
नई दिल्ली। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन बुधवार को 28वें दिन जारी है। सरकार से अगले दौर की वार्ता को लेकर प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के नेता आज फैसला ले सकते हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के पांच सदस्यों की एक समिति बनाई गई है जो यह तय करेगी कि सरकार के प्रस्तावों पर बातचीत के लिए जाना चाहिए या नहीं। बता दें कि सरकार ने किसान संगठनों के नेताओं को भेजे प्रस्तावों पर वार्ता के लिए उन्हें आमंत्रित किया है।
वहीं देश में आज किसान दिवस मनाया जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती 23 दिसंबर को किसान दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर प्रदर्शनकारी किसानों ने तीनों कृषि कानूनों के विरोध में दोपहर का खाना छोड़ने का फैसला लिया है। दिल्ली की सीमाओं पर 26 नवंबर से डटे किसान संगठन तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर हरे हैं जबकि सरकार इनमें किसानों के हितों से जुड़े मुद्दों को शामिल कर संशोधन का प्रस्ताव दे चुकी है।
बता दें कि संसद के मानसून सत्र में कृषि से जुड़े तीनों अध्यादेशों से संबंधित तीन अहम विधेयक संसद में पेश किए गए थे। दोनों सदनों की मंजूरी मिलने के बाद इन्हें कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) कानून 2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार कानून 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून 2020 के रूप सितंबर में लागू किए गए।
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