़ायब किया। शिव- ज्योति एक्सप्रेस पता नहीं कहाँ पंचर पड़ी है?

बता दें कि मध्यप्रदेश में 28 सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव के लिए 3 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। वोटिंग से पहले मुख्य दल बीजेपी और कांग्रेस अपनी तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। भाजपा ने अपने डिजिटल रथों चुनाव प्रचार में उतारा है जो सभी उपचुनाव वाली विधानसभाओं में जाएंगे। इन रथों पर ग्वालियर घराने के महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया गायब हैं। मुख्यमंत्री शिवराज की जनसभा में साथ नजर आने वाले सिंधिया अब वहां भी मंच पर नहीं दिखते। इतना ही नहीं भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को स्टार प्रचारकों में 10वां स्थान दिया है। पार्टी में अंदरखाने चल रही चर्चा के मुताबिक सबकुछ रणनीति के तहत ही है। पार्टी के एक नेता तो तंज भरे लहजे में कहते हैं कि वह भाजपा में आ गए हैं, लेकिन अभी भाजपाई होने में वक्त लगेगा।

मध्यप्रदेश के राजनीतिक मामलों में सक्रिय रमेश शर्मा ने कहा कि ग्वालियर चंबल संभाग की 16 सीटों पर सिंधिया के साथ कांग्रेस से गए लोग ही चुनाव लड़ रहे हैं। इसे क्षेत्र की जनता भी समझ रही है। भाजपा के अंदरखाने में इसका विरोध भी है। रमेश शर्मा का कहना है कि सिंधिया के कांग्रेस में जाने से 16 विधायकों को 2018 में जिताने वाले सभी मतदाता तो भाजपाई नहीं हो गए, लेकिन इसके फेर में भाजपा में जुड़ाव रखकर वोट देने वालों को झटका जरूर लगा है। सिंधिया के मुखर होने पर पार्टी का यह पक्ष दबा रह सकता है। इसलिए पार्टी ने सबको साधने के लिए अपनी रणनीति को थोड़ा दुरुस्त किया है।

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