
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस के भीतर आवाज उठने लगी है। कांग्रेस के कई नेता ये मान रहे हैं कि महागठबंधन के बहुमत तक न पहुंचने की सबसे बड़ी वजह कांग्रेस रही। अब कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री तारिक अनवर ने ट्वीट कर अपनी ही पार्टी को घेरा है। अनवर ने कहा, हमें सच को स्वीकार करना चाहिए। कांग्रेस के कमज़ोर प्रदर्शन के कारण महागठबंधन की सरकार से बिहार महरूम रह गया। कांग्रेस को इस विषय पर आत्म चिंतन ज़रूर करना चाहिए कि उस से कहाँ चूक हुई ? MIM की बिहार में इंटरी शुभ संकेत नहीं है।
तारीक अनवर ने सीएम नीतीश कुमार पर भी निशाना साधा,अनवर ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, 'भाजपा की मेहरबानी रही तो नीतीश जी इस बार अंतिम रूप से मुख्यमंत्री की शपथ लेंगे। देखते हैं 'बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी'। उन्होंने कहा कि भाजपा गठबंधन येन केन प्रकारेण चुनाव जीत गया, परन्तु सही में देखा जाए तो ‘बिहार’ चुनाव हार गया, क्योंकि इस बार बिहार परिवर्तन चाहता था। 15 वर्षों की निकम्मी सरकार से छुटकारा-बद हाली से निजात चाहता था।
एनडीए ने 125 सीटें जीती
बता दें कि 243 विधानसभा सीटों वाले इस राज्य में एक बार फिर एनडीए की सत्ता में वापसी हुई है। हालांकि इस बार जीत का मार्जिन बहुत कम है। बिहार में सरकार बनाने के लिए 122 सीटों के बहुमत की ज़रूरत है और एनडीए ने 125 सीटें जीतकर यह अहम आंकड़ा पार कर लिया। इस गठबंधन में शामिल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 74 सीटों पर विजयी रही। जनता दल यूनाइटेड ने 43 सीटें जीती। छोटे सहयोगी दलों एचएएम और वीआईपी ने 4-4 सीटें जीतीं।
महागठबंधन ने 110 सीटें जीतीं
वहीं, अक्टूबर-नवंबर के चुनावों में राज्य में एनडीए का साथ छोड़ने वाली लोक जनशक्ति पार्टी को केवल 1 सीट से संतोष करना पड़ा। विपक्षी महागठबंधन ने 110 सीटें जीतीं। इसमें राष्ट्रीय जनता दल ने 75 सीटें, कांग्रेस ने 19 और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी-लेनिनवादी (लिबरेशन) ने 12 सीटें जीतीं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी ने 2-2 सीटें जीतीं। बची हुई सीटें अन्य दलों में बंट गईं। जैसे असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम में ने 5 सीटें और बहुजन समाज पार्टी ने 1 सीट जीती। चुनाव में एक निर्दलीय उम्मीदवार भी विजयी हुआ।
आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी
बीजेपी और अन्य सहयोगी दलों के बेहतर प्रदर्शन के कारण एनडीए को बहुमत मिल गया है लेकिन इन चुनावों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) का प्रदर्शन बहुत अधिक उत्साहित करने वाला नहीं रहा। साल 2015 में 71 सीटें जीतने वाली जेडीयू को इस बार 43 सीटें ही हासिल हुई हैं। वहीं साल 2015 के चुनाव में 27 सीटें हासिल करने वाली कांग्रेस को इन चुनावों में सिर्फ़ 19 सीटें ही मिली हैं। महागठबंधन की अगुवाई करने वाली पार्टी आरजेडी 75 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। बीजेपी ने भी अपनी सीटों में इजाफ़ा किया है और वो 74 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर है। साल 2015 में आरजेडी ने 80 और बीजेपी ने 53 सीटें जीती थीं।
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