
मुंबई, 7 जनवरी, न्यूज़ मंच, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मराठा समुदाय को आरक्षण देने की अपनी सरकार के कदम के ही विपरीत, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने शुक्रवार को नौकरी में कोटा देने को ज्यादातर लोगों के लिए बेकार करार कर दिया।
दरअसल, 30 नवंबर को महाराष्ट्र के राज्यपाल सी विद्यासागर राव ने मराठा आरक्षण विधेयक पर हस्ताक्षर किए थे , जिसमें शैक्षिक और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग के तहत मराठाओं के लिए 16 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव था। 18 नवंबर को महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट ने उस विधेयक को मंजूरी दी थी जिसके लिए समुदाय 2017 से विरोध कर रहा था।
फडणवीस शुक्रवार को 16 वें वैश्विक मराठी सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में भाषण दे रहे थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने आरक्षण के लेकर कुछ सवालों के जवाब में आरक्षण को मात्र 10 प्रतिशत युवाओं के लिए ही हितकर बताया। बाकि 90 प्रतिशत को वैकल्पिक अवसर ढूंढने की सलाह दी।
खास बातें
-जब लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में अवसर मिलेगा तो धीरे-धीरे आरक्षण का महत्व खत्म हो जाएगा
-सरकार हर साल दे सकती है केवल 25000 नौकरियां, जबकि जरूरत कहीं बहुत ज्यादा
-प्राइवेट सेक्टर का विस्तार हो रहा है और केवल यहीं पर अधिकतम अवसर उपलब्ध
आरक्षण से मात्र 10 प्रतिशत को ही फायदा
जाति और आरक्षण के बारे में एक प्रश्न के उत्तर में, मुख्यमंत्री ने कहा: "आरक्षण केवल सरकार द्वारा प्रदान किए गए नौकरी के अवसरों के लिए सहायक है, और ऐसे अवसर केवल 10 प्रतिशत हैं।”
रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यह भी कहा कि "कुछ" ही सरकारी नौकरियां थीं और "90 प्रतिशत लोगों को इसका कोई फायदा नहीं मिला"।
90 प्रतिशत बेरोजगार युवाओं को नौकरी नहीं
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि भले ही सभी समुदायों को आरक्षण दे दिया जाए, लेकिन सरकार 90 प्रतिशत बेरोजगार युवाओं को नौकरी नहीं दे सकती है। निजी क्षेत्र का विस्तार हो रहा है। निजी क्षेत्र में ही विकास के सबसे ज्यादा अवसर उपलब्ध हैं। फडणवीस ने कहा सरकार हर साल 25 हजार नौकरियां दे सकती है। यह उन लोगों की संख्या के बराबर है जो एक ही तहसील में नौकरी के लिए तरस रहे हैं।
सरकारी की तुलना में कहीं अधिक निजी शिक्षण संस्थान
फडणवीस ने कहा, “हाल ही में, हमने 25,000 लोगों की भर्ती करने का फैसला किया है, लेकिन इतने रोजगार के अवसर ढूंढ रहे युवाओं को तो एक ही तहसील में पाया जा सकता है। तो यह पूरी जनता की मदद कैसे करेगा? सरकारी की तुलना में कहीं अधिक निजी शिक्षण संस्थान हैं। हालांकि, निजी कॉलेजों और स्कूलों में नौकरी में आरक्षण नहीं है। आरक्षण समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि जब लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में अवसर मिलेगा तो धीरे-धीरे आरक्षण का महत्व खत्म हो जाएगा।
खोजने होंगे अधिक अवसर
उन्होंने कहा कि आरक्षण पाने वालों का कहना है कि ये उनका अधिकार है। यह अस्थायी संतुष्टि दे सकता है लेकिन सही समाधान खोजने के लिए हमें अवसरों का उपयोग करना चाहिए और समाज के लिए काम करना चाहिए। जब लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में अवसर मिलेगा तब आरक्षण का महत्व धीरे-धीरे मिट जाएगा। फिर केवल जो पात्र होगा उसे ही वास्तव में आरक्षण मिलेगा।
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