
नई दिल्ली। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आई-टी रिटर्न दाखिल करने के लिए नियत तारीखों के और विस्तार की प्रतीक्षा कर रहे सभी करदाताओं की उम्मीदों को झटका दिया है। सीबीडीटी ने कहा, इस प्रक्रिया में अनिश्चितकाल देरी नहीं की जा सकती। इससे कर विभाग की कार्यप्रणाली और सरकार के कल्याणकारी कार्यक्रम में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
बता दें कि सरकार ने दिसंबर 2020 में आईटीआर (ITR) फाइल करने की तारीख आगे बढ़ाकर 10 जनवरी कर दी थी। अब इसकी डेडलाइन बढ़ाकर 15 फरवरी कर दी गई है। इसे तीन बार बढ़ाया जा चुका है। नॉन-ऑडिट मामलों में टैक्स रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन 10 जनवरी की थी, जो अब बीत चुकी है।
सीबीडीटी के इस बयान का मतलब है कि व्यक्तिगत करदाता जो रिटर्न भरने के लिए 10 जनवरी की समय सीमा से चूक गए हैं, उन्हें अब इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए जुर्माना देना पड़ सकता है।
इस साल दाखिल किए गए रिटर्न के आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि संख्या पिछले साल की तुलना में अधिक है। 2019-20 में, नियत तिथि तक लगभग 5.62 करोड़ आयकर रिटर्न दाखिल किए गए थे और इस वर्ष (2020-21) 10 जनवरी तक पहले से ही 5.95 आईटीआर दायर किए गए हैं।
सीबीडीटी ने अपने आदेश में कहा कि आगे कोई भी विस्तार रिटर्न फाइलिंग अनुशासन पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा और उन लोगों के साथ अन्याय होगा, जिन्होंने नियत समय से पहले रिटर्न फाइल करने के लिए कष्ट सहे हैं। कार्यालय के आदेश में कहा गया है कि समयसीमा विस्तार करने से कोविड के समय में गरीबों को राहत देने के सरकार के प्रयासों में भी बाधा आएगी।
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