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महाराष्ट्र में बड़े भाई की भूमिका निभाना चाहते हैं उद्धव, भाजपा के सामने रखीं कई कठिन शर्तें 
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महाराष्ट्र में बड़े भाई की भूमिका निभाना चाहते हैं उद्धव, भाजपा के सामने रखीं कई कठिन शर्तें 

नई दिल्ली, 4 जनवरी, न्यूज़ मंच, लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहा है। इस बीच महाराष्ट्र में शिवसेना और भाजपा के एक साथ चुनाव लड़ने को लेकर गठबंधन की शर्तें तय हो रही है। गठबंधन की बातचीत शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस के बीच हो रही है। सूत्रों के अनुसार इस बातचीत में फडणवीस और उद्धव ठाकरे के भरोसे के दो नेता भी शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि उद्धव ठाकरे ने चुनाव पूर्व गठबंधन के लिए कई कड़ी शर्त रखी हैं। 

शिवसेना का बनाया जाए सीएम
शिवसेना प्रमुख चाहते हैं कि 2019 में लोकसभा चुनाव में 2014 का फार्मूला ही लागू रहे। यानी भाजपा 27 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़े और शिवसेना को 21 लोकसभा सीटें मिलें। यह तभी संभव है, जब दिल्ली में बड़ा भाई यानी भाजपा महाराष्ट्र में शिवसेना को बड़ा भाई माने। इसके लिए भाजपा को महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री का पद शिवसेना को देना होगा। सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना प्रमुख की ओर से यह भी कहा गया है कि वह राज्य में विधानसभा की 288 सीटों में से आधी-आधी सीटों यानी 144 -144 विधानसभा सीटों के गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने को तैयार है। लेकिन मुख्यमंत्री शिवसेना का ही होना चाहिए। 

लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ हों
शिवसेना ने यह भी शर्त रखी है कि लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव भी कराए जाएं। आपको बता दें कि महाराष्ट्र में अक्टूबर 2019 में विधानसभा चुनाव होने हैं और शिवसेना चाहती है कि विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ यानी तय समय से पांच महीने पहले मई 2019 में हो। 
शिवसेना का मानना है कि अगर लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव नहीं हुए तो लोकसभा में तो ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ लेगी, लेकिन विधानसभा चुनाव में वायदे से मुकर सकती है। भाजपा 144-144 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद मुख्यमंत्री पद शिवसेना को देने से इनकार कर सकती है। 

भाजपा फिलहाल असमंजस में 
शिवसेना के सूत्रों का कहना है कि इस बार शिवसेना धोखे में नहीं रहना चाहती है, इसलिए लोकसभा के गठबंधन के साथ ही विधानसभा के गठबंधन का फॉर्मूला भी तय कर लेना चाहती है। शिवसेना के ओर से कड़ी शर्तों के साथ आए इस फॉर्मूले पर भाजपा की ओर से खास उत्साह नहीं दिखाई दे रहा है। भाजपा किसी भी सूरत में मुख्यमंत्री का पद छोड़ने को तैयार नहीं हैं। लेकिन भाजपा की ओर से तर्क दिया जा रहा है कि देवेंद्र फडणवीस नहीं चाहतें हैं कि राज्य और लोकसभा के चुनाव एक साथ हो।
मई-जून में राज्य में बड़े इलाके में सूखे जैसे हालात हो सकते हैं, ऐसे में विधानसभा चुनाव कराना समझदारी नहीं होगी। फिलहाल भाजपा की तरफ से इस बारे में कोई खास उत्साह नहीं होना, इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि भाजपा शिवसेना के गठबंधन की राहें मुश्किल हैं। 

इस बार आसान नहीं है गठबंधन 
इस बात के संकेत दो दिन पहले महाराष्ट्र के सांसदों की बैठक में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी दिए हैं। शाह ने सांसदों की बैठक में कहा महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ गठबंधन को लेकर हम सकारात्मक हैं, लेकिन कुछ खोकर हम गठबंधन नहीं करेंगे। बैठक में शामिल एक सांसद के मुताबिक भाजपा अध्यक्ष ने साफ-साफ कहा जरूरत पड़ने पर अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहें। जाहिर है शिवसेना की कड़ी शर्तो के आगे भाजपा के पास बहुत ज्यादा विकल्प नहीं है और महाराष्ट्र में बिना शिवसेना के चुनाव मैदान में उतारना भाजपा के लिए मुनाफे के सौदा भी नहीं हैं। ऐसे में महाराष्ट्र में राजनीति में क्या होने वाला है, यह देखना दिलचस्प है।

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