
मुंबई, 4 जनवरी, न्यूज़ मंच, पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में से तीन राज्यों में विपक्ष के महागठबंधन के सामने पस्त होने के बाद भी भाजपा महाराष्ट्र में 'एकला चलो' की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने गुरुवार को महाराष्ट्र के सांसदों के साथ बैठक में इस आशय का संकेत दिया। बताया जा रहा है कि, अमित शाह ने महाराष्ट्र में अपने सभी सांसदों से राज्य में अकेले लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी करने को कहा है। सूत्रों का कहना है कि अमित शाह ने राज्य के सांसदों के साथ हुई बैठक में साफ कहा कि हमें ऐसे किसी दल से गठबंधन को क्यों आगे बढ़ाना चाहिए, जो हमारी ही जड़ें खोदने का काम कर रहा हो। शाह के इस बयान से साफ हो गया कि भाजपा शिवसेना से गठबंधन किसी नुकसान की कीमत पर नहीं करना चाहती।
शीट शेयरिंग फॉर्मूले को लेकर शिवसेना बना सकती है दबाव
मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा अपनी हार के बाद, बिहार में लोकसभा के लिए सीट शेयरिंग के फॉर्मूले पर पहुंची। यहां वह जेडीयू के बराबर 17 सीटों पर लड़ रही है। इसके लिए भाजपा को 2014 में जीती हुईं पांच सीटें छोड़नी पड़ी थीं, जिससे कि उसके सहयोगी भी गठबंधन में शामिल हो सकें। हालांकि, इससे लोक जनशक्ति पार्टी तो गठबंधन में खुशी से शामिल हो गई, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी एनडीए से बाहर निकल गई थी।
माना जा रहा है कि इसके बाद शिवसेना को भी उम्मीद थी कि वह गठबंधन में भाजपा पर दबाव बनाकर कुछ और सीटें हासिल कर लेगी। शिवसेना पिछले काफी समय से केंद्र सरकार और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को सवालों के घेरे में लेती रही है। महाराष्ट्र में लोकसभा चुनावों के छह महीने बाद ही विधानसभा चुनाव भी होने हैं। इन चीजों के बावजूद भाजपा नेताओं को लगता है कि लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र में अकेले रहना उसके लिए फायदेमंद होगा। माना जा रहा है कि शिवसेना के नेताओं के बयानों से भाजपा के नेताओं में नाराजगी है।
विपरीत बयानबाजी से खफा हुई भाजपा
भाजपा के नेताओं का मानना है कि शिवसेना गठबंधन में रहते हुए लगातार बयानबाजी से अपनी सीमा लांघ रही है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी अपनी रैली में कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस के नारे- "चौकीदार चोर है", का इस्तेमाल किया। माना जा रहा है कि शिवसेना अपनी नाराजगी जताकर विधानसभा चुनावों में बीजेपी से मोलभाव करने के लिए दबाव बना रही थी। बताया जाता है कि शिवसेना 288 सीटों वाली विधानसभा में बराबरी की हिस्सेदारी चाहती है। लेकिन जब बीजेपी के पास 123 विधायक हैं तो उसका शिवसेना को आधी यानी 144 सीटें देना संभव नहीं लग रहा है। बिहार में सीट शेयरिंग देखने के बाद शिवसेना को उम्मीद थी कि बीजेपी महाराष्ट्र में भी गठबंधन के लिए नरम रुख अपनाएगी। लेकिन बीजेपी का रुख देखकर लगता है कि या तो महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना में गठबंधन नहीं होगा या होगा भी तो इसके लिए काफी जद्दोजहद देखने को मिलेगी।
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