
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत और उनकी बहन रंगोली चंदेल के खिलाफ राजद्रोह के आरोपों में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दे दी है। हालांकि, हाईकोर्ट ने कंगना और रंगोली को 8 जनवरी को मुंबई पुलिस के सामने पेश होने का आदेश दिया है। जस्टिस एस. एस. शिंदे और न्यायमूर्ति एम. एस. कार्णिक की बेंच ने एडवोकेट रिजवान सिद्दीकी की इस बात को स्वीकार कर लिया कि दोनों बहनें उनके खिलाफ दिए गए समन के जवाब में मुंबई पुलिस को रिपोर्ट करेंगी।
कंगना रनौत और रंगोली चंदेल के खिलाफ यह शिकायत कास्टिंग डायरेक्टर मुनव्वर अली ने की थी। उन्होंने कहा कि दोनों बहनों ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पूरी फिल्म इंडस्ट्री को बदनाम किया है। इसके बाद कंगना और रंगोली ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्द करने का अनुरोध किया था। कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में हमारा मानना है कि जबतक मामले की विस्तृत सुनवाई नहीं हो जाती अंतरिम राहत देना जायज है।
बेंच ने पुलिस से राजद्रोह का आरोप लगाने का कारण पूछा और कहा कि पहली नजर में ऐसा मालूम होता है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए (राजद्रोह) गलत तरीके से लगायी गयी है। कोर्ट ने पूछा, ‘अगर कोई सरकार की हां में हां नहीं मिलाता है तो क्या उसके खिलाफ राजद्रोह का आरोप लगाया जा सकता है?’ न्यायमूर्ति शिंदे ने सवाल किया, ‘राजद्रोह का आरोप क्यों लगाया गया है? हम अपने देश के नागरिकों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे हैं?’
बेंच ने कहा, ‘पहली नजर में हमारा मानना है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए (राजद्रोह) लगाना गलत है। हमें समझ नहीं आ रहा है कि आजकल पुलिस कई मामलों में यह धारा क्यों लगा रही है।’ कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस ने दोनों बहनों को तीन सम्मन जारी किए हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 11 जनवरी की तारीख तय करते हुए कहा कि वह अगली सुनवाई के दिन इस पर विस्तार से विचार करेगी।
शिकायतकर्ता मुनव्वरली साहिल ए. सैय्यद का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील रिजवान मर्चेंट ने अनुरोध किया कि दोनों बहनों को याचिका पर सुनवाई पूरी होने तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कोई भी उकसाने वाले बयान देने से बचना चाहिए। इस पर कंगना के वकील रिजवान सिद्दीकी ने कोर्ट से कहा कि बहनें इस मामले के संबंध में सोशल मीडिया पर कुछ भी पोस्ट नहीं करेंगी।
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