
भोपाल: उत्तर प्रदेश के बाद अब मध्य प्रदेश सरकार भी लव जिहादियों पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी में है। प्यार के नाम पर धोखा देकर विवाह करने या मतांतरण करने वालों के लिए मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश 2020 की अधिसूचना जारी कर दी है।यह कानून शनिवार से जारी करने के साथ ही लागू हो गया है।6 माह के भीतर इसे विधान सभा से पारित कराना होगा।
बताते चलें इस कानून में मतांतरण में सहयोग करने वालों के लिए भी सजा का प्रावधान किया गया है। मालूम हो मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र कोरोना के कारण स्थगित कर दिया गया था।केबिनेट ने अध्यादेश के जरिए कानून लागू करने के लिए मसौदे को राज्यपाल आंनदीबेन पटेल को मंजूरी के लिए भेजा था। उनसे स्वीकृति मिलने के बाद शनिवार को इसका राजपत्र में प्रकाशन कर दिया गया है।
जाने क्या होगा मतांतरण का दायरा और सजा का प्रावधान
मतांतरण के उद्देश्य से नकद वस्तु, दान, रोजगार, किसी धार्मिक निकाय द्वारा संचालित विद्यालय में शिक्षा, दैवीय प्रसाद को प्रलोभन माना है। मनोवैज्ञानिक दबाव, भौतिक बल प्रयोग या धमकी देकर बाध्य करना।
- पैतृक धर्म में वापसी को मतांतरण नहीं माना जाएगा। पैतृक धर्म वह है, जो व्यक्ति के जन्म के समय उसके पिता का होगा
।-धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश ने मूर्त रूप ले लिया है। प्रदेश में अब कोई भी बहला-फुसलाकर, डरा धमकाकर, प्रलोभन के द्वारा हमारी बेटियों के साथ छल करेगा तो उसके खिलाफ इसी कानून के तहत उस पर कार्रवाई की जाएगी। इस कृत्य में सहयोग करने वाले भी कानून के अधीन आ गए हैं। इसमें कड़ी सजा का प्रविधान है, इसलिए ऐसे सभी लोग खबरदार हो जाएं।
-डा. नरोत्तम मिश्रा, गृह मंत्री, मध्य प्रदेश
सजा के प्रविधान
- महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति, जनजाति के व्यक्ति का मतांतरण करवाने पर दो तथा अधिकतम दस साल की सजा होगी। जुर्माना भी पचास हजार से कम नहीं होगा।
- मतांतरण की शिकायत माता-पिता, भाई-बहन-या रक्त, विवाह, दत्तक ग्रहण से संबंधित व्यक्ति कर सकेगा।
- धर्म छिपाकर विवाह करने वालों को तीन साल की सजा। इसे बढ़ाकर दस वर्ष तक किया जा सकता है। जुर्माना 50 हजार से कम नहीं होगा।- सामूहिक मतांतरण में पांच साल की सजा। इसे दस साल तक कर सकते हैं। जुर्माना एक लाख रुपये होगा।
- धोखा देकर किए गए विवाह से उत्पन्न् संतान को पिता की वारिस के तौर पर सभी अधिकार होंगे। विवाह शून्य घोषित करने की स्थिति में भी बच्चे के अधिकार सुरक्षित रहेंगे।
- मतांतरण करने वाले व्यक्ति को 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को आवेदन देना होगा।
- कानून कार्रवाई होने पर आरोपित को ही दोषी नहीं होने के साक्ष्य देने होंगे।
- उप निरीक्षक से नीचे का कोई भी पुलिस अधिकारी जांच नहीं करेगा।
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