
मध्यप्रदेश में 'स्मार्ट सिटी 'परियोजना की नाकामी के बाद अब मध्यप्रदेश सरकार ने हर शहर के लिए जिला प्रशासन से एक 'विजन डाक्यूमेंट' बनाने के लिए कहा है और जिला प्रशासन अपनी सीमित जानकारी के आधार पर ये कठिन काम करने में जुट गया है .जिला प्रशासन के पास किसी भी शहर को लेकर एक सीमित दृष्टि होती है,उसके नाक-कान और आँखें भी प्राय: सरकारी होती हैं.उसे सलाह देने वाले भी सीमितदृष्टि वाले होते हैं,ऐसे में किसी भी शहर के लिए 'विजन डाक्यूमेंट' बनाना आसान काम नहीं है और न ही इसे बच्चों का खेल समझना चाहिए .
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा के अनुरूप हमारे ग्वालियर शहर में भी शहर के चौमुखी विकास के लिए 'विजन डाक्यूमेंट ' बनाने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है लेकिन इस बारे में जो विमर्श शुरू हुआ है उसे बेहद आशाजनक नहीं कहा जा सकता .विजन डाक्यूमेंट के बारे में परामर्श देने वाली संस्थाएं घोर अव्यावहारिक हैं. उनका काम ज्ञापन दने हुए अधिकारियों तथा नेताओं के साथ तस्वीरें खिचवाने से अधिक नहीं होता ,इसलिए उनसे किसी भी शहर के भविष्य की कल्पना की ठोस उम्मीद नहीं की जा सकती .
बीते पांच दशक में मैंने ग्वालियर के लिए अनेक विजन डाक्यूमेंट बनते,बिगड़ते देखे हैं .एक विजन डाक्यूमेंट स्वर्गीय शीतला सहाय ने बनाया था,एक विजन डाक्यूमेंट स्वर्गीय माधवराव सिंधिया का था .एक विजन डाक्यूमेंट आज के केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और उनके समकालीनों ने बनाया लेकिन एक भी समेकित विजन डाक्यूमेंट आज तक न बन पाया और न उस पर अमल हो पाया .इस सबके पीछे इच्छाशक्ति का अभाव सबसे बड़ा कारण रहा .
जिला प्रशासन को विजन डाक्यूमेंट बनाने के लिए सबसे पहले उन लोगों से आमने-सामने की बात करना चाहिए जो सचमुच इस शहर से जुड़े हैं और शहर की नब्ज को समझते हैं .मिसाल के तौर पर मै ग्वालियर की ही बात करू तो इस शहर में वर्षों काम कर चुके चार पूर्व नगरनिगम आयुक्त रहते हैं. दो महापौर हैं ,अनेकों पूर्व और वर्तमान विधायक हैं .देश-विदेशों में घूमे कारोबारी,लेखक ,पत्रकार ,इतिहासकार हैं .ये सब विमर्श का हिस्सा बनाये जा सकते हैं .लेकिन इनसे मिले कौन ? बैठे -बतियाये कौन ?
ग्वालियर जैसे ऐतिहासिक शहरों के अनियोजित विकास का खमियाजा यहां की जनता को भुगतना पड़ता है .मध्य प्रदेश में भोपाल और इंदौर को छोड़कर शायद ही कोई ऐसा शहर हो जिसका विकास नियोजित ढंग से किया गया हो ?विकास के प्रति हमारा दृष्टिदोष ही इसकी सबसे बड़ी वजह है. बीसवीं सदी के आरम्भ में प्रदेश का सबसे आधुनिक शहर रहा ग्वालियर आज किसी कस्बे से ज्यादा अच्छा नहीं है. जबकि केंद्र सरकार की महात्वाकांक्षी 'स्मार्ट सिटी' योजना में इसे शामिल किया गया .
आपको जानकार हैरानी होगी की स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत ग्वालेऔर में एक वर्चुअल म्यूजियम को छोड़कर एक भी परियोजना पूरी नहीं हुई और पैसा पूरा हजम हो गया .
ग्वालियर के विजन डाक्यूमेंट में अतीत के तमाम आधे-अधूरे विकास के सपनों को समाहित किया जाना बहुत जरूरी है. किसी भी शहर का विकास उसकी भौगोलिक स्थिति और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया जा सकता है .आज शहरों को विजन डाक्यूमेंट से ज्यादा विकास की एक समेकित,स्पष्ट नीति की जरूरत है ,जो हमारे पास नहीं है. हमारे शहर अपने आप विकसित होते हैं. संगठित भूमाफिया इस अनियोजित विकास की धुरी बने हुए हैं .मै तो कहता हूँ कि विजन डाक्यूमेंट बनाते समय इन दुष्टों को भी विमर्श का हिस्सा बनाया जाना चाहिए .
मध्यप्रदेश में विजन डाक्यूमेंट बनाने के लिए हड़बड़ी के बजाय संयम की जरूरत है. पहले ग्वालियर जैसे ही किसी ऐतिहासिक शहर का विजन डाक्यूमेंट बनाया जाना चाहिए ,फिर उसे ही आधार मानकर आंशिक संशोधनों के साथ दूसरे शहरों पर लागू किया जाना चाहिए .ग्वालियर में समेकित विकास की जरूरत दशकों से है लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति और उठापटक इसकी सबसे बड़ी बाधा है. उदाहरण के लिए ग्वालियर में ऐतिहासिक दुर्ग पर चढ़ने के लिए रज्जुमार्ग की परियोजना बीते पचास साल से लंबित है. सार्वजनिक परिवहन का काम एक बार बंद हुआ तो दोबारा शुरू ही नहीं हो पाया .
ग्वालियर में पुनर्घनत्वीकरण की अनेक योजनाएंबनीं और कागजों में ही सिमिट कर रह गयीं .अस्पताल विस्तार और जिला न्यायालय के भवन वर्षों से आधे-अधूरे खड़े हुए हैं और नया विजन डाक्यूमेंट बनाया जा रहा है .शहर की तमाम सरकारी जमीने हड़पी जा चुकी हैं .सड़कें सिकुड़ रहीं है.स्वचलित सिग्नल प्रणाली बीमार है .नल,जल,मल योजनाएं अमृतपान के बावजूद लाभकारी सिद्ध नहीं हो पायीं हैं. स्वर्ण रेखा नाला कायाकल्प के लिए विकास की वाट जोह रहा है .गांधी प्राणी उद्यान का विस्थापन आज तक नहीं हो पाया है. यानि अधूरेपन का एक अनंत सिलसिला है .और ऐसा प्रदेश के हरेक शहर के साथ है.कहीं कम तो कहीं ज्यादा .
कहने का आशय ये है की जब हम ग्वालियर जैसे एक पूर्व विकसित शहर के लिए भविष्य की दृष्टि को मद्दे नजर रखते हुए आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं तब पूरे प्रदेश के लिए विजन डाक्यूमेंट बनाने का सरकारी प्रयास मुंगेरीलाल के सपने जैसा है .मुंगेरीलाल के सपने भी यदि आकार लेने की गारंटी वाले हों तो भी कोई परेशानी नहीं है लेकिन ईमानदारी का अभाव सब जगह है .मुख्य्मंत्री शिवराज सिंह यदि वास्तव में प्रदेश के लिए कोई विजन डाक्यूमेंट बनाना चाहते हैं तो उन्हें सबसे पहले ग्वालियर के लिए काम करना चाहिए .यदि ग्वालाईओर का विजन डाक्यूमेंट सही और प्रभावी रूप से बन पाया तो पूरे प्रदेश के लिए भी ऐसा ही विजन डाक्यूमेंट बनाया जाना मुश्किल नहीं होगा .
@ राकेश अचल
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