
अब तक भारतीय जनता पार्टी और उसके अनुसांगिक संगठन ही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा उठाते आए हैं। लेकिन अब शिवसेना की नजर भी भाजपा के इस मुद्दे पर है।
राम मंदिर के मुद्दे पर केंद्र पर दबाव बढ़ाने के लिए अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद द्वारा 25 नवम्बर को संत सभा का आयोजन किया गया है। तो वहीँ, शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे शिवाजी महाराज की जनस्थली शिवनेरी किले की मिट्टी लेकर अपने लाव-लश्कर के साथ 24 नवंबर को अयोध्या पहुँचेंगे। वे महाराष्ट्र के ठाणे से शिव सैनिकों के साथ अयोध्या के लिए कूच कर चुके हैं।
शिवसेना प्रमुख पुणे जिले की शिवनेरी किले की मिट्टी को एक कलश में भरकर अपने साथ अयोध्या लेकर जा रहे हैं, और राम जन्मभूमि के महंत को देंगे। उन्होंने कहा,"शिवनेरी किले पर ही शिवाजी महाराज का जन्म हुआ था और इसलिए यह पवित्र मिट्टी हम अयोध्या ले जाएंगे। हिंदूओं के पवित्र मंदिर के निर्माण के लिए यह मिट्टी हम अयोध्या ले कर जाएंगे। शिवाजी महाराज न केवल शिवसेना के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए आदर्श हैं।"
@शिवनेरी:प्रभू श्री रामचंद्र यांची धर्ममर्यादा आणि राष्ट्रहिताचे प्रयत्न याचे उत्तम उदाहरण म्हणून छत्रपती शिवाजी महाराजांकडे बघितले जाते. शिवरायांच्या जन्मभूमीवरील माती घेऊन आज अयोध्या येथे रवाना !
— Uddhav Thackeray (@uddhavthackeray) November 22, 2018
24 नवंबर को वहां पहुँच कर, अगले दिन, 25 नबंवर को वह अयोध्या में पुजारियों और साधु-संतों के साथ बैठक करेंगे। उद्धव के पहुंचने से पहले शिवसेना नेताओं की एक टीम पहले ही अयोध्या पहुंच चुकी है।
25 नबंवर को विश्व हिन्दू परिषद ने यहां संत सभा का आयोजन किया है। शिवसेना को विश्व हिंदू परिषद (VHP) का समर्थन भी मिल रहा है, जिसके नेता प्रवीण तोगड़िया पहले ही बीजेपी सरकार से नाराजगी जता चुके हैं। विहिप ने अयोध्या में 25 नवंबर को धर्मसभा के आयोजन की घोषणा की है, जिसमें शिवसेना भी शामिल होगी।
योगी ने लगाया शिवसेना की सभा मे अड़ंगा
जानकारी के अनुसार, शिवसेना को योगी सरकार की तरफ से सभा की अनुमति नहीं मिली है। इसी के साथ, इलाके में धारा 144 लागू कर दी गयी है और लोगों के जमाव पर भी रोक लगा दी गयी है।
उद्धव अब 24 नवंबर को आरती करने के बाद 25 नवंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और अयाेध्या से निकल जाएंगे।
वहीँ जनसभा की योजना, प्रशासन से अनुमति न मिलने की बात पर शिव सेना के संजय राउत ने कहा, "शिवसेना ने सभा के बारे में न किसी से परमीशन मांगी थी, न मांगेंगे। जो रैली की बात चल रही है. उसमें डीएम या जिला प्रशासन के यहां हमारी तरफ से भेजा कोई कागज हमें दिखाए।"
उन्होंने कहा,"हमने कभी भी जनसभा की बात नहीं की है। हमारी बात उद्धव जी की अयोध्या यात्रा के बारे में, राम दर्शन के बारे में और आर्शीवाद समारोह के बारे में है और यह होगा।"
अयोध्या मुद्दे को लेकर शिवसेना प्रमुख लगातार भाजपा पर निशाना साध रहे हैं। उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को मुंबई में कहा था, "हर किसी के खाते में 15 लाख रुपए की तरह, राम मंदिर भी जुमला है? जब हम इस मुद्दे को उठा रहे हैं, तो हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि राम मंदिर वास्तव में बनाया जाए। यह मुद्दा केवल चुनाव के दौरान आता है और एक बार चुनाव खत्म होने के बाद इसे भुला दिया जाता है।"
उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के पहले राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो जाना चाहिए।
हर हिन्दू की यही पुकार, पहले मंदिर फिर सरकार ! pic.twitter.com/cmyK3UwNTV
— Uddhav Thackeray (@uddhavthackeray) November 18, 2018
हालाँकि, आलोचकों ने विहिप और शिवसेना की रैली को भी चुनावी राजनीति से जोड़ा है और आगाह किया कि इससे देश में धार्मिक माहौल खराब हो सकता है।
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