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किसान आंदोलन: पंजाब से 30 हजार किसानों का जत्था दिल्ली के लिए रवाना, विरोध प्रदर्शन में होगा शामिल
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किसान आंदोलन: पंजाब से 30 हजार किसानों का जत्था दिल्ली के लिए रवाना, विरोध प्रदर्शन में होगा शामिल


नई दिल्ली। केन्द्र सरकार के नए कृषि कानूनों को लेकर दिल्ली में किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। किसानों ने सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। किसान संगठनों ने सरकार कानून वापस लेने के लिए कहा है। साथ ही उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। किसानों के इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए 30 हजार से ज्यादा किसानों का एक जत्था शुक्रवार को पंजाब से दिल्ली के लिए रवाना हो गया है। बता दें कि किसान ट्रैक्टर-ट्रेली, बसों, कारों और मोटरसाइकिलों पर खाने-पीने के सामानों के साथ किसान मजदूर संघर्ष समिति से जुड़े अधिकांश किसानों ने अमृतसर शहर से अपनी यात्रा शुरू की।रास्ते में अन्य जिलों से संबंधित किसान उनसे जुड़ रहे हैं। वे शनिवार शाम को राष्ट्रीय राजधानी की कुंडली सीमा पर पहुंचेंगे।

किसान मजदूर संघर्ष समिति के अध्यक्ष सतनाम सिंह पन्नू ने बताया, आज शाहबाद (हरियाणा में) में एक रात रुकने के बाद हम सीधे दिल्ली जाएंगे। पुलिस के अनुमानों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की संख्या 30,000 से अधिक हो सकती है, जिनमें बड़ी संख्या में युवा और महिलाएं हैं। किसान अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, जालंधर, कपूरथला और मोगा जिलों के हैं। यात्रा के दौरान, किसानों को खिलाने के लिए लंगर या सामुदायिक रसोई का इंतजाम किया गया है।

26 नवंबर से ही हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं पर कृषि कानूनों के खिलाफ डेरा डाले हुए हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ये कानून न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रणाली को खत्म करने का मार्ग प्रशस्त करेंगे, जिससे वे बड़े कॉर्पोरेट संस्थाओं की दया पर निर्भर हो जाएंगे। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू-राजेवाल) के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल ने बताया, कृषि और कृषि विपणन राज्य के विषय हैं। इसलिए ये कानून असंवैधानिक हैं और इन्हें निरस्त किया जाना चाहिए। संशोधनों को स्वीकार करने का मतलब कानूनों को स्वीकार करना है।

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को किसान यूनियनों के नेताओं से बातचीत जारी रखने और नए कृषि विधानों से संबंधित मुद्दों का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने का आग्रह किया था। चूंकि किसानों की यूनियनों ने राष्ट्रीय राजधानी के आसपास एक्सप्रेसवे को अवरुद्ध करने के आह्वान के साथ अपने आंदोलन को तेज करना शुरू कर दिया है, सरकार ने उन्हें चर्चा पर लौटने के लिए कहा है।

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