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सज्जन चले ससुराल : 1984 के दंगों में सज्जन कुमार की भूमिका साबित, आजीवन कारावास और पांच लाख रुपए का जुर्माना
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सज्जन चले ससुराल : 1984 के दंगों में सज्जन कुमार की भूमिका साबित, आजीवन कारावास और पांच लाख रुपए का जुर्माना

दिल्ली, 18 दिसंबर, न्यूज़ मंच, 1984 के सिख विरोधी दंगों में सज्जन कुमार की भूमिका साबित होने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।  इसके बाद सज्जन कुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को लिखा कि वह पार्टी छोड़ रहे हैं। राहुल गांधी को लिखे पत्र में कहा गया, "मैं दिल्ली के उच्च न्यायालय के फैसले के चलते भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से अपना इस्तीफा दे रहा हूं।"

सज्जन कुमार का शुरुआती करियर 

1977 में सज्जन कुमार ने नगर पालिका का चुनाव जीत कर अपना राजनीतिक करियर शुरू किया।  

इसके बाद वे संजय गांधी की नज़रों में आये और उनके करीबी बन गए। 

फिर उन्होंने 1980 में पहली बार दिल्ली से ही लोकसभा का चुनाव लड़ा। उन्होंने दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री रहे ब्रम्हा प्रकाश को चुनावों में हरा कर सबको चौंका दिया। इसके बाद दो बार के चुनावों में उन्होंने जीत को बरकरार रखा। 

1984 के सिख विरोधी दंगों में सज्जन कुमार की भूमिका 

1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देशभर में सिख विरोधी दंगे फ़ैल गए थे। उन दंगों के दौरान दिल्ली कैंट के राजनगर इलाके में  में 5 सिखों की हत्या कर दी गयी थी। ये पांच सिखों थे केहर सिंह, गुरप्रीत सिंह, रघुविंदर सिंह, नरेंद्र पाल सिंह और कुलदीप सिंह। 
इस केस में भीड़ को उकसाने में जिन लोगों का नाम सामने आया, उनमें सज्जन कुमार भी एक थे। सज्जन कुमार पर डकैती और सिखों के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने के आरोप लगे। 

इस मामले में केहर सिंह की विधवा और गुरप्रीत सिंह की मां जगदीश कौर ने शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित परिवार की शिकायत और न्यायमूर्ति जीटी नानावटी आयोग की सिफारिश के आधार पर सीबीआई ने सभी छह आरोपियों के खिलाफ 2005 में एफआईआर दर्ज की थी। वर्ष 2005 में ही सीबीआई ने सज्जन कुमार के खिलाफ दो चार्जशीट दायर की थी।

13 जनवरी 2010 को आरोपपत्र दाखिल किया गया था। लेकिन अप्रैल 2013 में निचली अदालत ने सज्जन कुमार को सभी आरोपों से बरी कर दिया। 

इसके बाद कई सिख संगठनों ने आंदोलन शुरू किया, जिसके फलस्वरूप सीबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट में फिर अपील की। 

27 अक्टूबर 2018 को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और अब सज्जन कुमार को दोषी करार दिया है। सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा और पांच लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। 

चाम कौर की गवाही से सज्जन कुमार दोषी साबित हुए 

पिछले महीने पटियाला हाउस कोर्ट में मामले की एक गवाह चाम कौर ने सज्जन कुमार की पहचान की। चाम ने बयान दिया था- "घटनास्थल पर मौजूद सज्जन ने वहां मौजूद दंगाइयों से कहा था कि सिखों ने हमारी मां (इंदिरा गांधी) का कत्ल किया है, इसलिए इन्हें नहीं छोड़ना। बाद में भीड़ ने उकसावे में आकर मेरे बेटे और पिता का कत्ल कर दिया।"

जिसके बाद दंगों में सज्जन कुमार की भूमिका साबित होने के बाद हुई और दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर 2018 को उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

1984 के सिख विरोधी दंगों में लगभग 3,000 लोग मारे गए थे। दिल्ली के पूर्व सांसद सज्जन कुमार, पहले बड़े नेता हैं जो इस केस में दोषी साबित हुए हैं। 

उच्च न्यायालय ने कहा, "पीड़ितों को आश्वस्त करना महत्वपूर्ण है कि, चुनौतियों के बावजूद सत्य की जीत होती है।" उच्च न्यायालय ने जगदीश कौर और निरप्रीत कौर जैसे पीड़ितों की प्रशंसा की जो 34 साल तक न्याय के लिए लड़े।
 

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