
नई दिल्ली, 21 नवंबर, न्यूज़मंच, सन 2016 में लिए गए नोटबंदी के फैसले को लेकर मोदी सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर है। विपक्ष इस फैसले को लगातार दुर्भाग्यपूर्ण बताता रहा है, जबकि सरकार इसे फायदेमंद बताती रही है।
वित्त मंत्रालय से जुड़ी संसद की एक स्थायी समिति की बैठक में कृषि मंत्रालय ने स्वीकार किया कि नगदी की कमी के चलते लाखों किसान, रबी सीजन में बुआई के लिए बीज-खाद नहीं खरीद सके। कृषि मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में भी स्वीकार किया है कि नोटबंदी का किसानों पर बुरा असर पड़ा है। इसकी वजह से ग्रामीण अर्थव्यवस्था चौपट हो गई।
नोटबंदी से चौपट हुई ग्रामीण अर्थव्यवस्था
वित्त मंत्रालय से जुड़ी संसद की एक स्थायी समिति की बैठक में कृषि मंत्रालय ने माना कि नगदी की कमी के चलते लाखों किसान, रबी सीजन में बुआई के लिए बीज-खाद नहीं खरीद सके हैं। इसका उनपर बुरा असर पड़ा है। कृषि मंत्रालय ने नोटबंदी के असर पर एक रिपोर्ट भी संसदीय समिति को सौंपी है। कृषि मंत्रालय ने समिति को बताया कि नोटबंदी जब लागू हुई तब किसान या तो अपनी खरीफ की पैदावार बेच रहे थे या फिर रबी फसलों की बुआई कर रहे थे।
किसान नहीं खरीद पाए बीज-खाद
जिस समय नोटबंदी की गई, वह रबी का मौसम था। उस समय किसानों को बीज-खाद के लिए नगदी की बेहद जरूरत होती है। नोटबंदी की वजह से जब नकदी की दिक्कत हुई तो बहुत से किसान बीज और खाद नहीं खरीद सके। जिसकी वजह से उनकी आर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ा। इसके साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह लड़खड़ा गई।
कर्ज के फंदे में फंसे किसान
कृषि मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में यहां तक कहा है कि बड़े किसानों को भी खेती के कामों का पारिश्रमिक देने और खेती की जरूरतों को पूरा करने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ा। मंत्रालय ने बताया कि नकदी की किल्लत के चलते राष्ट्रीय बीज निगम के लगभग 1 लाख 38 हजार क्विंटल गेहूं के बीज नहीं बिक पाए थे। बड़ी संख्या में बीज नहीं खरीद पाने की वजह से किसानों ने बोनी नहीं की थी। जिसकी वजह से बाद के दिनों में वे भीषण कर्ज के फंदे में फंस गए थे। हालांकि सरकार ने बाद में गेहूं के बीज खरीदने के लिए 1000 और 500 रुपए के पुराने नोटों के इस्तेमाल की छूट दे दी थी। कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार की इस छूट के बाद भी बीज के बिक्री में कोई खास तेजी नहीं आई थी।
श्रम मंत्रालय ने की तारीफ
हालांकि, श्रम मंत्रालय ने समिति के समक्ष नोटबंदी की तारीफ करते हुए अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नोटबंदी के बाद की तिमाही में रोजगार के आंकड़ों में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। बैठक में विपक्ष के सांसदों ने कृषि मंत्रालय और एमएसएमई मंत्रालय के अधिकारियों से कड़े सवाल पूछे। कई सांसदों ने जानना चाहा कि नोटबंदी के बाद लाखों लोगों की नौकरी जाने की रिपोर्ट की क्या सरकार को जानकारी थी? इस समिति के अध्यक्ष कांग्रेस सांसद वीरप्पा मोईली हैं। समिति के सदस्यों में चेयरमैन सहित कुल 31 सांसद हैं। सदस्यों में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह भी शामिल हैं।
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