
भोपाल: मध्य प्रदेश में PTRI ने पुलिस को सुझाव भेजा है कि रोड एक्सीडेंट में हुए मौत के मामलों की जांच भी उसी तकनीक से करें जिस तकनीक से पुलिस हत्या के मामलों की जांच करती है। इसके पीछे का मकसद यह है कि हत्या के मामले में जिस तरीके से सजा होती है उसी तरह से रोड एक्सीडेंट करने वाले के ऊपर भी वैसी ही सजा होगी।जिससे लोग सजा के डर से संभलकर गाड़ी चलाएंगे।
अधिकांश सड़क हादसों में लापरवाही से वाहन चलाने की धाराओं में एफआईआर होती है।एफआईआर होने से आरोपी थाने से मुचलके पर या कोर्ट से उसे आसानी से जमानत मिल जाती है।लेकिन पुलिस रोड एक्सीडेंट में हुई हत्या को भी गम्भीरता से जांच करते हुए हत्या के समान गैर इरादतन हत्या की धारा लगाएगी तो आरोपी को कड़ी सजा मिल सकती है।इसके अलावा रोड एक्सीडेंट के मामले भी कम आएंगे।
बताते चलें PTRI के एडीजी डीसी सागर की यह बेहद संवेदनशील मामला है,क्योकि सभी की जिंदगी अनमोल है।यदि कोई दुर्घटना हो गई और उसमें मृत्यु होती है तो उस मामले की विवेचना एक मर्डर केस की तरह फोरेंसिक साइंस और तकनीकी दृष्टिकोण से होनी चाहिए।
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