
नई दिल्ली। कृषि कानूनों के विरोध में किए जा रहे किसान आंदोलन को एक महीने से ज्यादा का समय हो चुका है। इस बीच एक रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि पंजाब में किसानों ने अपना विरोध जताने के लिए 1500 से ज्यादा मोबाइल टावरों को नुकसान पहुंचाया। कई मोबाइल टावरों की बिजली काट दी गई तो कई जगह तार के बंडल जला दिए गए हैं।
इससे पहले किसानों पर रिलायंस पेट्रोल पंप, रिलायंस रिटेल को नुकसान पहुंचाकर अपना गुस्सा उतारने का आरोप लगा था। दरअसल, किसानों को लगता है कि नए कृषि कानूनों का सबसे ज्यादा फायदा उद्योगपति मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी की फर्मों को होगा, इसलिए किसान इन कंपनियों के संसाधनों पर ही अपना गुस्सा निकाल रहे हैं।
क्या कहा कैप्टन अमरिंदर सिंह ने?
मोबाइल टावरों पर तोड़-फोड़ की घटनाओं के बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि पंजाब में अराजकता या किसी निजी या सार्वजनिक संपत्ति के विनाश को सहन नहीं किया जाएगा। कैप्टन अमरिंदर ने कहा, राज्य में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर रोक नहीं है लेकिन संपत्ति के नुकसान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सीएम ने ऐसे लोगों के खिलाफ पुलिस को कार्रवाई का आदेश दिया है। हालांकि पंजाब पुलिस ने अबतक किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। इंडियन टेलिग्राफ एक्ट 1885 की धारा 25 के मुताबिक टेलिकॉम संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने पर 3 साल की सजा का प्रावधान है।
वहीं अमरिंदर सिंह ने ये भी कहा कि इस तरह संचार साधनों को नुकसान पहुंचाना छात्रों, खासकर बोर्ड परीक्षा की तैयारी करने वाले और कोविड महामारी के बीच कारण घर से काम करने वाले पेशेवरों के लिए नुकसानदायक होगा। उन्होंने कहा कि बैंकिंग सेवाएं भी काफी हद तक ऑनलाइन लेनदेन पर निर्भर हैं, मोबाइल में तोड़फोड़ की वजह से इस पर भी असर पड़ रहा है।
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