
नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन का आज तीसरा दिन है। किसानों ने टिकरी और सिंघु बॉर्डर पर अपना डेरा बनाया हुआ है। हालांकि पंजाब से दिल्ली आए किसानों को बुराड़ी के निरंकारी मैदान पर प्रदर्शन की अनुमति दी गई है। धीरे-धीरे कुछ संगठन मैदान में इकट्ठा हो भी रहे हैं, वहीं कुछ महिलाओं ने आदिवासी नृत्य कर अपना विरोध जताया।
महराष्ट्र से नर्मदा बचाओ आंदोलन के बैनर तले आई लतिका राजपूत एक एक्टिविस्ट है उन्होंने बताया, महाराष्ट्र में इस नृत्य को किया जाता है। ये नृत्य खुशी के मौके पर किया जाता है। हमें यूपी बॉर्डर पर रोक रखा हुआ था। कल फैसला हुआ कि हम दिल्ली जा रहे हैं, वो हमारे लिए खुशी का मौका था। उन्होंने कहा, इसी खुशी में हमने ये नृत्य कर रहे हैं। इस नृत्य को शिबली नृत्य कहा जाता है और ये विभिन्न राज्यो में आदिवासी लोग करते हैं।
गुजरात से लोकसंघर्ष मोर्चा गुजरात के बैनर तले आए रतिलाल पानयभाई ने बताया, 23 तारीख से निकले हुए हैं, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और राजस्थान और यूपी के बॉर्डर पर हमे 25 तारीख से 27 नवंबर तक रोका हुआ था। हमें नेशनल हाईवे 3 पर पुलिस ने रोकने के बाद कल आने दिया था। उन्होंने कहा, हम लोगों का दिल्ली पहुंचने का मिशन था। किसान अन्नदाता है, देश दुनिया को खिलाते है। हमारा रोजगार छिन जाएगा तो दुनिया क्या खाएगी।
मध्यप्रदेश से नर्मदा बचाओ आंदोलन के बैनर तले आए छोटू अलोने ने बताया, किसान विरोधी बिल के खिलाफ यहां आए हैं किसान अगर अनाज पैदा नहीं करेगा तो लोगों को कैसे खिलाएगा। हर जरूरत की चीज किसान से जुड़ी हुएं हैं। उन्होंने आगे कहा, 24 नवम्बर को निकले थे, हमें बॉर्डर पर रोक दिया गया, हमारी मांगे जब तक पूरी नहीं होगी तब तक हम यहां से नहीं हिलेंगे।
दिल्ली टिकरी और सिंघु बॉर्डर पर किसान अभी भी पर जमे हुए हैं। विभिन्न किसान संगठन इस वक्त बुराड़ी के निरंकारी मैदान में मौजूद है और अपने गाड़ियों और ट्रैक्टरों में किसान सोए।
दिल्ली के विभिन्न जगहों से लोग लंगर लेकर भी आ रहे हैं, ताकि किसानों को किसी तरह की कोई कमी न आए। गुरु की लंगर सेवा सन 1987 से गरीब लोगों को लंगर खिलाते आ रहे परविंदर सिंह एक सेवादार हैं। उन्होंने बताया, हम लोग गरीबों को लंगर खिलाते हैं और आज हम लोग यहां आए हैं अगर भविष्य में फिर यही जरूरत पड़ी तो हम आएंगे।
उन्होंने कहा, 500 से हजार लोगों के खाने का इंतजाम किया है। दिल्ली में सड़क किनारे जितने भी लोग रहते है हम उन लोगों की सेवा करते हुए आए हैं। हालांकि, अधिक्तर किसानों ने अपने खाने का इंतजाम खुद किया हुआ है और मैदान में ही बना भी रहे हैं। लेकिन फिर भी कुछ ऐसे हैं जिनके पास खाने की व्यवस्था नहीं है। वह सभी लोग लंगर खा रहे हैं।
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