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खत्म हुई दूरियां जब उमर ने 15 मिनट में महबूबा के ट्वीट को चार बार किया रिट्वीट 
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खत्म हुई दूरियां जब उमर ने 15 मिनट में महबूबा के ट्वीट को चार बार किया रिट्वीट 

श्रीनगर, न्यूज़मंच, जगजाहिर है कि पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सालों से एक दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंदी रहे हैं। उन्हें कभी-कभार ही एक दूसरे से आंखें मिलाते देखा गया है। लेकिन बुधवार शाम स्थिति पहले से बिल्कुल अलग थी। उमर अब्दुल्ला ने 15 मिनट के भीतर महबूबा मुफ्ती के ट्वीट्स को चार बार रिट्वीट किया। 

सरकार बनाने का दावा किया तो भंग की विधानसभा
यह स्थिति तब पैदा हुई, जब कल शाम पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP), नेशनल कांफेरेंस (NC) और कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनाने का फैसला लिया और एक खत के द्वारा राज्यपाल को सूचित किया।  इसी के बाद बीजेपी के साथ मिलकर पीपलस कांफ्रेंस (PC) के सज्जाद लोन ने भी एक व्हाट्सप्प मैसेज के द्वारा राज्यपाल को सूचित किया कि उनके पास पर्याप्त संख्या है और वे अपना बहुमत सिद्ध करना चाहते हैं। 

इन्ही सब के चलते, जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने बुधवार को विधान सभा भांग कर दी।  

उमर अब्दुल्ला के ट्वीट :

उमर अब्दुल्ला ने इस मामले में सबसे पहला ट्वीट तब किया, जब महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट करके बताया कि उनका सरकार बनाने के दावे का फैक्स राजभवन नहीं जा रहा है। 

इसके बाद अब्दुल्ला ने ट्वीट किया, 'जम्मू-कश्मीर राजभवन को नई फैक्स मशीन की तुरंत जरूरत है।'

इसके तुरंत बाद राज्यपाल ने विधानसभा भंग करने का आदेश जारी कर दिया। इस पर मुफ्ती ने एक के बाद एक कई ट्वीट किए।

इनमें से चार ट्वीट्स को अब्दुल्ला ने रीट्वीट किया और महत्वपूर्ण बात यह है कि सभी रीट्वीट 15 मिनट के भीतर किए गए।


उमर ने कहा यह महज संयोग नहीं
विधानसभा भंग होने के बाद अब्दुल्ला ने ट्वीट किया, 'नेशनल कॉन्फ्रेंस पिछले पांच महीने से विधानसभा भंग करने की मांग कर रही है। यह कोई संयोग नहीं हो सकता कि मुफ्ती के सरकार बनाने का दावा पेश करने के कुछ मिनट बाद ही विधानसभा भंग करने का आदेश जारी कर दिया गया।' उमर अब्दुल्ला ने मुफ्ती के एक ट्वीट को रीट्वीट करते हुए अपनी प्रतिक्रिया भी दी है। 


महबूबा को दी आगे के संघर्ष के लिए शुभकामनाएं
मुफ्ती ने ट्वीट किया था, 'एक नेता के तौर पर मेरे 26 साल के कैरियर में मैं सोचती थी कि मैंने सब कुछ देख लिया है। लेकिन ऐसा कभी नहीं कहना चाहिए। असंभव को संभव बनाने के लिए मैं उमर अब्दुल्ला और अंबिका सोनी का तहेदिल से शुक्रिया अदा करना चाहूंगी।' इस ट्वीट को रिट्वीट करते हुए अब्दुल्ला ने लिखा, 'और मैंने कभी नहीं सोचा था कि किसी बात पर आपसे सहमत होते हुए आपके ट्वीट को रिट्वीट करूंगा। राजनीति सच में अनोखी है। आगे की जंग के लिए शुभकामनाएं। एक बार फिर लोगों की समझ की जीत होगी।'

क्या है पूरा मामला 

19 जून 2018 को जम्मू-कश्मीर में भारतीय जनता (बीपार्टीजेपी) ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के साथ गठबंधन तोड़  दिया था। भाजपा के जम्मू-कश्मीर के सांसदों ने दिल्ली में अमित शाह के साथ बैठक की।  इसके बाद पार्टी के महासचिव राम माधव ने पार्टी के इस निर्णय की घोषणा की।

मुख्यमंत्री मेहबूबा मुफ्ती के राज्यपाल को इस्तीफा दिए जाने के बाद राज्यपाल ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। यह जम्मू कश्मीर राज्य में लगाया आठवां राष्ट्रपति शासन था।

इस स्तिथिति के आने के पहले, दोनों पक्षों के कई मतभेद हुए, जिनमे दो मुख्य मुद्दे थे :-

रमज़ान युद्धविराम - केंद्र ने राज्य में रमजान के दौरान लगाए गए एकतरफा युद्धविराम को बढ़ाने से मना कर दिया। मेहबूबा ने युद्धविराम की मांग की थी, और राज्य भाजपा ने कहा, कि पार्टी इस विचार का समर्थन नहीं करेगी। 

कठुआ रेप केस - भाजपा विधायक जम्मू के कथुआ में आठ वर्षीय बच्ची के गैंगरेप और हत्या में आरोपी के समर्थन में एक रैली में शामिल हो गए थे।

इनके अलावा भी दो और प्रमुख मुद्दे हैं, जो हमेशा से ही बीजेपी - PDP के मतभेद के कारण रहे हैं।  

AFSPA को हटाए जाने की मांग -  PDP राज्य से AFSPA (Armed Forces (Special Powers) Act) को हटाने के मत में रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी ने AFSPA को वापस लेने का विरोध किया था। 

आर्टिकल 370 को जम्मू कश्मीर में जारी रखना - आर्टिकल 370, जो की जम्मी-कश्मीर को एक स्पेशल राज्य का दर्जा देता है, इसे राज्य में जारी रखना भी एक मतभेद का कारण रहा है। PDP इसे जारी रखने के मत में है और बीजेपी इसके बहुत अधिक समर्थन में नहीं है।  

किसके पास कितनी सीटें 

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में PDP की 28 सीटें हैं, और बीजेपी के पास 25 सीटें हैं। बहुमत सिद्ध करने के लिए 45 सीटों की आवश्यकता है। 

इतने मतभेदों के बाद भी सरकार बनाया जाना और उसे इतने दिनों तक साथ में सरकार चला पाना, बीजेपी और PDP की राजनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है, पर इतिहास गवाह है कि, 180 डिग्री के मतभेद ज़्यादा समय तक गठबंधन चलने नहीं देते।  

इसी का फायदा कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस को हो सकता है । PDP के 28 विधायक हैं, इसके बाद नेशनल कांफ्रेंस (NC) के 15 और कांग्रेस के साथ 12 है, जो गठबंधन को 44 के बहुमत से काफी ऊपर ले जाएगा।

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