
इंदौर, न्यूज़मंच, मध्यप्रदेश में सत्ता का प्रकाश पुंज कहे जाने वाले मालवा-निमाड़ अंचल से भारतीय जनता पार्टी का जनाधार कम होता दिखाई दे रहा है। किसान आंदोलन, पाटीदारों की नाराजगी और आदिवासी संगठन जयस का बढ़ता प्रभाव मालवा-निमाड़ में कांग्रेस को फायदा पहुँचाता दिखाई दे रहा है।
इसी राजनैतिक फायदे से आकर्षित होकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी मालवा निमाड़ में कई दौरे कर चुके हैं। दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी, पिछले 15 सालों से अभेद रहे, भाजपा के इस गढ़ को बचाने मालवांचल के दौरे कर रहे हैं।
राजनैतिक विश्लेषकों के मुताबिक मालवा-निमाड़ अंचल की 66 सीटों में से, जिस पार्टी के पास ज्यादा सीटें रहती हैं, प्रदेश में उसी पार्टी की सरकार बनती है। पिछले तीन विधानसभा चुनावों के दौरान मालवा निमाड़ की ज्यादातर सीटों पर भाजपा का कब्जा रहा, इसी का नतीजा है कि मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार के तीन कार्यकाल पूरे हो चुके हैं।
अब एक बार फिर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों का फोकस मालवा-निमाड़ की 66 सीटों पर है, इसलिए ही राहुल गांधी पिछले कुछ महीनों में मालवा-निमाड़ अंचल के तीन दौरे कर चुके हैं। वहीं भाजपा नेता भी मालवा-निमाड़ क्षेत्र में अपनी सक्रियता बनाए हुए हैं।
क्या है मालवा - निमाड़ का गणित
230 में से 66 सीटें सिर्फ मालवा-निमाड़ क्षेत्र में ही आती हैं। मालवा क्षेत्र में आगर, देवास, धार, इंदौर, झाबुआ, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, उज्जैन जिले शामिल हैं। मालवा क्षेत्र में कुल 50 विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें पिछले दो चुनावों में भाजपा ने अधिकांश सीटें जीती हैं। भाजपा ने 2008 के चुनावों में इस क्षेत्र में 50 सीटों में से 27 सीटें जीती थीं। और 2013 के चुनावों में 45 सीटों पर विजयी हुई थी।
वही निमाड़ क्षेत्र में को खंडवा, खरगोन, महेश्वर आदि को मिला कर कुल 16 सीटें हैं जिनमे से फिलहाल 11 भाजपा के कब्जे में हैं।
2013 के चुनाव में भी इसी क्षेत्र में कड़े संघर्ष के बाद भाजपा को बहुमत का रास्ता मिला था। तो अपनी रणनीति के अंतर्गत इस विधानसभा चुनाव के अंतिम दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं।
2013 के विधान सभा चुनाव के दौरान भी नरेंद्र मोदी ने इस क्षेत्र में 11 आम सभाएं की थीं। तब मोदी का नाम बीजेपी के प्रधान मंत्री उम्मीदवार के रूप में प्रस्तावित हो चुका था और पूरे देश में मोदी लहर थी। परिणाम स्वरुप इस क्षेत्र की 66 सीटों में से 56 सीटें बीजेपी के खाते में जुड़ गयीं। देश के प्रधान मंत्री बनने के पहले मोदी के लिए यह एक बड़ी जीत थी।
मालवा - निमाड़ में बीजेपी और कांग्रेस का नेतृत्व
दरअसल मालवा-निमाड़ में बीजेपी के साथ बड़े बड़े नाम जुड़े हैं, जिनमे से कुछ हैं, लक्ष्मीनारायण पांडेय (मंदसौर से 8 बार सांसद), पूर्व मुख्य मंत्री वीरेंद्र कुमार सकलेचा, पूर्व मुख्य मंत्री सूंदर लाल पटवा, सुमित्रा महाजन और कैलाश विजयवर्गीय।
वहीं कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी का कद इस क्षेत्र में लगातर मजबूत हो रहा, किसान आंदोलन के दौरान उनकी सक्रियता के चलते जहां वे राहुल गांधी के बेहद नजदीकी लोगों में शुमार हो गए। वहीं मालवा-निमाड़ क्षेत्र के किसानों के बीच भी बेहद लोकप्रिय हो गए। जीतू पटवारी के अलावा कांतिलाल भूरिया, मीनाक्षी नटराजन, तुलसी सिलावट का कद भी मालवा निमाड़ में बड़ा है। इस चुनाव के पहले मालवा-निमाड़ अंचल में कांग्रेस के किसी भी नेता की प्रभावी उपस्थिति दिखाई नहीं देती थी। इसी का नतीजा था कि पिछले तीन विधानसभा चुनावों में मालवा-निमाड़ अंचल में कांग्रेस कोई खास करामात नहीं कर पाई।
कांग्रेस को मिल सकती हैं 30 से 35 सीट
जून 2017 में हुए किसान आंदोलन का सबसे ज्यादा असर मध्यप्रदेश के मालवा-निमाड़ अंचल में ही हुआ। किसान आंदोलन से इस क्षेत्र का राजनैतिक परिदृश्य तेजी से बदला। मंदसौर गोली कांड के बाद राहुल गांधी ने मालवा-निमाड़ के कई दौरे किए। राहुल गांधी के अलावा हार्दिक पटेल ने भी मालवा निमाड़ के कई दौरे किए। हार्दिक पाटीदार समाज के नेता माने जाते हैं, और मालवा-निमाड़ में पाटीदार समाज से जुड़े मतदाताओं का बाहुल्य है। हार्दिक की किसान क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष और पाटीदार समाज के प्रदेशाध्यक्ष और महेंद्र पाटीदार पिछले छह महीने से ही अपने परिवार के साथ मंदसौर में ही डेरा डाले हुए हैं।
मालवा- निमाड़ में किसान आंदोलन की आग ठंडी होती, उससे पहले ही आदिवासी संगठन 'जयस' इस अंचल में तेजी से सक्रिय हो गया। मालवा निमाड़ की अधिकार सीटों पर आदिवासी समाज के मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है। कांग्रेस ने मालवा-निमाड़ में जयस की ताकत को भांपते हुए जयस के प्रदेश अध्यक्ष हीरालाल अलावा को अंचल की मनावर विधानसभा से अपना उम्मीदवार बनाया है। माना जा रहा है कि कांग्रेस की यह चाल भाजपा के लिए घातक साबित हो सकती है।
बीजेपी के लिए संकट बन सकते हैं मालवा-निमाड़ के यह बड़े मुद्दे
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