
नई दिल्ली। कृषि कानून के खिलाफ सड़कों पर उतरे किसानों के प्रदर्शन का आज सातवा दिन है। दिल्ली की सीमाओं पर हजारों की संख्या में किसान जुटे हुए हैं। केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच बीते दिन जो बातचीत हुई, उसमें कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। इस वजह से किसानों ने अपनी मांगें मानने तक आंदोलन से पीछे हटने से इनकार कर दिया है। यानी सिंधु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर समेत अन्य जगह जो किसानों का जमावड़ा है वो लगातार जारी रहेगा।
अब पंजाब और हरियाणा के किसानों ने अधिक संख्या में दिल्ली कूच की बात कही है। आज हरियाणा से बड़ी संख्या में खाप पंचायतें दिल्ली कूच करने वाली हैं. इसको देखते हुए प्रशासन अलर्ट हो गया है और कई जगह रास्तों को बंद कर दिया है ताकि इन्हें दिल्ली में घुसने से रोका जा सके। इसके साथ ही खाप पंचायतों ने फैसला लिया है कि वो विधायकों पर खट्टर सरकार से समर्थन वापस लेने का दबाव बनाएंगे। किसानों आंदोलन के कारण उत्तर रेलवे द्वारा चलाई जाने वाली कुछ ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है। 09613 अजमेर-अमृतसर एक्सप्रेस 2 दिसंबर से शुरू होने वाली विशेष ट्रेन रद्द रहेगी। 3 दिसंबर को शुरू होने वाली 09612 अमृतसर - अजमेर स्पेशल ट्रेन भी रद्द रहेगी।
सरकार ने किसान संगठनों से कृषि क़ानूनों से जुड़ी शिकायतों और बिंदुओं को सूचीबद्ध कर लिखित रूप में बुधवार तक साझा करने को कहा है। ऐसे में आज संयुक्त किसान मोर्चा केंद्र सरकार को अपनी आपत्तियां भेजेगा। भारतीय किसान यूनियन (सिद्धपुर जत्था) के अध्यक्ष जगजीत सिंह धालीवाल ने बताया कि हमने कल सरकार पर मीटिंग में सारी बातें रखी हैं, लेकिन आज हम उनको लिखित में सरकार को भेजेंगे। गुरुवार को सरकार के साथ एक बार फिर बैठक होगी और हर बिंदु पर विस्तार से बातचीत होगी।
क्या हुआ किसान संगठनों की बैठक में?
करीब 35 किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच मंगलवार को बैठक हुई। इसमें कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, पीयूष गोयल समेत अन्य नेता शामिल रहे. किसानों को MSP पर प्रेजेंटेशन दी गई, साथ ही मंडी सिस्टम को लेकर जानकारी दी गई। हालांकि, किसानों का एक ही सवाल रहा कि क्या सरकार MSP को कानून का हिस्सा बनाएगी। जब बातचीत खत्म हुई तो कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। तीन घंटे की चर्चा के बाद
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