
लखनऊ, 16 जनवरी, न्यूज मंच । उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाजपार्टी (बसपा) के बीच हुए गठबंधन में अजित सिंह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के शामिल होने को लेकर अब तक असमंजस बना हुआ है। सीटों को लेकर उनके बीच अब तक सहमति नहीं बन पाई है। रालोद गठबंधन में अपने लिए छह सीटें मांग रही है, जबकि सपा-बसपा उन्हें दो ही सीटें ही देने के मूड में है। इस बीच, खबर है कि सपा ने एक सीट अपनी तरफ से देने की पेशकश की है। इस तरह उसे गठबंधन में तीन सीटें देने का प्रस्ताव किया गया है। रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने ने बुधवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव से लखनऊ में मुलाकात की। रालोद सूत्रों ने दावा किया कि दोनो के बीच चार सीटें देने पर सहमति हो गई है, लेकिन उन्होंने इसकी औपचारिक घोषणा अब तक नहीं की है।
सीटों पर सहमति होने की अटकलें
अखिलेश से मुलाकात के बाद जयंत चौधरी ने कहा कि हमारे बीच अच्छी सहमति है और जल्दी ही गठबंधन को लेकर घोषणा कर दी जाएगी। उन्होंने कहा मसला सीटों का नहीं है, बल्कि विश्वास और रिश्तों का है, जो काफी गहरा है। लखनऊ पहुंचने के बाद जयंत चौधरी सीधे सपा कार्यालय पहुंचे और अखिलेश यादव से मुलाकात की। जयंत ने अखिलेश के साथ बैठक की तस्वीर अपने ट्विटर हैंडल से पोस्ट कर उर्दू के मशहूर कवि अल्लामा इकबाल के शेर लिखे, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि दोनों के बीच सीटों पर सहमति हो गई है।
ज्यादा सीटें नहीं देना चाहतीं मायावती
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट बहुल इलाकों में रालोद का अच्छा खासा प्रभाव है। उसकी अहमियत को देखते हुए अखिलेश सपा-बसपा गठबंधन में उसे भी शामिल करने के पक्ष में हैं। हालांकि, बसपा प्रमुख मायावती उन्हें ज्यादा सीटें दिए जाने का शुरू से ही विरोध कर रही हैं। उनके विरोध की वजह से ही यह मामला अब तक टलता रहा है। जयंत चौधरी ने अखिलेश से मुलाकात के बाद कहा अखिलेश यादव के साथ बातचीत अच्छी रही है। उन्होंने कहा सीटों को लेकर कोई बात नहीं हुई। दरअसल, सीटों का मसला है ही नहीं। यहां विश्वास और रिश्तों की बात है। पहले जो बातें हुई है उनको और आगे बढ़ाया गया है।
कहा लड़ाई मैं की नहीं है, लड़ाई हम की है
जयंत चौधरी ने कहा लड़ाई मैं की नहीं है, लड़ाई हम की है। हम मिलकर लड़ेंगे। जैसे कैराना में हमने मिलकर लड़ा था। कैराना में हमारा तालमेल बहुत सफल रहा है। इसी सफलता को हम फिर दोहराने जारहे हैं। जयंत चौधरी ने कहा भाजपा किसान विरोधी है। उसे सत्ता से बाहर रखने केलिए साथ मिल कर लड़ना जरूरी है। पहले दोनो के बीच दिल्ली में बैठक होने वाली थी, लेकिन बाद में किसी वजह से बैठक स्थगित हो गई।
बागपत से जयंत, मुजफ्फरनगर से अजित चुनाव लड़ेंगे
रालोद सूत्रों ने बताया कि पहले छह सीटों की मांग रखी गई थी, लेकिन अब चार सीटों पर बात बन गई है। रालोद के भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक पार्टी को गठबंधन में चार सीटें मिलना लगभग तय है। सपा गठबंधन के तहत बागपत, मुजफ्फरनगर मथुरा और हाथरस की सीट रालोद को देने के पक्ष में है। लेकिन इनमें से एक मथुरा सीट पर सपा प्रत्याशी को रालोद के सिंबल पर लड़ाया जाएगा। बताया जाता है कि इससीट से अखिलेश के करीबी और जाट नेता संजय लाठर को चुनाव लड़ाया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक बागपत की परंपरागत सीट पर रालोद के युवा चेहरे जयंत चौधरी प्रत्याशी होंगे। जबकि पार्टी सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह मुजफ्फरनगर से चुनाव मैदान में उतरेंगे। इसके साथ ही हाथरस से आरएलडी ने प्रत्याशी का नाम भी लगभग तय है।
गठबंधन का रालोद का आना तय
सपा-बसपा गठबंधन में मनचाही सीटें नहीं मिलने के बाद रालोद कांग्रेस के संपर्क में थी। कांग्रेस भी छोटे दलों को मिलाकर उत्तर प्रदेश में एक नए गठबंधन को बनाने की कोशिश कर रही है। इस गठबंधन में शिवपाल सिंह यादव की पार्टी के भी शामिल होने की भी खबर है। लेकिन जयंत के बयान के बाद अब साफ हो गया है कि रालोद का सपा-बसपा के गठबंधन में शामिल होना लगभग तय है। वह कांग्रेस के साथ नहीं जा रही है। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में रालोद को कोई प्रत्याशी नहीं जीता था। खुद अजित सिंह और जयंत चौधरी चुनाव हार गए थे। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी का एक ही विधायक जीता था, जो बाद में भाजपा में शामिल हो गयाथा। कैराना लोकसभा उपचुनाव में सपा और बसपा के सहयोग से रालोद प्रत्याशी जीती थीं।
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