
मुज़फ्फरनगर, 4 दिसंबर, न्यूज़ मंच, 3 दिसम्बर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में मॉब लिंचिंग की घटना में 47 वर्षीय पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार और 18 वर्षीय सुमित नामक युवक के मृत्यु हो गयी। सुबोध कुमार को सर में गोली मारकर उनकी हत्या की गयी, और हत्या के बाद मना किये जाने के बावजूद भी इसकी वीडियो बना कर उसे सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। पुलिस पर भीड़ के द्वारा पथराव भी किया गया। इसे रोकने के दौरान उसी भीड़ में से पुलिस फायरिंग में 18 वर्षीय सुमित नमक युवक की भी गली लगने से मृत्यु हो गयी।
क्या सुबोध कुमार इस प्रकार के हिंसा को रोकने की कोशिश कर रहे थे, तो ये गलत था ? क्या बार बार इस तरह की मॉब लिंचिंग की घटनाओं में पुलिस डिपार्टमेंट को अपने जांबाज़ अफसर इस तरह खोने होंगे ?
लगातार कुछ राज्यों में इस तरह की घटनाओं का सामने आना, दिल दहला देता है। उस अफसर के पीछे उसके दो बेटे और पत्नी रह गए हैं। क्या इस तरह के कारणों से हत्या करने वालों को यह महसूस नहीं होता कि वे अपने ऐसे क़दमों से मानवता को शर्मसार कर रहे हैं ? किसी भी प्रकार के विरोध को प्रदर्शित करने के लिए क्या यह तरीके सही हैं ?
इस पर हर व्यक्ति को मंथन करने की ज़रुरत है और इन घटनाओं को रोकने के लिए सामाजिक दायित्व को समझने की ज़रुरत है।
आइये जाने कैसा था सुबोध कुमार का व्यक्तित्व और कुछ इस घटना से जुड़े हुए पहलु।
ऐसे थे इंस्पेक्टर सुबोध कुमार
47 वर्ष की उम्र में, मॉब लिंचिंग जैसी हिंसक सामाजिक गतिविधि को रोकने की कोशिश के दौरान, वीरगति को प्राप्त होने वाले इंस्पेक्टर सुबोध कुमार का जन्म एटा जिले में हुआ था। उन्होंने 1998 में उत्तर प्रदेश पुलिस की नौकरी जॉइन की और प्रदेश के झांसी, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा और अंत में बुलंदशहर जैसे जिलों में उनकी तैनाती रही। उनके पिता रामप्रताप राठौर भी उत्तर प्रदेश पुलिस में ही रहे। उनकी मृत्यु भी बदमाशों के साथ मुठभेड़ करते हुए थी और सुबोध को अपने पिता की जगह ही पुलिस विभाग में 1998 में नौकरी मिली थी।
जिस थाने में सुबोध कुमार की पोस्टिंग हुई, वहां वे अपने साहस और जांबाज़ी की वजह से चर्चित रहे। लंबा कद, इकहरा शरीर चेहरे पर तावदार मूछें और काला चश्मा, उन्हें सिंघम स्टाइल में रहने का शौक था।
अखलाक हत्याकांड से था सुबोध कुमार का नाता
उत्तर प्रदेश के नॉएडा जिले के बिसाहड़ा गांव में गोमांस के रखने व खाने के शक में अखलाक की 28 सितंबर 2015 की रात पीट पीट कर हत्या कर दी गयी थी। उस समय सुबोध की पोस्टिंग नॉएडा में ही थी और उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी।
सूत्रों के मुताबिक, सुबोध ही अपनी जीप में घायल अखलाक को अस्पताल लेकर गए थे। वो अखलाक केस में पहले जांच अधिकारी थे।
इस घटना के बाद अगले ही दिन सुबोध ने 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनकी इस कार्रवाई के बाद यह मामला सुर्खियों में आ गया और विरोधी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने इसपर राजनीति शुरू कर दी।
गोमांस के खाने, रखने व बेचने के शक की वजह से लगातार कई हिंसक घटनाएं सामने आ रही हैं, और उत्तर प्रदेश इसका मुख्या बिंदु बना हुआ है। भीड़ के द्वारा हिंसक प्रदर्शन और हत्या यहाँ आये दिन सुनने में आ रहा है और प्रशाशन की कोशिश के बावजूद भी ये वारदातें काम होती नज़र नहीं आ रही हैं।
मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ इस घटना के दौरान राजस्थान चुनाव प्रचार के लिए गए हुए थे। उन्होंने इस घटना में मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और पीड़ितों के परिवार को वित्तीय सहायता दी जाएगी।
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