• Last Update 05:15 am

कोरोना की दवा के मामले में भी आत्मनिर्भर बनेगा भारत, कई दवाओं पर हो रहा ट्रायल
National

कोरोना की दवा के मामले में भी आत्मनिर्भर बनेगा भारत, कई दवाओं पर हो रहा ट्रायल

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के कहर के बीच सरकार आत्मनिर्भर भारत की दिशा में देसी कोरोना वायरस की दवा बनाने पर फोकस कर रही है। कोरोना वायरस के उपचार के लिए कम से कम दो मौजूदा दवाएं क्लिनिकल ट्रायल के तीसरे चरण में प्रवेश कर चुकी हैं। कोरोना वायरस की इन दो दवाओं का ट्रायल काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) द्वारा किया जा रहा है।

इसमें एंटीवायरल दवा उमिफेनोविर और एक अन्य दवा शामिल है, जिसका उपयोग प्रतिरोधी ग्राम-निगेटिव बैक्टीरिया एमडब्ल्यू सेप्सिवैक की वजह से रक्त संक्रमण के इलाज के लिए किया जाता है। इसके अलावा, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) फाइटोफार्मास्यूटिकल्स या हर्बल दवाओं के साथ भी काम कर रहा है, जिसमें एक एंटीवायरल एक्यूसीएच भी शामिल है, जो परीक्षण के तीसरे चरण में प्रवेश करने वाला है।

परीक्षण का समन्वय करने वाले इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी के निदेशक डॉ एस चंद्रशेखर ने कहा कि हमने एमडब्ल्यू सेप्सिवैक पर एक इम्युनोमोड्यूलेटर के रूप में एक बड़ा क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया और यह परीक्षण अच्छी तरह से चला। क्लिनिकल ट्रायल के दूसरे फेज के परिणाम सामने आ गए हैं और अब हम तीसरे चरण के परीक्षण शुरू करने की योजना बना रहे हैं। यह इम्युनोमोड्यूलेटर कोविड -19 रोगियों के लिए एक बड़ा सहारा बनेगा। हम आयुष मंत्रालय के साथ फाइटोफार्मास्युटिकल के साथ भी काम कर रहे हैं। यह आधुनिक परीक्षण दृष्टिकोण के साथ मूल्यांकन किया जाने वाला पहला फाइटोफार्मास्युटिकल होगा।

  • Tags

You can share this post!


Leave Comments