
अयोध्या, 25 नवंबर, न्यूज़मंच, राम मंदिर निर्माण को लेकर अयोध्या पहुंचे शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मोदी सरकार को जमकर निशाने पर लिया। 25 नवंबर की विहिप की धर्मसभा से पहले अयोध्या पहुंचे उद्धव ने मोदी सरकार की तुलना कुंभकर्ण से की। ठाकरे ने कहा कुंभकर्ण पिछले चार सालों से सो रहा है।
रविवार को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सुबह-सुबह अपने परिवार के साथ रामलला के दर्शन किए। उन्होंने साधू संतों और महाराष्ट्र से हजारों की संख्या में आए शिवसैनिकों को संबोधित करते हुए भाजपा और मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। उद्धव ठाकरे ने कहा कि, केंद्र और प्रदेश, दोनों में भाजपा की सरकारें हैं। उसे अध्यादेश ला कर अयोध्या में मंदिर बनाना चाहिए। शिवसेना इसका समर्थन करेगी। उद्धव ने मोदी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा वह यहां श्रेय लेने नहीं बल्कि मंदिर निर्माण की तारीख पूछने आए हैं।
मंदिर निर्माण पर बहानेबाजी नहीं चलेगी
अयोध्या मामले को गरमाने के ठाकरे के इस प्रयास के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि अयोध्या मामले की मदद से शिवसेना उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में है। रिपोर्ट के मुताबिक दो ट्रेनों में भरकर 3000 शिवसेना कार्यकर्ता अयोध्या पहुंचे हैं। इसके अलावा दूसरे माध्यमों से 15 हजार से ज्यादा शिवसैनिक अध्योध्या पहुंचे हैं। शनिवार को अपनी पत्नी रश्मि और बेटे आदित्य के साथ उद्धव भी अयोध्या पहुंच गए। उद्धव ठाकरे ने कहा कि मैं यहां तारीख पूछने आया हूं। अटल जी की सरकार मिलीजुली थी, लेकिन आपकी सरकार तो ताकतवर है। यहां भी हमारे मित्र की सरकार है। मंदिर वहीं बनाएंगे पर तारीख नहीं बताएंगे, ये नहीं चलेगा। हमारी किसी से कोई लड़ाई नहीं है, हमें बस राम मंदिर बनाने की तारीख जाननी है। बाकी बातें तो बाद में होती रहेंगी। पहले बताओ कि राम मंदिर कब बनाओगे। इसकी तारीख बताओ।
मोदी का 56 इंच का सीना, पर उसमे दम नहीं
उद्धव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 56 इंच के सीने वाले संवाद पर कटाक्ष करते हुए कहा मंदिर बनाने के लिए सीने में दम होना चाहिए, क्योंकि कितने इंच का भी सीना हो, लेकिन अगर मंदिर नहीं बना सकते हो तो सब बेकार है। उन्होंने कहा हर हिंदू चाहता है कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो। जो वादा किया, उसे निभाना ही हिंदुत्व है। बहुमत की सरकार होने की बावजूद राम मंदिर का निर्माण क्यों नहीं हो रहा है? उन्होंने कहा अदालत का फैसला आने के बाद सरकार को इस पर कानून लाना चाहिए। संसद में अध्यादेश पारित करवाकर राम मंदिर का रास्ता स्पष्ट करें।
उद्धव ने वही राह पकड़ी जो पिता बालासाहेब ठाकरे ने पकड़ी थी
जब 80 के दशक में संघ परिवार और उससे जुड़े संगठन बाबरी मस्जिद की जगह पर राम मंदिर निर्माण का आंदोलन शुरू किया था, तब शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे ने भी इस मुहिम का जोरदार समर्थन किया था। उन्होंने इस मुद्दे पर भाजपा से ज्यादा आक्रामकता दिखाई थी। इसका, उसे महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनाव में लाभ भी हुआ था। इसी के बाद महाराष्ट्र में शिवसेना ने भाजपा के ऊपर बढ़त हासिल करने में सफल रही थी। उद्धव की ताजा पहल भी इसी इतिहास को दोहराने की कोशिश दिखाई देती है। तीन दशक बाद बाल ठाकरे के पुत्र उद्धव ठाकरे भी इसी रणनीति पर आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। हिंदू संगठन और संत समाज जैसे ही राम मंदिर निर्माण को लेकर आक्रामक हुआ तो उद्धव ने मूड भांपते हुए वही राह पकड़ी जो उनके पिता ने पकड़ी थी।
मैं राजनीति करने यहां नहीं आया
उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि जब वह अयोध्या आ रहे थे, तो लोगों ने पूछा कि वहां क्यों जा रहे हो। मैंने उन्हें कहा मैं अयोध्या राजनीति करने नहीं जा रहा। अयोध्या मेरी आस्था का केंद्र है। मैं बस इतना चाहता हूं कि कुंभकर्ण की तरह सो रही भाजपा जाग जाए और मंदिर निर्माण की दिशा में निर्णायक पहल करे। भाजपा सरकार कुंभकरण से भी बदतर साबित हुई है। कुंभकर्ण तो छह महीने ही सोता था, लेकिन यह सरकार चार साल से अधिक समय से सो रही है। मैं चाहता हूं कि हम सब मिलकर उसे जगाएं, ताकि मंदिर का निर्माण शुरू हो। यह मेरी राजनीतिक पहल नहीं है। यह मेरी आस्था से जुड़ा मसला है।
भाजपा के साथ दोबारा गठबंधन का बहाना?
राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि हिंदू हार्ड-लाइन एजेंडा अपना कर उद्धव को भाजपा के साथ दोबारा गठबंधन का बहाना मिल जाएगा, क्योंकि पिछले चार सालों से शिवसेना ने जिस तरह केंद्र सरकार की आलोचना की है, उससे दोनो के संबधों में भारी खटास पैदा हो गई है। दोनों दलों के नेता सार्वजनिक तौर पर स्वीकार कर चुके हैं कि कांग्रेस और एनसीपी से मुकाबले के लिए शिवसेना-भाजपा को साथ आना पड़ेगा।
महाराष्ट्र में भाजपा का बढ़ता जनाधार, शिवसेना को खतरा
उद्धव के अयोध्या दौरे का एक निष्कर्ष यह भी निकाला जा रहा है कि शिवसेना द्वारा हिंदुत्व की लाइन लेने से मुंबई-थाणे-पुणे क्षेत्र के गैर मराठी वोटरों तक पहुंचना आसान हो जाएगा। शिवसेना नेतृत्व यह जानता है कि इस बार चुनाव में प्रभावी प्रदर्शन करने के लिए मराठी भाषियों के मत नाकाफी होंगे। हाल के दिनों में भाजपा का जनाधार जिस तरह से बढ़ रहा है, उसने शिवसेना को चिंता में डाल दिया है। शिवसेना नेतृत्व जानता है कि कि अगर शिवसेना को गैर मराठी मतदाताओं तक पहुंचना है, तो उसे विस्तृत एजेंडे पर काम करना होगा। राम मंदिर एक ऐसा मुद्दा है, जो उत्तर भारतीयों और गुजराती मतदाताओं से जुड़ने में सेना की मदद करेगा। मुंबई-ठाणे क्षेत्र में महाराष्ट्रियों के बाद उत्तर भारतीय और गुजराती समुदाय के मतदाताओं की सबसे ज्यादा संख्या है। इसी को ध्यान में रखते हुए उद्धव ठाकरे ने राम मंदिर मुद्दे को तूल देने का निर्णय लिया है। यह महज उनकी आस्था का मसला नहीं है, बल्कि सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
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