• Last Update 05:14 am

कमलनाथ के 28 रत्न, सबको मिली कैबिनेट रैंक, जानें गणित - कैसे तय हुए 121 विधायकों में से 28 मंत्री
Politics

कमलनाथ के 28 रत्न, सबको मिली कैबिनेट रैंक, जानें गणित - कैसे तय हुए 121 विधायकों में से 28 मंत्री

भोपाल, 26 दिसंबर, न्यूज़ मंच, तमाम अंदरूनी विरोधाभासों से जूझती कांग्रेस के लिए 121 विधायकों में से 28 मंत्री चुनना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। लेकिन सूबे के मुखिया, एक बेहद अनुभवी सांसद और राजनीति का गूढ़ ज्ञान रखने वाले कमलनाथ ने इस काम को बखूबी अंजाम देते हुए, बेहद संतुलित मंत्रिमंडल का गठन कर, कांग्रेस के सभी गुटों को साधने का प्रयास किया है। उन्होंने मंत्री चुनने के लिए विधायकों की खास योग्यता पर ध्यान दिया।

और इसके भी ऊपर, जिसका हाथ मध्य प्रदेश की रग - रग से वाकिफ, पूर्व मुख्य मंत्री दिग्विजय ने थाम रखा है, उस मुख्य मंत्री का अंदाज़ा राज्य के मंत्रियों की नियुक्तियों में, कुछ कमियों को नज़रअंदाज़ करते हुए, लगभग सटीक दिखाई देता है। 

सीएम कमलनाथ ने इन 28 विधायकों को ही क्यों मंत्री चुना, पढ़िए न्यूजमंच की विशलेषणात्मक रिपोर्ट कैसे चुने गए 121 विधायकों में से 28 मंत्री।

कांग्रेस के 114 विधायकों, सपा - बसपा और निर्दलीय के कुल 7 विधायकों के समर्थन के साथ 121 विधायकों वाली कांग्रेस सरकार ने प्रदेश से 15 साल के बीजेपी राज को खदेड़ दिया और अपना विजय ध्वज फहराया। हालांकि, पूर्व मुख्य मंत्री शिवराज सिंह ने इसे "लंगड़ी सरकार" नाम दिया है। 

चुनाव प्रचार में दिग्विजय सिंह की बहुत अहम भूमिका रही, और आगे भी प्रदेश में सरकार को किस प्रकार चलाया जाना है, इसकी रणनीति बनाने में उनका प्रमुख स्थान रहेगा। यह बात इससे साफ़ हो जाती है कि, दिग्विजय के बेटे जयवर्धन को कैबिनेट मंत्री बना दिया गया है और दिग्विजय खेमे के 9 विधायकों को मंत्रिपरिषद में स्थान दिया गया है।

हालांकि, बड़े आश्चर्यजनक रूप सेदिग्विजय खेमे के ही दो विधायकों के नाम हटा दिए गए, जिनके होने की बहुत अधिक उम्मीद थी। वो दो नाम हैं, 6 बार पिछोरे से विधायक रहे के पी सिंह और 4 बार अनूपपुर से विधायक और पूर्व पीडब्लूडी मंत्री रहे बिसाहूलाल सिंह के।

इस मंत्रिपरिषद में 11 मंत्री कमलनाथ खेमे के हैं और 7 मंत्री ज्योतिरादित्य खेमे के हैं।  इससे यह कहा जा सकता है कि मंत्रिमंडल को बनाते समय गुटीय राजनीति का संतुलन सही ढंग से रखा गया है। कमलनाथ का सबसे अच्छा निर्णय यह रहा, कि उन्होंने शुरू में ही साफ़ कर दिया था की जो पहली बार विधायक बने हैं, उन्हें मंत्रिपरिषद में स्थान नहीं दिया जायेगा।  इस वजह से, 121 में से 55 नाम पहले ही छंट गए थे। 

बाकी बचे 66 नामों में, बसपा के दो, सपा का एक और तीन निर्दलीय विधायक भी हटा दिए गए, तो 6 नाम और काम हो गए। सिर्फ एक निर्दलीय को मंत्रिमंडल में स्थान मिला। वारासिवनी से निर्दलीय और 4 बार विधायक रहे प्रदीप जायसवाल को ही मंत्री बनाया गया। 

अब बाकी बचे 60 नामों में से 28 चुने गए जो कमलनाथ सेना का हिस्सा बने।  इनमे ग्वालियर - चम्बल क्षेत्र से 5 विधायक, बुंदेलखंड से 3 विधायक, विंध्य से 1 विधायक, कमलनाथ के महाकौशल से 4 विधायक, मालवा - निमाड़ से 9 विधायक और मध्य से 6 विधायक मंत्री बनाये गए। 

कमलनाथ के 28 मंत्रियों वाले मंत्रिपरिषद ने कल राजभवन में पद और गोपनीयता की शपथ ली।  इस नवगठित सरकार में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि यहाँ कोई राज्य मंत्री नहीं, सबको कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया गया।  वैसे, संविधान में ऐसा कोई नियम नहीं की मंत्रिपरिषद में कितने राज्य मंत्री हों और कितने कैबिनेट मंत्री।  तो कमलनाथ ने सभी को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया। इस निर्णय से 28 मंत्रियों के बीच कोई कलह नहीं बची।   


दिग्विजय सिंह सरकार के जिन मंत्रियों को कमलनाथ मंत्रिमंडल में जगह मिली, वो हैं :

1. डॉ गोविंद सिंह  - (लहार से सात बार विधायक और पूर्व सहकारिता मंत्री); 

2. विजयलक्ष्मी साधो - (महेश्वर से चार बार विधायक, पूर्व राज्यसभा सांसद और तत्कालीन मंत्री); 

3. सज्जन सिंह वर्मा - (शहरी प्रशासन के पूर्व मंत्री, सोनकच्छ से चार बार विधायक और 2009-14 में देवास से लोकसभा सांसद); 

4. बाला बच्चन - बड़वानी में राजपुर विधानसभा सीट से चार बार विधायक, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री, विधानसभा में पूर्व डिप्टी एलओपी; 

5. आरिफ अकील - भोपाल (उत्तर) सीट से छह बार विधायक, अल्पसंख्यक मामलों और गैस पीड़ित राहत के पूर्व मंत्री

6. हुकुम सिंह कराड़ा - पांच बार शाजापुर से विधायक और पूर्व ऊर्जा मंत्री।

इनके अलावा ये 22 विधायक हैं जिन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में मंत्रिपरिषत की शपथ ली :

7. जयवर्धन सिंह - दिग्विजय सिंह के बेटे और दूसरी बार राघौगढ़ से विधायक

8. प्रियव्रत सिंह - दिग्विजय सिंह के परिजन और खिलचीपुर के तीन बार के विधायक 

9. सचिन यादव - कसरावत से दो बार के विधायक और पूर्व पीसीसी प्रमुख अरुण यादव के भाई

10. जीतू पटवारी - प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और राऊ सीट से दो बार विधायक रहे

11. प्रदीप जायसवाल - (निर्दलीय) वारासिवनी से 4 बार विधायक रहे

12. उमंग सिंगार - पूर्व डिप्टी सीएम जमुना देवी के भतीजे और गंधवानी सीट से तीन बार के विधायक    

13. बृजेन्द्र सिंह राठौड़ - पृथ्वीपुर सीट से चार बार के विधायक रहे, जो वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाते हैं, 

14. लाखन सिंह यादव - भितरवार से चार बार के विधायक और ज्योतिरादित्य सिंधिया निष्ठावान नेता 

15. तुलसीराम सिलावट - इंदौर की सांवेर सीट से तीन बार से विधायक रहे 

16. ओंकार सिंह मरकाम - डिंडोरी विधानसभा क्षेत्र से तीन बार के विधायक 

17. गोविंद सिंह राजपूत - सागर जिले के सुरखी से तीन बार के विधायक 

18. प्रद्युम्न सिंह तोमर - ग्वालियर से दो बार के विधायक 

19. हर्ष यादव - देवरी सीट से दो बार के विधायक 

20. कमलेश्वर पटेल - सिहावल सीट से दो बार के विधायक 

21. सुरेंद्र सिंह हनी बघेल - कुक्षी सीट से दो बार के विधायक 

22. प्रभूराम चौधरी - सांची से दो बार के विधायक 

23. सुखदेव पांस - बैतूल सीट से दो बार विधायक 

24. इमरती देवी डबरा से तीन बार विधायक

25. पी सी शर्मा (भोपाल उत्तर) 

26. लखन घंघोरिया, 

27. महेंद्र सिंह सिसोदिया (बमोरी), 

28. तरुण भनोत

इस लिस्ट के अनुसार, जातीय समीकरण की बात करें तो, तीन यादव, दो ब्राह्मण, एक अल्पसंख्यक मुस्लिम आठ ठाकुर, चार ओबीसी, चार आदिवासी और छह अनुसूचित के विधायक मंत्री बनाये गए हैं। 

आठ ठाकुर मंत्रियों के साथ ठाकुर गुट की मंत्रिमंडल में प्रमुखता है।  अगर अल्पसंख्यक देखें तो, आरिफ अकील को मंत्री बनाये जाने के बाद राज्य में 15 साल बाद एक अल्पसंख्यक को मंत्रिपरिषद में स्थान मिला है। 

You can share this post!


Leave Comments