
नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश के किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई तकनीकी परियोजनाएं शुरु की हैं। इसी लिए कृषि और सिंचाई में प्रौद्योगिकियों, प्रक्रिया और डेटा एनालिसिस पर फोकस किया जा रहा है। मसलन कृषि क्षेत्र में तकनीकी इस्तेमाल से ही उत्पादकता में बेहतर तरीके से सुधार किया जा सकता है। हरियाणा सरकार का फसल विविधिकरण एक बड़ी उपलब्धि के रूप में अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल बन सकती है। यह बात भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने सीआईआई इंडिया इंटरनेशनल फूड एंड एग्री वीक-2020 के तहत 'वाटर: रोल ऑफ टेक्नोलॉजी फॉर स्मार्ट फार्मिंग' पर आयोजित एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कही है।
सम्मेलन का उद्देश्य प्रौद्योगिकियों, प्रक्रिया और डेटा एनालिटिक्स पर ध्यान केंद्रित करते हुए कृषि स्थिरता के महत्व को समझना है ताकि समग्र, एकीकृत निर्णय लिया जा सके। जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि जल सुरक्षा भागीदारी जल प्रबंधन द्वारा प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि डिमांड साइड मैनेजमेंट पर तेजी से काम करना जरूरी है। स्मार्ट खेती और सिंचाई में तकनीक के इस्तेमाल से कृषि में उत्पादकता में सुधार होना चाहिए। ड्रिप इरिगेशन से देश में 50 फीसदी पानी की बचत होगी।
गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा हरियाणा फसल विविधिकरण का अच्छा उदाहरण है और यह एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि हमें वैश्विक जरूरतों के लिए खाद्य उत्पादन की दिशा में काम करना चाहिए और किसानों को उनकी उपज के लिए अच्छे दाम हासिल करने में मदद करनी चाहिए।
सूक्ष्म सिंचाई के उपयोग को बढ़ावा
भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण डॉ अलका भार्गव ने इस बात पर जोर दिया कि हमें पानी की गूढ़ फसलों के लिए सूक्ष्म सिंचाई के उपयोग को प्रोत्साहित करना चाहिए। पानी, भोजन और ऊर्जा के बीच गठजोड़ धीरे-धीरे महत्वपूर्ण होता जा रहा है। डॉ भार्गव ने कहा कि हमें इंटरक्रॉपिंग और इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम पर ध्यान देना चाहिए। रंगनाथ एन कृष्णा, सम्मेलन के अध्यक्ष और ग्रुंडफोस पंप्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के जल राजदूत ने कहा कि अगर हम कृषि में इस्तेमाल होने वाले पानी का कम से 10 प्रतिशत बचाते हैं तो भारत की जल संकट खत्म हो जाएगी। प्रौद्योगिकी के कार्यान्वयन के लिए प्रौद्योगिकी की गुणवत्ता और सामर्थ्य, बेहतर शासन, सतत विकास के लिए सक्षम नीतियों पर विचार किए जाने की आवश्यकता है। सीआईआई उत्तरी क्षेत्र के अध्यक्ष और त्रिवेणी टर्बाइन के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक निखिल साहनी ने कहा कि ड्रिप सिंचाई जैसी प्रौद्योगिकी कृषि क्षेत्र में पानी के उपयोग को कम करने में प्रमुख भूमिका है। इसके लिए पानी के इस्तेमाल के तरीके में फेरबदल, समीक्षा और पुनर्मूल्यांकन की जरूरत है। साहनी ने कहा कि किसानों को इसके लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, कि उन्हें जल अधिकार दिए जाने चाहिए जो व्यापार योग्य होने चाहिए।
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