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भारत की सबसे बड़ी जाँच एजेंसी कि किस्मत का फैसला भारत कि सबसे बड़ी अदालत के हाथों में !
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भारत की सबसे बड़ी जाँच एजेंसी कि किस्मत का फैसला भारत कि सबसे बड़ी अदालत के हाथों में !

अब भारत के सबसे बड़ी जाँच एजेंसी कि किस्मत का फैसला भारत कि सबसे बड़ी अदालत के हाथों में है. सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेजे जाने के बाद से पूरे देश में मोदी सरकार के कदम पर सवाल उठाये जा रहे हैं. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई हुई है. गुरुवार को प्रेस कांफेरेनेक कर राहुल गाँधी ने भी इस कदम पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. 

इस मामले की सुनवाई 3 जजों के पीठ ने की, जिनमे चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के साथ 2 अन्य जज, जस्टिस एस के कौल एवं जस्टिस के एम जोसेफ भी थे. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सीवीसी को अपनी जाँच 2 हफ्ते में पूरी करने के लिए कहा है. उन्होंने यह भी कहा है कि, सीवीसी ये सुनिश्चित करे कि देशहित में इस मामले को लम्बा नहीं खींच सकते हैं.  

सीबीआई मामले में की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा है कि वह इस मामले को देखेंगे, उन्होंने सीवीसी से अपनी जांच अगले 2 हफ्ते में पूरी करने को कहा है, ये जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज एके पटनायक की निगरानी में होगी. चीफ जस्टिस ने कहा कि देशहित में इस मामले को ज्यादा लंबा नहीं खींच सकते हैं.

ज्ञात हो कि, अलोक सरमा ने सुप्रीम कोर्ट के सामने एक याचिका में दलील दी थी कि सीबीआई निदेशक की नियुक्ति करने वाली समिति में प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश और नेता विपक्ष शामिल रहते हैं. सीबीआई निदेशक की नियुक्ति 2 वर्ष के लिए की जाती है और कार्यकाल के दौरान बिना इस समिति की अनुमति लिए हटाया अथवा तबादला नहीं किया जा सकता है. लोक वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है. उन्होंने सरकार से पूछा है कि किस आधार पर आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजा गया है. इस मामले में अब 12 नवंबर को अगली सुनवाई होगी. CJI ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस स्थिति में बस इस मामले पर सुनवाई होगी कि ये प्रथम दृष्टया केस बनता है या नहीं.

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि अंतरिम डायरेक्टर नागेश्वर राव की नियुक्ति पर चीफ जस्टिस ने कहा है कि वह कोई नीतिगत फैसला नहीं कर सकते हैं. वह सिर्फ रूटीन कामकाज ही देखेंगे. नागेश्वर राव ने 23 अक्टूबर से अभी तक जो भी फैसले लिए हैं, उन सभी को सील बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपा जाएगा. 

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