
नयी दिल्ली। सीआईआई और फिक्की समेत उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि गुरुवार को श्रम मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के साथ होने वाली बैठक में वेतन की नई परिभाषा लागू करने पर फिलहाल रोक की मांग करेंगे। इस परिभाषा के लागू होने से जहां एक तरफ भविष्य निधि जैसे सामाजिक सुरक्षा का लाभ बढ़ेगा वहीं दूसरी तरफ कर्मचारियों के हाथ में तनख्वाह कम आएगी। नई परिभाषा के अनुसार किसी कर्मचारी के भत्ते, उसके कुल वेतन के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकते। इससे भविष्य निधि जैसी सामाजिक सुरक्षा कटौती बढ़ जाएगी।
उद्योग से जुड़े एक सूत्र ने कहा, 'अन्य उद्योग संगठनों के साथ ही सीआईआई और फिक्की के प्रतिनिधि 24 दिसंबर 2020 को केंद्रीय श्रम मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों से वेतन की नई परिभाषा पर चर्चा के लिए मिलेंगे, जिसके एक अप्रैल 2021 से लागू होने की संभावना है।' सूत्र ने यह भी कहा कि उद्योग संगठन चाहते हैं कि सरकार नई परिभाषा को अभी लागू नहीं करे, क्योंकि उन्हें डर है कि वेतन की नई परिभाषा से कर्मचारियों के हाथ में आने वाले वेतन में भारी कटौती होगी और इसके लागू होने पर नियोक्ताओं पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
मजदूरी की नई परिभाषा पिछले साल संसद द्वारा पारित मजदूरी संहिता, 2019 का हिस्सा है। सरकार एक अप्रैल 2021 से तीन अन्य संहिताओं...औद्योगिक संबंध संहित, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक स्वास्थ्य सुरक्षा एवं कामकाज की स्थिति संहिता... के साथ इसे भी लागू करना चाहती है। इस समय नियोक्ता और कर्मचारी, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा संचालित सामाजिक सुरक्षा योजना (ईपीएफ) में वेतन के 12-12 प्रतिशत का योगदान करते हैं।
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