
भोपाल. नीरज जैन "पैय्यन"/ गजेंद्र लोधी. न्यूज़ मंच. अक्सर कांग्रेस पर वंशवाद का आरोप लगाकर राहुल गांधी पर निशाना साधने वाली भारतीय जनता पार्टी, मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में खुद ही वंशवाद के जाल में उलझती दिखाई दे रही है।
मध्यप्रदेश में टिकिट वितरण के दौरान भाजपा को अपने आला नेताओं को संतुष्ट करने के लिए, उनके पुत्रों और रिश्तेदारों को टिकिट देने ही पड़े। बीते दिनों बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने योग्यता के आधार पर नेता पुत्रों को टिकिट देने की वकालत की थी। और अब उनके बेटे आकाश विजयवर्गीय मैदान में उतर चुके हैं।
भाजपा ने पिछले विधानसभा चुनाव में भी केंद्रीय मंत्री थावरचंद्र गहलोत के बेटे, जितेन्द्र गहलोत को आलोट से टिकिट दिया और वे चुनाव जीते थे। इस बार भी भाजपा ने थावरचंद गहलोत बेटे जितेंद्र गहलोत को टिकिट दिया है।
भाजपा के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों सुंदरलाल पटवा और कैलाश जोशी के बेटे क्रमशः सुरेंद्र पटवा, दीपक जोशी पहले से ही विधायक हैं।
वहीं पार्टी ने सागर के सांसद लक्ष्मीनारायण यादव के बेटेसुधीर यादव को सुरखी से उम्मीदवार बनाया है।
इससे ही जाहिर होता है कि भाजपा भले ही वंशवाद के लिए कांग्रेस और राहुल गांधी को निशाना बनाती है, लेकिन बीजेपी में भी वंशवाद बेल तेजी से बढ़ रही है।
बालाघाट में तो भापजा में इस पर फूट ही पड़ गई है। लांजी के पूर्व जनपद अध्यक्ष राजकुमार कराहे ने भाजपा की सदस्या से इस्तीफा दे दिया है। राजकुमार ने भाजपा पर वंशवाद को बढ़ावा देने वाली पार्टी बताते हुए, कई गम्भीर आरोप लगाए।
जानते है कौन है वह प्रमुख नेता जिनके बच्चों और रिश्तेदारों को भाजपा ने दिया इस विधानसभा चुनाव में टिकिट
1.मुदित शेजवार:-
रायसेन जिले की सांची विधानसभा से भाजपा ने इस बार भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता और 7 बार के विधायक रहे डॉ गौरीशंकर शेजवार की जगह उनके बेटे मुदित शेजवार को चुनावी मैदान में उतारा है। प्रदेश सरकार में वनमंत्री डॉ गौरी शंकर शेजवार ने बेटे को टिकिट दिए जाने पर कहा है कि वह उपयुक्त उम्मीदवार है। उन्होंने कहना है कि पार्टी ने मुदित की योग्यता को ध्यान में रखकर ही टिकट दिया है। हालांकि यहां के कई नेता शजेवार को टिकिट दिए जाने का विरोध कर रहे हैं।
2. आकाश विजयवर्गीय
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय को भाजपा ने विधानसभा इंदौर-3 से टिकिट दिया है, जबकि इंदौर तीन से टिकिट मांग रही उषा ठाकुर को डॉ अंबेडकर नगर (मऊ) से टिकिट दिया गया है। उषा ठाकुर के अलावा कई प्रत्याशी थे, जो कि इंदौर-3 से टिकिट मांग रहे थे, लेकिन पार्टी की नजर में आकाश विजयवर्गीय सबसे योग्य कैंडिडेट थे।
3. कृष्णा गौर-
भोपाल की गोविंदपुरा विधानसभा के लिए जब तक भाजपा ने अपने प्रत्याशी के नाम का एलान नहीं कर दिया, तब इस सीट को लेकर दोनों ही दलों में गहमागहमी बनी रही। भाजपा द्वारा 9 बार से विधायक रह चुके बाबुलाल गौर का टिकिट काटे जाने की खबर जैसे ही राजनैतिक गलियारों में फैली, वैसे ही कांग्रेस ने भी गौर को अपने पाले में शामिल करने के लिए प्रयास चालू कर दिए। कयास लगाए जा रहे थे कि भाजपा गोविंदपुरा से भोपाल महापौर आलोक शर्मा को चुनाव लड़ाएगी, लेकिन आखिरी समय पार्टी ने बाबुलाल गौर की पुत्रवधु कृष्णा गौर को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। माना जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के दबाब में पार्टी को झुकते हुए उनके राजनैतिक उत्तराधिकारी के तौर उनकी बहू को ही चुनना पड़ा।
4. उमाकांत शर्मा:-
व्यापम घोटाले के ख़ुलासे के दौरान सुर्खियों में रहे भाजपा के पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के भाई उमाकांत शर्मा को विदिशा जिले की सिरोंज विधानसभा से अपना प्रत्याशी बनाया है। व्यापम घोटाले के बाद पार्टी से साइड लाइन हुए लक्ष्मीकांत शर्मा पिछले कुछ समय से भाजपा में बेहद सक्रिय थे, कई ऐसे मौके भी आए जब वह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह, चौहान सहित भाजपा के अन्य बड़े नेताओं के साथ सार्वजनिक स्थानों पर भी दिखाई दिए। सिरोंज से भाजपा का टिकिट पाने के लिए कई दावेदार थे, इसके बावजूद भी भाजपा ने लक्ष्मीकांत शर्मा के भाई को अपना उम्मीदवार बनाया। राजनैतिक हलकों में चर्चा है कि एक दौर में लक्ष्मीकांत शर्मा मध्यप्रदेश में भाजपा का बड़ा चेहरा रहे हैं, उनके उसी हैसियत के चलते पार्टी उन्हें साथ लेकर चलने मजबूर थी, इसलिए ही सिरोंज में भाजपा को परिवारवाद का फार्मूला ग्रहण करना पड़ा।
5. विक्रम नारायण सिंह:-
सतना जिले की रामपुर बघेलान विधानसभा से भाजपा के मौजूदा प्रत्याशी विक्रम नारायण सिंह पार्टी के अंदर वंशवाद का बड़ा उदाहरण हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करीबी और प्रदेश सरकार में मंत्री रहे हर्ष नारायण सिंह के बेटे विक्रम सिंह को राजनीति और भाजपा का टिकिट दोनों ही विरासत में मिले। दरअसल, हर्ष नारायण सिंह के पिता गोविंद नारायण सिंह मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं। अपने पिता गोविंद नारायण सिंह के बाद हर्ष नारायण सिंह विधायक चुने गए। हर्ष नारायण सिंह इस बार अपनी जगह बेटे विक्रम सिंह को टिकिट दिलाने के पार्टी ने लॉबिंग कर रहे थे, जिसमें उन्हें सफलता भी मिली। इसके पहले वे विक्रम को नगरपालिका परिषद के अध्यक्ष पद के लिए भी भाजपा का प्रत्याशी बनवाने में कामयाब हुए थे।
6.अजीत बौरासी-
घट्टिया से भाजपा के प्रत्याशी चुने गए अजीत बोरासी कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे प्रेमचंद "गुड्डू" के बेटे हैं। भाजपा में कांग्रेस की तरह बढ़ते वंशवाद का सबसे बड़ा सबूत अजीत बोरासी ही हैं, क्योंकि प्रेमचंद "गुड्डू" अपने बेटे अजीत के साथ कांग्रेस छोड़कर हाल ही में भाजपा में शामिल हुए और तुरंत ही अपने बेटे को टिकिट दिलाने में भी कामयाब हो गए, जबकि घट्टिया विधानसभा से टिकिट पाने भाजपा के कई नेता दावेदारी कर रहे थे। भाजपा द्वारा गुड्डू जैसे बड़े कांग्रेसी नेता को पार्टी में शामिल करना और तुरंत ही उनके बेटे को अपना उम्मीदवार बनाना। यह साबित करता है कि भाजपा ने सिर्फ एक बड़े कांग्रेसी नेता को ही पार्टी में शामिल नहीं किया है, बल्कि जिस कांग्रेस पर वह वंशवाद का आरोप लगाती थी, उसी कांग्रेस की वंशवाद जैसी रीति अपनाने में भी उसे गुरेज नहीं है।
7. अनुपमा नेताम
भाजपा ने बालाघाट जिले की बैहर विधानसभा से अनुपमा नेताम को प्रत्याशी बनाया है। जिला पंचायत उपाध्यक्ष अनुपमा नेताम पूर्व विधायक भगत नेताम की पत्नी हैं। बैहर से भाजपा का टिकिट पाने कई दावेदार थे, लेकिन भगत नेताम ने पार्टी से अपनी पत्नी अनुपमा नेताम को टिकिट दिलाकर साबित कर दिया कि भाजपा में प्रत्याशी चयन के लिए उम्मीदवार की योग्यता को मापने का एक पैमाना उसका परिवार भी होता है, उसके बाद ही उम्मीदवार की दूसरी योग्यताओं को परखा जाता है।
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