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स्वास्थ्य सेवा पर सरकारी खर्च से लोगों की जेब पर कम होगा बोझ: आर्थिक सर्वेक्षण
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स्वास्थ्य सेवा पर सरकारी खर्च से लोगों की जेब पर कम होगा बोझ: आर्थिक सर्वेक्षण

नई दिल्ली। बजट सत्र के पहले दिन आज आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 पेश हुआ। इसमें कहा गया कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र पर सरकारी खर्च में वृद्धि की गई है, जो जीडीपी के मौजूदा 1 प्रतिशत से बढ़कर 2.5-3 फीसद तक है। इससे आम आदमी के जेब का खर्च कम होगा। इसमें कहा गया कि सार्वजनिक खर्च में बढ़ोतरी से कुल स्वास्थ्य देखभाल खर्च में 65 फीसद से 30 फीसद तक की कमी हो सकती है। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि देश को भविष्य की महामारियों का प्रभावी ढंग से निपटने के लिए स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

सुब्रमण्यम ने हेल्थकेयर सेक्टर में सरकारी खर्च बढ़ाए जाने की हिमायत की। उन्होंने कहा है कि हेल्थकेयर पर सरकारी खर्च में थोड़ी वृद्धि से देश के गरीब लोगों के पॉकेट से स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च में कमी आएगी। इसमें उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना से हेल्थकेयर बेहतर हुआ है। सुब्रमण्यम ने हेल्थकेयर से जुड़े खर्च के महत्व को रेखांकित के लिए थ्री इडियट्स फिल्म के एक सीन का सहारा लिया।

उन्होंने कहा कि इसके लिए दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा देने के वास्ते अपनी क्षमता को बढ़ाना होगा और टेलीमेडिसिन को विशेष रूप से इंटरनेट कनेक्टिविटी के द्वारा बढ़ाने की आवश्यकता है, स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में निवेश करके पूरी तरह से इसे ठीक करना होगा।

सर्वेक्षण में कहा गया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसने प्रसव पूर्व और प्रसव के बाद देखभाल के लिए सबसे गरीब की पहुंच के रूप में असमानता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, इसे आगे भी आयुष्मान भारत के साथ संयोजन के रूप में जारी रखना चाहिए।

इसमें कहा गया कि निजी क्षेत्र देश स्वास्थ्य सेवा के रूप में बड़े तौर पर पहचानी जाती है, इसलिए नीति निर्माताओं के लिए यह जरूरी है कि वे नीतियों को बनाएं। इसमें कहा गया है कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के नियमन और पर्यवेक्षण के लिए एक क्षेत्रीय नियामक पर विचार किया जाना चाहिए।

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