• Last Update 06:12 am

कांग्रेस-एआईएडीएमके समेत कई दलों के विरोध के बीच तीन तलाक बिल लोकसभा में पास
Politics

कांग्रेस-एआईएडीएमके समेत कई दलों के विरोध के बीच तीन तलाक बिल लोकसभा में पास

नई दिल्ली, 28 दिसंबर, न्यूज़ मंच, मुस्लिम समाज के कुछ वर्गों से जुड़ी तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) की प्रथा पर रोक लगाने के मकसद से लाए गया बिल पर गुरुवार को लोकसभा में पारित हो गया। इस बिल को लेकर सदन में लंबी बहस हुई। बिल में जरूरी संशोधन को लेकर कांग्रेस और एआईएडीएमके ने सदन से वॉक आउट कर दिया। जिसके बाद वोटिंग हुई और बिल पास हो गया। वोटिंग पूरी होने के बाद लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने सदन की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी। 

सदन में वोटिंग के बाद विधेयक के पक्ष में 245 और विरोध में 11 वोट पड़े। लोकसभा से तीन तलाक बिल पारित हो गया है। तीन तलाक को अपराध घोषित करने वाला यह विधेयक बीते 17 दिसंबर को लोकसभा में पेश किया गया था। इस प्रस्तावित कानून के तहत एक बार में तीन तलाक देना गैरकानूनी और अमान्य होगा और ऐसा करने वाले को तीन साल तक की सजा हो सकती है। तीन तलाक से जुड़े अध्यादेश की जगह पर लाए गए इस विधेयक पर 27 दिसंबर को सदन में चर्चा कराने को लेकर पिछले हफ्ते सभी दलों में सहमति बनी थी। सरकार ने कुछ दलों के विरोध के मद्देनजर जमानत के प्रावधान सहित कुछ संशोधनों को मंजूरी प्रदान की थी, ताकि राजनीतिक दलों में इस बिल को लेकर स्वीकार्यकता बढ़ सके। 

संशोधन प्रस्ताव गिरा
तीन तलाक बिल सांसद प्रेमचंद्रन का संशोधन प्रस्ताव सदन में गिर गया। इसके अलाव ओवैसी की ओर से लाए गए प्रस्ताव को भी सदन से मंजूरी नहीं मिल सकी। वोटिंग में ओवैसी के प्रस्ताव के समर्थन में 15 वोट पड़े जबकि 236 सांसदों ने प्रस्ताव का विरोध किया। ओवैसी की ओर से लाए गए 4 संशोधन प्रस्ताव सदन से खारिज हो गए। बीजेडी सांसद भर्तृहरि महताब की ओर से लाया गया संशोधन प्रस्ताव भी खारिज हो गया है, इसके पक्ष में 10 और विरोध में 245 वोट पड़े। बिल के खिलाफ लाए गए सभी संशोधन प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है।

समाज को तोड़ने वाला बिल : खडगे
लोकसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि महिलाओं के नाम पर लाया गया यह बिल समाज को जोड़ने का नहीं समाज को तोड़ने का बिल है। उन्होंने कहा कि यह समानता के अधिकार और इस्लाम के भी खिलाफ है। खड़गे ने कहा कि धर्म के नाम पर यह बिल भेदभाव करता है और धार्मिक आजादी के खिलाफ है। खड़गे ने कहा कि संविधान के मूल्य आधार के खिलाफ सरकार कोई भी कानून नहीं बना सकती है।  उन्होंने कहा कि लैंगिग समानता के साथ हम खड़े हैं लेकिन किसी भी कानून में तलाक देने पर पति को मुजरिम घोषित नहीं किया जाता। खड़ने ने स्पीकर से अपील करते हुए कहा कि वो सरकार को इस बिल को ज्वाइंट सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने का आदेश दें।

विधेयक का उद्देश्य किसी को निशाना बनाना नहीं : प्रसाद
कानून मंत्री ने कहा कि कोर्ट के फैसले के बाद भी तीन तलाक दिया जा रहा है। पीड़ित महिलाओं की पुलिस में भी सुनवाई नहीं थी क्योंकि कोर्ट का फैसला था कोई कानून नहीं लाया गया था। कानून मंत्री के नाते उन महिलाओं से मैं क्या कहूं कि वो कोर्ट के फैसले को घर की दीवार पर टांग लें। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पहले कांग्रेस ने इस बिल को पारित किया था कोई कमेटी की मांग नहीं की गई थी लेकिन आज कांग्रेस ने अपना स्टैंड बदल लिया है। रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में कहा कि यह पूरा मसला किसी कौम को निशाना बनाने का नहीं और न ही किसी संप्रदाय के वोट बैंक से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट से जुड़े सवालों पर मंत्री ने कहा कि कोर्ट के 5 जजों में से एक ने कुरान की भी व्याख्या की है। कोर्ट ने कहा कि जो कुरान में पाप माना गया है वो कानून में कैसे ठीक हो सकता है। मंत्री ने कहा कि तीन जजों ने तीन तलाक को गलत ठहराया है और पहले जस्टिस खेहर इसके लिए कानून की मांग कर चुके हैं। 

हम तो मुसलमान बन कर ही जिएंगे : ओवैसी
एआईएमआईएम सांसद ओवैसी ने कहा कि सबरीमाला का फैसले पर आपकी मान्यता आ जाती है तो क्या आपकी मान्यता और हमारी मान्यता में अंतर है। उन्होंने कहा कि गाड़ी से टक्कर में 2 साल की सजा और तीन तलाक पर तीन साल की सजा, ये कैसा न्याय है। ओवैसी ने कहा कि इनको पत्नी से मोहब्बत नहीं है इसलिए ऐसी सजा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आपका निशाना कहीं और है आप सिर्फ इस कानून की आड़ ले रहे हैं। ओवैसी ने कहा की मीटू का आरोपी आपकी पार्टी में है जिसने महिला की इज्जत से खिलवाड़ किया और आप हमें सिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम मुसलमान बनकर जीएंगे और आपके मुताबिक नहीं चलेंगे।

मजलूम के नहीं, मुजरिम के साल लग रहा विपक्ष : ओवैसी
केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि मोदी सरकार यह विधेयक किसी को निशाना बनाने के लिए नहीं बल्कि मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए लेकर आई है। उन्होंने कहा कि कई पार्टियों के नेता इस बात से चिंतित हैं कि फौरी तीन तलाक देने के दोषी पति को जेल भेज दिए जाने पर उसके परिवार का क्या होगा, उसकी पत्नी का गुजारा कैसे होगा। सवाल यह है कि कोई ऐसा जुर्म करे ही क्यों कि उसे जेल जाने की नौबत आए। नकवी ने कहा कि जब सती प्रथा और बाल विवाह जैसी कुरीतियों को खत्म करने के प्रयास किए जा रहे थे, तो उस वक्त भी कुछ लोगों ने विरोध किया था। लेकिन इस देश और इस समाज ने सती प्रथा और बाल विवाह जैसी कुरीतियों को खत्म किया। विपक्ष पर निशाना साधते हुए नकवी ने कहा कि उनके नेताओं के रुख से ऐसा लग रहा है कि वे मजलूम के साथ नहीं, बल्कि मुजरिम के साथ हैं।

तीन तलाक ठीक लेकिन सजा का प्रावधान ज्यादा  
तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से निजात दिलाने के लिए लाया गया विधेयक स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन अपनी पत्नी को फौरी तीन तलाक देने के दोषी पति के लिए जेल की सजा के प्रावधान का उनकी पार्टी विरोध करती है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी मांग करती है कि इस विधेयक को विचार के लिए सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए। बंद्योपाध्याय ने कहा कि फौरी तीन तलाक पूरी तरह ‘पाप’ है। मुस्लिम समुदाय का बड़ा तबका इसे ‘पाप’ और ‘अस्वीकार्य’ मानता है। तृणमूल सांसद ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को फौरी तीन तलाक से निजात दिलाने के लिए लाया गया विधेयक स्वागत योग्य है, लेकिन वह फौरी तीन तलाक देने के दोषी पति को जेल की सजा दिए जाने के प्रावधान के विरोध में हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रावधान को खत्म किया जाना चाहिए।

  • Tags

You can share this post!


Leave Comments