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क्या मप्र में चौथी बार खिलेगा कमल, या इस बार जनता देगी हाथ का साथ?
Politics

क्या मप्र में चौथी बार खिलेगा कमल, या इस बार जनता देगी हाथ का साथ?

भोपाल , न्यूज़मंच , बीजेपी और कांग्रेस ने मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर, जो राजनैतिक बिसात बिछाई है, उसके चलते माहौल भारत-पाकिस्तान के मैच की तरह ही रोमांचक होता जा रहा है। कभी लगता है की एंटी इंकम्बैंसी के बावजूद भी मध्य प्रदेश में बीजेपी की जड़ें गहरी हैं, जिससे शिवराज को 125 सीटों से नीचे ला पाना मुश्किल नजर आता है। लेकिन अचानक ही राजनैतिक हवाओं का रुख कमलनाथ और ज्योतोरादित्य सिंधिया की तरफ मुड़ता दिखाई देता है।

हाल ही में जब सीहोर के रेहटी ग्राम में शिवराज की पत्नी साधना सिंह वोट मांगने के लिए गयीं, तो वहां की महिलाओं ने उन्हें खरी खोटी सुनाई। (देखें वीडियो)

नसरुल्लाह गंज में भी कुछ महिलाओं ने साधना सिंह को नाराज़गी दिखाई। (देखें वीडियो)

नाराज़गी के यह स्वर अगर बाकी जगहों से उठें तो कोई बात नहीं, लेकिन जब ये स्वर सीएम के ही क्षेत्र सीहोर और उसके आसपास से उठते हैं तो परेशानी का सबब बन सकते हैं।  

एक तरफ  लगता है की शिवराज सरकार ने मध्य प्रदेश को एक बीमारू राज्य से वाकई में ऊपर लाकर विकसित श्रेणी में ला दिया है।  सड़कें, बिजली, पानी, शिक्षा आदि जैसी मूलभूत सुविधाओं में मध्य प्रदेश की जनता कहीं-कहीं बेहद खुश दिखाई देती है, तो किसी किसी क्षेत्र में इन्हीं मुद्दों को लेकर खासा असंतोष भी है। मध्य प्रदेश के किसानों में सरकार के प्रति फैला असंतोष जग जाहिर है। चुनावी समय में शिवराज अपने वादों से किसानो को कितना लुभा पाते हैं, उसी से तय होगा कि मध्यप्रदेश में बीजेपी का चौथी बार सरकार बनाने का सपना साकार होगा या सिर्फ सपना ही रह जाएगा। 

अगर कल की मध्य प्रदेश की अहमदपुर की आम सभा का नज़ारा देखें, तो वहां हज़ारों की संख्या में उमड़ी भीड़ देख कर लगता है कि एंटी इंकम्बैंसी चाहे जितनी भी हो, शिवराज इस क्षेत्र के एक लोकप्रिय नेता हैं और जनता उनसे प्रेम और जुड़ाव महसूस करती है। (देखें वीडियो)

कांग्रेस पार्टी के अंदर भी इस क्षेत्र में टूट पड़ी है।  हाल ही में कांग्रेस के जिला कार्यकारी अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता कमलेश कटारे भाजपा में शामिल हो गए।  

ऐसे में कमलनाथ इस क्षेत्र में कांग्रेस को कितनी सफलता दिलवा पाते हैं, ये तो इलेक्शन का रिजल्ट ही बताएगा। मौजूदा राजनैतिक परिस्थितियों में ज्योतिरादित्य सिंधिया का गढ़ ज़रूर मजबूत दिखाई दे रहा है, वहां पर कांग्रेस के अंदर विरोध दिखाई नहीं देता। 
ऐसे हालातों में यह अंदाजा लगा पाना फिलहाल मुश्किल ही है कि प्रदेश की राजनीति यह ऊंट किस करवट बैठेगा। फिलहाल कांग्रेस और भाजपा दोनों ही एक-दूसरे पर भारी नजर आते हैं। इसलिए अब चुनावी परिणाम आने तक कांग्रेस और भाजपा के पक्ष में माहौल बनते और बिगड़ता ही रहेगा।

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