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कमलनाथ अब चुनाव आयोग की अनुमति के बिना नहीं कर सकेंगे तबादले - कलेक्टर सहित 65 हजार कर्मचारियों के तबादलों पर 27 दिसंबर से लगी रोक
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कमलनाथ अब चुनाव आयोग की अनुमति के बिना नहीं कर सकेंगे तबादले - कलेक्टर सहित 65 हजार कर्मचारियों के तबादलों पर 27 दिसंबर से लगी रोक

भोपाल, 27 दिसंबर, न्यूज़ मंच, प्रदेश में कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार सहित 65 हजार बूथ लेवल ऑफिसरों के तबादलों पर चुनाव आयोग ने गुरूवार से रोक लगा दी है। लोकसभा चुनाव की मतदाता सूची का काम जब तक पूरा नहीं हो जाता है, तब तक आयोग की अनुमति बिना सरकार इनमें से किसी अधिकारी या कर्मचारी का तबादला नहीं कर पाएगी। कमिश्नरों को लेकर भी यही स्थिति रहेगी, क्योंकि वे भी निर्वाचन प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

चुनाव आयोग के अनुसार लोक सभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए 1 जनवरी 2019 से मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या सुधार के लिए दावे-आपत्तियां लिए जाएंगे और 25 जनवरी तक यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। 11 फ़रवरी तक इन दावे आपत्तियों का निराकरण किया जायेगा और 22 फरवरी को फाइनल मतदाता सूची का प्रकाशन होगा। 26 दिसंबर की स्तिथिति में मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन सभी 230 विधान सभा क्षेत्रों में कर दिया गया है। 

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव ने बताया कि जिला निर्वाचन अधिकारी के अलावा, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी सहित मतदाता सूची के काम से सीधे जुड़े किसी भी कर्मचारियों का तबादला नहीं किया जा सकेगा। वर्त्तमान में प्रदेश के सभी 52 जिलों में 5 करोड़ 4 लाख 33 हज़ार 79 मतदाता हैं और बूथ लेवल अधिकारी अब 25 जनवरी तक 65 हजार 283 मतदान केंद्रों में कार्यालयीन समय में मौजूद रहेंगे।

25 तक की जा सकती है दावा-आपत्ति
प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने बुधवार को मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन करवाया। नाम जोड़ने, हटाने और सुधार के लिए दावे-आपत्तियां मतदान केंद्रों में बूथ लेवल ऑफिसर के पास जाकर 25 जनवरी तक किए जा सकेंगे। चूंकि, मतदाता सूची के शुद्धिकरण का पूरा काम जिला निर्वाचन अधिकारी (कलेक्टर) की अगुवाई में चलता है, इसलिए इनका तबादला बिना आयोग की इजाजत के नहीं होगा। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कान्ता राव ने बताया कि 27 दिसम्बर से निर्वाचन आयोग की बिना अनुमति किसी भी अफसर का स्थानांतरण नहीं किया जा सकेगा। अगले कुछ दिनों में लोकसभा चुनाव होने हैं, इस लिए निर्वाचन कार्य को तेजी से पूरा किया जाना है। 


सीएम बनते ही कमलनाथ ने किए थे तबादले
गौरतलब है कि इसी डेडलाइन की वजह से ही मुख्यमंत्री बनते ही कमलनाथ ने ताबड़तोड़ फैसले लेते हुए 26 जिलों के कलेक्टरों समेत कुल 42 अफसरों के तबादले के आदेश जारी कर दिए थे। इस क्रम में उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा के कलेक्टर का भी तबादला कर दिया था। सूत्रों का कहना है कि आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शिवराज सरकार के नजदीकी अफसरों पर तबादले की गाज गिराई है। 


नवनियुक्त सीएम ने पहले ही दिए थे संकेत
तबादले के संकेत कमलनाथ पहले भी कई बार चुनाव प्रचार के दौरान दे चुके थे। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कमलनाथ ने बीजेपी के लिए काम करने वाले अफसरों को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि जो सरकारी कर्मचारी भाजपा का बिल्ला जेब में लेकर घूमता है। उसे हमारी सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा था कि इसलिए याद रखें कमलनाथ की चक्की देर से चलती है, पर बहुत बारीक पीसती है। 

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