
जबलपुर, 30 अक्टूबर, (न्यूजमंच), कुछ दिनों पहले ही जिस संगठन का नाम लोगो ने सुना, जिसका नाम सुन नयी उम्मीदों कि लहरें जागने लगीं, आरक्षण के मुद्दे को लेकर बीजेपी सरकार बैकफुट पर आ गयी। जी हाँ, वही अँधेरे में किरण के सामान दिखने वाला, सपाक्स संगठन बहुत ही जल्द एक राजनीतिक दल में परिवर्तित हो गया।
सपाक्स सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था मध्य प्रदेश के अधिकारियों कर्मचारियों का संगठन है। चुनाव में सपाक्स का मुख्य मुद्दा एससी-एसटी एक्ट और पदोन्नति में आरक्षण का है।
राजनीति अपने गुणों से किसी को अछुता नहीं रखती। राजनीति में एंट्री होते ही इसमें अब दरारें पड़ने लगी हैं। सपाक्स एक रीजनीतिक दल तो बन गया है, लेकिन पार्टी में वैचारिक मतभेद दिखने लगे हैं। इसकी वजह से पार्टी दो हिस्सों में टूटने की कगार पर आ चुकी है। प्रदेश में चुनाव होने से पहले ही सपाक्स पार्टी में फूट पड़ गई है।
इस फूट के रहते, संस्था के संस्थापक अध्यक्ष ललित शास्त्री ने हीरालाल त्रिवेदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जबलपुर में उन्होंने मीडिया से कहा कि कुछ लोग सपाक्स संस्था को हाईजैक कर चुके हैं जिनमें शामिल हीरालाल त्रिवेदी अपनी मनमानियां कर रहे हैं। शास्त्री ने कहा कि हीरालाल त्रिवेदी सपाक्स संस्था में सिर्फ संरक्षक सदस्य हैं जिन्हें संस्था के संचालन से जुड़ा कोई भी फैसला लेने का अधिकार नही हैं। शास्त्री ने कहा कि त्रिवेदी ने संस्था के नियमों को दरकिनार कर सपाक्स की नीतियों को गलत तरह से पेश किया है। उन्होंने कहा कि सपाक्स को लेकर मीडिया से लेकर सब जगह भ्रम फैलाया गया है।
ललित शास्त्री ने चुनाव आयोग को एक पत्र लिखकर सपाक्स के संरक्षक सदस्य हीरालाल त्रिवेदी की शिकायत भी की है... ललित शास्त्री ने चुनाव आयोग से मांग की है कि सपाक्स नाम से किसी भी राजनैतिक दल के गठन की मंजूरी ना दी जाए क्योंकि इस नाम की संस्था वो दो साल पहले 2016 में ही रजिस्टर करवा चुके थे।
ललित शास्त्री ने राष्ट्रीय आरक्षण विरोधी मोर्चा के संयोजक रहे जबलपुर के अमित खंपरिया को सपाक्स का कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है।
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