
नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ सड़कों पर उतरे किसानों के प्रदर्शन का आज छठा दिन है। इसी बीच कोरोना संकट और ठंड को देखते हुए सरकार ने 3 दिसंबर को होने वाली बातचीत आज ही बुला ली है। केंद्र सरकार ने 32 किसान संगठनों के नेताओं को बातचीत के लिए दोपहर 3 बजे विज्ञान भवन बुलाया है। सरकार की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बातचीत की अगुवाई करेंगे। उनके साथ कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर समेत अन्य कुछ मंत्री भी मौजूद रह सकते हैं। इनके अलावा कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी जो कानून पर विस्तार से बात करेंगे, वो भी मौजूद रहेंगे। ऐसे में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच मंथन से कोई हल निकल सकता है।
किसने क्या कहा?
किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी पंजाब के महासचिव ने कहा है कि कल देर रात सरकार से चिट्ठी आई जिसमें पंजाब के 32 किसान संगठनों को बातचीत का न्योता दिया गया। देश के सभी संगठनों को बुलावा नहीं भेजा गया,ये देश के किसानों में फूट डालने वाली बात है। वहीं किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी पंजाब के महासचिव ने कहा है कि बातचीत से पहले प्रधानमंत्री जी ने फैसला सुना दिया है कि हमारे कृषि कानून बहुत बढ़िया हैं तो इस तरह के माहौल में बातचीत का अंदाजा हमें लग गया है। उधर, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जो किसान नेता 13 नवंबर की मीटिंग में शामिल थे, उन्हें वार्ता में शामिल होने का न्योता दिया गया है।
क्या है किसानों की मांग?
किसानों का कहना है कि MSP और मंडी के मुद्दे पर उन्हें लिखित गारंटी चाहिए। किसान संगठनों को डर है कि नया कानून जैसे ही जमीन पर उतरेगा, MSP धीरे-धीरे खत्म होने लगेगी। यही कारण है कि MSP हमेशा के लिए बनी रहे, वो इस बात को कानून में शामिल करवाना चाहते हैं। दरअसल, सरकार ने कृषि सुधारों के लिए 3 कानून द फार्मर्स प्रोड्यूस ट्रेड एंड कॉमर्स (प्रमोशन एंड फेसिलिटेशन) एक्ट; द फार्मर्स (एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन) एग्रीमेंट ऑफ प्राइज एश्योरेंस एंड फार्म सर्विसेस एक्ट और द एसेंशियल कमोडिटीज (अमेंडमेंट) एक्ट बनाए है। इनके विरोध में पंजाब और हरियाणा के किसान पिछले दो महीनों से सड़कों पर हैं।
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