
नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण के बीच देश के सबसे बड़े अस्पताल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) का नर्सिंग स्टाफ अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। नर्सिंग स्टाफ की मांग है की छठे केंद्रीय वेतन आयोग की अनुशंसा को लागू किया जाए। इसके अलावा नर्सिंग स्टाफ चाहता है कि अनुबंध पर भर्ती खत्म हो। सोमवार दोपहर से करीब 5000 नर्सों की इस हड़ताल से अस्पताल में भर्ती मरीजों की परेशानी बढ़ गई है।
नर्सिंग स्टाफ के अचानक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने के बाद एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने उनसे आंदोलन वापस लेने और काम पर लौटने की अपील की है। गुलेरिया ने कहा कि नर्सिंग स्टाफ की 23 मांगें हैं। लगभग सभी मांगों को एम्स प्रशासन और सरकार ने पूरा किया है। मैं सभी नर्सों और नर्सिंग अधिकारियों से अपील करता हूं कि वे महामारी के इस समय हड़ताल पर न जाएं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने भी नर्सों को हड़ताल बंद करने के लिए कहा है। नर्सिंग स्टाफ से कहा गया है कि वह अपनी हड़ताल वापस ले नहीं तो उनके खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नर्स यूनियन ने दावा किया कि अक्टूबर 2019 में उन्हें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वासन दिया था कि उनका वेतन छठे वेतन आयोग के अनुसार पुनर्गठित किया जाएगा। लेकिन अब तक प्रशासन ने ऐसा नहीं किया। नर्सों के हड़ताल पर जाने से अस्पताल में भर्ती मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। अस्पताल पहुंचे मरीजों का कहना है कि हड़ताल के चलते इलाज नहीं हो पा रहा है। अपनी पत्नी का इलाज करवाने एम्स पहुंचे भूपेंद्र का कहना है कि वह शाम को उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर से एम्स में इलाज करने के लिए आए थे। लेकिन डॉक्टरों ने हड़ताल कहकर इलाज करने से मना कर दिया।
Leave Comments