
नई दिल्ली, 22 नवंबर, न्यूज़मंच, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) विवाद में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले ही फोर्स लीव पर भेजे गए सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के सीनियर और जूनियर वकील आपस में उलझ पड़े। सीनियर से विवाद के बाद जूनियर वकील गोपाल शंकरनारायणन ने यह केस छोड़ दिया है।
कहा इस मामले से हट रहा हूं पीछे
उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "मैं साफ करना चाहता हूं कि मैंने सोमवार शाम को ही इस मामले से अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। मैं इसी वजह से मंगलवार को सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद नहीं रहा। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि मेरे सीबीआई निदेशक वर्मा से संबंध खत्म हो गए हैं।"
उन्होंने कहा,"मेरे और वर्मा के मैत्रीपूर्ण रिश्ते जारी रहेंगे। यह पेशेवर जुड़ाव था, जो अब खत्म हो गया है।"
सीजेआई ने जताई थी नाराजगी
गुप्त दस्तावेजों के लीक होने पर नाराज़, भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने मंगलवार को (सीबीआई) के निदेशक आलोक वर्मा के मामले की सुनवाई 29 नवंबर तक स्थगित कर दी। जिस दस्तावेज का गोगोई ने जिक्र किया, वो सोमवार को सीलबंद लिफाफे में अलोक वर्मा द्वारा अदालत में जमा किये गए थे। इस लिफाफे में उनके के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर सीवीसी की जांच रिपोर्ट पर उनकी प्रतिक्रिया शामिल थी। यह दस्तावेज लीक हो गए और कुछ मीडिया ने इन्हे कवर कर लिया।
मंगलवार को सुनवाई में जब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) रंजन गोगोई ने मीडिया में केस से संबंधित रिपोर्ट लीक होने पर नाराजगी जताई थी, तब वर्मा का पक्ष रखने के लिए केवल वरिष्ठ वकील फली नरीमन ही वहां मौजूद थे। उनके साथ न तो वकील-ऑन-रिकॉर्ड पूजा धार या और न ही ब्रीफिंग वकील शंकरनारायणन थे, जो पिछले सभी मौकों पर कार्यवाही का हिस्सा रहे थे।
नरीमन ने 19 नवंबर को सीबीआई मामले में वर्मा के बयान दर्ज कराने पर गोपाल शंकरनारायणन द्वारा और मोहलत मांगने की बात पर सवालिया निशान लगाए थे, और कहा कि उन्हें इसके जानकारी नहीं थी, और यह अनाधिकृत था।
मंगलवार को शंकरनारायणन ने सफाई दी कि वकील-ऑन-रिकॉर्ड पूजा धार को इसकी जानकारी थी, ये उनसे अधिकृत था और नरीमन को भी इसके बारे में बताया गया था। लेकिन नरीमन इसपर अडिग रहे के उन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं थी। नरीमन ने यह कहा कि अगर केस वरिष्ठ वकील के पास पहुंचे, तो फिर उसमें उसके संज्ञान के बगैर कुछ नहीं होना चाहिए। शंकरनारायणन ने इसी बात का जिक्र करते हुए केस छोड़ा कि बयान डेढ़ बजे दर्ज होने की सूचना उन्हें नहीं दी गई।
संवाद की कमी बनी विवाद की वजह
शंकरनारायणन ने इसे लेकर कहा था उनके व वरिष्ठ वकील के बीच में संवाद की कमी रही, जिसके कारण ऐसा हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि आलोक वर्मा के संपर्क में सीधे तौर पर वरिष्ठ वकील का दफ्तर था। इसी से असंतुष्ट होकर, सोमवार की सुबह के उल्लेख और वर्मा की प्रतिक्रिया दर्ज करने के बाद, उन्होंने इस केस को अलविदा कह दिया था।
हालाँकि, कोर्ट ने इसपर ध्यान नहीं दिया और यह जानने पर ज़्यादा ज़ोर दिया कि, वर्मा के बयान के लीक होने के पीछे क्या वजह थी, जिसकी सफाई नरीमन ने सीजेआई को दी।
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