
भोपाल। स्वामित्व कानून और कृषि सुधारों से गांवों और किसानों को आर्थिक आजादी मिलेगी। प्रधानमंत्री द्वारा लाए गये तीनों कानून किसान की तस्वीर और तकदीर बदल देंगे। ये तीनों कानून देश में क्रांतिकारी परिवर्तन लायेंगे। इन कानूनों के बाद यह साबित हो जायेगा कि हमारे देश में किसान सिर्फ खेती के लिए नहीं है वह अपना व्यवसाय प्रारंभ कर किसान के साथ-साथ उद्योगपति भी बन सकता है। किसान के युवा बेटे अब बेरोजगार न रहकर अपना खुद का व्यवसाय प्रारंभ कर उद्योगपति बनेंगे और रोजगार मांगने वाले की जगह रोजगार देने वाले की भूमिका में आ जायेंगे। मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल ने ये बात कही है।
कमल पटेल ने कहा, इस कार्य में ‘प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना’ बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यदि कांग्रेस नेहरु जी के समय ही ग्रामीणजनों को उनकी सम्पत्ति का स्वामित्व दे देती तो आज हमारे देश के किसानों की काया ही पलट चुकी होती। मेरे देश और प्रदेश के किसान भाईयों-बहनों को प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना और कृषि कानूनों में संशोधनों को एक साथ जोड़कर देखना और समझना चाहिए। मैं किसानों को समझाना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के बाद हमारे किसान भाई गांव में अपनी सम्पत्ति के मालिक स्वयं हो जाएंगे।
अभी तक सम्पत्ति का कोई कानूनी कागज नहीं होने के कारण वह लोन इत्यादि नहीं ले पाते थे बल्कि इसके विपरीत उनके पास कोई कागज नहीं होने के कारण कभी भी उनके विरूद्ध अतिक्रमण इत्यादि की कार्यवाही कर दी जाती थी। व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए लोन सिर्फ शहर के लोगों को ही लेना संभव था, जिससे मुनाफा भी वही कमाते थे। किसान को अगर लोन मिलता था तो सिर्फ खाद, बीज, दवाई, टैज्क्टर और हार्वेस्टर के लिए। किसान उत्पादन करता था और उसकी उपज को स्टोर करने अथवा प्रोसेस करने के लिए कोल्ड स्टोर, वेयर हाउस या फैक्ट्री लगाने का काम उद्योगपति करता था और वह मुनाफा कमाता था।
इस तरह से दिन-रात मेहनत करने का काम, मौसम या प्राकृतिक आपदा के खतरे उठाने का काम, किसी दुर्घटना में जान-माल की हानि का खतरा उठाने और अन्य सभी तरह के जोखिम उठाने का काम किसान करता था। कभी-कभी तो उसको खेत में सांप-बिच्छू भी काट लेते हैं, जिससे वह अपनी जान तक गवां देता है। इतना सब करने के बाद भी उसको बहुत ही कम लाभ मिल पाता है और उसकी फसल से व्यवसायिक उत्पाद तैयार कर करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाने का काम बड़े-बड़े उद्योगपति करते हैं। प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के बाद अब हमारे गांव के किसान अपने प्लाट व मकान के स्वामी खुद होंगे। जिसके आधार पर अब किसान भी व्यवसाय के लिए लोन प्राप्त कर सकेंगे।
लोन पर मिलने वाली सब्सिडी का भी लाभ ले सकेंगे। किसानों के बेटे-बेटी युवा व्यवसायी बनकर कोल्ड स्टोरेज, वेयर हाउस, फूड प्रोसेसिंग यूनिट या फैक्ट्रियां लगा सकेंगे। उनको भी कोल्ड स्टोर के लिए 50 प्रतिशत, कृषि आधारित उद्योग के लिए 40 प्रतिशत या महिला होने पर 35 प्रतिशत की सब्सिडी का लाभ प्राप्त हो सकेगा। इससे किसान अपनी मेहनत से उगायी गई उपज को अपनी ही फैक्ट्री में बेचने योग्य उत्पाद तैयार कर उसको अधिकतम खुदरा मूल्य पर बेच सकेगा। इस तरह से आप देखेंगे कि अब हमारे देश का किसान अपनी उपज का ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त’ करने के साथ-साथ उस उपज से तैयार किये गये उत्पाद का ‘अधिकतम खुदरा मूल्य’ भी स्वयं ही प्राप्त कर सकेगा।
इससे मुनाफा सीधे किसानों को ही प्राप्त होगा। किसानों की आय बढ़ेगी, बिचौलियों की समाप्ति होगी, उपभोक्ताओं को भी उत्पाद सस्ती दरों पर प्राप्त होंगे, किसान स्वयं अपने उत्पादों का निर्यात भी कर सकेगा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और साथ ही साथ ग्रामीण क्षेत्र से जो किसानों के बेटा-बेटी शहर की तरफ रोजगार के लिए पलायन कर रहे हैं वह भी काफी हद तक कम हो जायेगा। किसनों के बेटा-बेटियों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो सकेगा।
किसानों को इन संशोधनों का अधिक से अधिक लाभ दिलाने के लिए हजारों की संख्या में किसान उत्पादक समूहों (एफ.पी.ओ.) का गठन किया जा रहा है। एक एफपीओ में कम से म 300 किसान सदस्य होंगे। हर ब्लॉक पर कम से कम 2 एफपीओ बनाए जाएंगे। जिला और ब्लॉक स्तर पर एफपीओ कार्य करेंगे जो कि जिला स्तर पर यह तय करेंगे कि उनके जिले या ब्लॉक में कौन सी फसल कितनी मात्रा में बोई जानी है। यानी की किसान स्वयं ये फैसला लेंगे। एफपीओ उत्पाद को सीधे उपभोक्ता को बेचेंगे, इससे लागत कम होगी, उत्पादन बढेगा और लाभ सीधे किसान को मिलेगा। एफपीओ सीधे लोन ले सकेंगे और उनको ब्याज में 3 प्रतिशत छूट मिलेगी। सरकार ने इसके लिए 1 लाख करोड़ रुपये की राशि का अलग से प्रावधान भी किया है।
कांग्रेस के समय में गांव में सिंचाई और बिजली की सुविधा नहीं थी। सिंचाई का रकबा भी बहुत कम था। बीजेपी शासन में फसल उत्पादन 5 से 7 गुना बढ़ा है, कृषि विकास दर 4 से 5 प्रतिशत थी जो बढ़कर अब 20 से 25 प्रतिशत हो गई है। सिंचाई का रकबा 7.5 हेक्टेयर से बढ़कर 44 लाख हेक्टेयर हो गया है। बिजली की उपलब्धता 2990 मेगावाट से बढ़कर 18 हजार मेगावाट हो गई है। यही कारण है कि अब सरकार ने सीमा बढ़ाई है, इससे निर्यात बढ़ेगा। अब किसान भी निर्यात कर सकेगा। किसान भाईयों को कृषि सुधारों से संबंधित सभी गलतफहमियों को अपने मन से निकाल देना चाहिए। करार के संबंध में उन्हें यह स्पष्ट रखना चाहिए कि फसलों की कीमत पहले से तय होगी, बाद में परिस्थितियां चाहे कितनी भी बदले उनके उपज की कीमत कम नहीं होगी। कीमत किसान अपनी मर्जी से तय करेंगे उन्हें कभी भी घाटा नहीं होगा। इन सुधारों से ‘ग्राम विकास के द्वार खुलेंगे’ और सही मायने में ‘गांवों को आर्थिक आजादी मिलेगी’और किसान को उसकी मेहनत का पूरा दाम मिलेगा।
किसान व्यापारियों के लिए नहीं देश के लिए अनाज पैदा करता है। इसके बाद सही मायने में सान की मेहनत का लाभ किसान को और देश को ही मिलेगा बिचौलिये अलग हो जायेंगे और खेती सही मायने में व्यवसाय और उद्योग बन जायेगी। किसानों के साथ गरीबों का भी उत्थान होगा और किसान आत्मनिर्भर बनेगा, देश आत्मनिर्भर बनेगा। सही मायने में किसानों के हित में पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने ही सोचा है। गांव को असली आजादी अब मोदी जी ने दिलाई है। यही कारण है कि देश में जहां-जहां भी अभी चुनाव हुए हैं वहां भारतीय जनता पार्टी चुनाव जीती है। यह भाजपा की नीतियों के प्रति जनता का समर्थन है।
अब देश की 70 प्रतिशत आबादी की आर्थिक प्रगति होगी। कांग्रेस एक विपक्षी पार्टी है उसका काम ही सिर्फ विरोध करना और लोगों को भ्रमित करना है। इसलिए आइए हम सब मिलकर मोदी जी का साथ दें। जिन्हें अपने अस्तित्व का डर सता रहा है ऐसे चुटकी भर लोग विरोध कर रहे हैं। यह विरोध किसानों का नहीं, बिचौलिये का विरोध है। यह कानून किसानों की खेती को घाटे से लाभ का धंधा बनाएगा। अब किसान सिर्फ खेती नहीं करेगा, वह व्यापारी बनकर व्यवसाय करेगा।
अब देश का किसान और मजदूर आत्मनिर्भर होगा और सभी गांव आत्मनिर्भर बनेंगे। ऐसा होने पर ही महात्मा गांधी जी का ग्राम स्वराज का सपना साकार होगा। आप सभी मिलकर मोदी जी का साथ दीजिये और कहिये कि यह कानून सही है। गांव-गांव में जाकर चैपाल लगाईए प्रधानमंत्री जी को मेल और मैसेज कर उनका समर्थन कीजिये और किसानों को उनका हित समझाईये। आईये हम सब मिलकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाये।
- इसके लेखक मप्र के कृषि मंत्री है
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