
रतलाम, 28 जनवरी, न्यूज़ मंच, छह दिन पहले बुधवार को मध्य प्रदेश में रतलाम जिले के कमेड़ गांव में आरएसएस कार्यकर्ता( RSS Worker Murder) की हत्या का मामला सामने आया था। उस घटना को लेकर बेहद ही चौका देने वाला खुलासा हुआ है। घटना की जाँच पड़ताल के दौरान जब डीएनए रिपोर्ट सामने आयी तो मामला पूरी तरह पलट गया। पुलिस के मुताबिक पाटीदार ने खुद ही अपने कत्ल की साजिश रची थी। हत्या आरएसएस कार्यकर्ता हिम्मत पाटीदार की नहीं, बल्कि उसके पूर्व नौकर मदन मालवीय की हुई थी।
पाटीदार ने खुद ही अपने कत्ल की साजिश
पाटीदार ने खुद ही अपने कत्ल की साजिश रची थी। उसने अपने ही कस्बे के एक व्यक्ति की हत्या कर उसका चेहरा जला दिया ताकि लाश को पहचान न जा सके। इसके बाद खुद लापता हो गया। बुधवार को जब पुलिस को लाश मिली तो उन्हें गांव के मदन पर शक हुआ और पुलिस हिम्मत का कातिल मानकर उसकी तलाश कर रही थी। पुलिस को मदन पर शक इस वजह से था क्योंकि हत्या के बाद से ही वो लापता था। लेकिन डीएनए टेस्ट से खुलासा हुआ कि मरने वाला मदन मालवीय ही था।
क़र्ज़ से निजात पाने के लिए की हत्या
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पुलिस ने खोजबीन की तो पता चला कि संघ के शिवपुर मंडल के पूर्व कार्यवाह हिम्मत पाटीदार के सिर पर करीब बीस लाख रुपये का कर्ज था। इसी से निजात पाने के लिए उसने ऐसी दिल दहला देने वाली साजिश रची और उससे रंजिश रखने वाले गांव के ही मदन मालवीय की बेहरहमी से हत्या कर डाली। हत्या कर वह मदन नाम के शख़्स की पहचान छिपाना चाहता था लेकिन इस मकसद में वह कामयाब नहीं हुआ।
पहले शव की पहचान हिम्मत पाटीदार के रूप में हुई थी
रतलाम जिले के कमेड़ गांव में बुधवार को खेत के पास बेरहमी से हत्या किया हुआ एक शव मिला था। मृतक का चेहरा जला हुआ था और उसकी मोटरसाइकिल शरीर से लगभग 10 मीटर की दूरी पर खड़ी थी। पुलिस बुलाने के बाद शव की पहचान की गई। पाटीदार के पिता लक्ष्मीनारायण और चचेरे भाई सुरेश उसकी पहचान की। हिम्मत पाटीदार की हत्या की ख़बर लगते ही हिंदू संगठनों ने हंगामा शुरू कर दिया।
डीएनए टेस्ट ने पलटी पूरी कहानी
इस दौरान मामले की छानबीन में जुटी पुलिस को पता चला कि गांव का युवक मदन मालवीय भी लापता है। इसके पश्चात पुलिस ने मदन को कातिल समझकर उसकी तलाश शुरू कर दी थी। परन्तु डीएनए टेस्ट ने इस हत्याकांड की पूरी कहानी को ही बदल कर रख दिया। डीएनए रिपोर्ट से खुलासा हुआ की हत्या आरएसएस कार्यकर्ता हिम्मत पाटीदार की नहीं, बल्कि उसके पूर्व नौकर मदन मालवीय की हुई थी।
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