
नई दिल्ली। तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में सड़कों पर डटे किसानों की केंद्र सरकार के साथ बुधवार को छठे दौर की औपचारिक वार्ता होगी। दोपहर 2 बजे विज्ञान भवन में ये चर्चा होगी। हालांकि सरकार और किसान संगठन पहले से तय मुद्दों को लेकर अपने-अपने रुख पर कायम हैं। सरकार की ओर से बार-बार कहा जा रहा है कि किसानों के मसले का समाधान वार्ता से ही होगा और सरकार के आग्रह पर ही आंदोलन की अगुवाई कर रहे किसान संगठनों के नेता अगले दौर की वार्ता के लिए राजी हुए हैं।
पंजाब में भारतीय किसान यूनियन (लाखोवाल) के जनरल सेक्रेटरी हरिंदर सिंह लाखोवाल बुधवार को सरकार के साथ वार्ता के लिए जाने वाले किसान नेताओं में शामिल रहेंगे। हरिंदर सिंह से जब पूछा कि वह इस वार्ता को लेकर कितने उत्साहित हैं तो उन्होंने कहा, सभी किसान चाहते हैं कि सरकार जल्द इन तीनों कानूनों को रद्द करे ताकि आंदोलन समाप्त हो। वह कहते हैं कि ये कानून किसानों के हित में नहीं हैं, इसलिए सरकार किसी अन्य मुद्दे पर बात करने से पहले इन तीनों कानूनों को रद्द करे। हरिंदर सिंह ने कहा, हम सरकार के साथ सभी चार मसलों पर बात करेंगे और हमें उम्मीद है कि बातचीत से मसले का समाधान निकलेगा।
सरकार और किसान नेताओं के बीच हुए पत्राचार में दोनों पक्षों ने साफ नीयत से सभी मसलों पर बातचीत करने की बात कही है। कृषि सचिव की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि भारत सरकार भी साफ नीयत और खुले मन से प्रासंगिक मुद्दों के तर्कपूर्ण समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस पत्र के जवाब में संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से कृषि सचिव को लिखे गए पत्र में भी प्रासंगिक मुद्दों के तर्कपूर्ण समाधान के लिए तय एजेंडा के अनुसार वार्ता चलाने की अपील की गई है।
किसान संगठन की ओर से लिखे गए इस पत्र में भी वार्ता के लिए चार मुद्दों का जिक्र किया गया है। ये मुद्दे हैं :
1. तीनों कृषि कानून वापस करने के तरीके पर चर्चा।
2. एमएसपी को कानूनी रूप देना, कई फसलों पर गारंटी मिलना।
3. एनसीआर में वायु प्रदूषण के मसले पर लाए गए कानून को वापस लेना।
4. सरकार द्वारा बिजली बिलों को लेकर लाए गए नए बिल को वापस लेना।
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