
पटना, 16 जनवरी, न्यूज मंच, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने पार्टी से अलग लाइन पकड़ते हुए सवर्ण आरक्षण के विरोध को बड़ी गलती बताया है। वरिष्ठ राजद नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि पार्टी इस पर बैठकर फिर से विचार करेगी। उन्होंने कहा इस संवेदनशील मुद्दे पर पार्टी को स्टैंड लेने में बड़ी गलती हुई है। उन्होंने कहा हमारे घोषणा पत्र में आर्थिक आधार पर सवर्णों के आरक्षण की मांग की गई है, पर पता नहीं कैसे पार्टी ने विरोधी स्टैंड ले लिया।
राजद का सवर्ण चेहरा हैं रघुवंश प्रसाद
रघुवंश प्रसाद सिंह राजद का सवर्ण चेहरा माने जाते हैं। इस कद्दावर राजपूत नेता ने पिछड़ों की हिमायती राजद में रह कर राजनीति का लंबा सफर तय किया है। समाजवादी आंदोलन में शुरू से जुड़े रघुवंश प्रसाद सिंह दो बार विधायक और पांच बार सांसद रह चुके हैं। वह यूपीए के पहले कार्यकाल में केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं। 2009 के लोकसभा चुनाव में राजद को सिर्फ चार सीटों पर ही सफलता मिली थी। इनमें उसमें लालू प्रसाद यादव के अलावा 3 सीटों पर राजपूत उम्मीदवार जीते थे, इनमें से एक रघुवंश प्रसाद सिंह भी थे।
कहा सवर्णों को आरक्षण के खिलाफ नहीं राजद
पटना में रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा हमारी पार्टी सवर्णो के आरक्षण के खिलाफ नहीं है। हमारी पार्टी से सवर्ण आरक्षण मामले में चूक हुई है। हम इस पर पुनः विचार करेंगे। आरजेडी की तरफ से लोकसभा में सांसद जयप्रकाश नारायण, राज्यसभा सांसद मनोज झा ने खुलकर सवर्णों को आरक्षण दिए जाने का विरोध किया था। पार्टी के सर्वेसर्वा तेजस्वी यादव ने भी सवर्णों को 10 प्रतिशत आर्थिक आधार पर आरक्षण दिए जाने का विरोध किया था। रघुवंश प्रसाद सिंह ने उनसे असहमति जताते हुए अलग लाइन पकड़ी है।
कांग्रेस को नजरअंदाज करने पर सपा-बसपा को कोसा
आरक्षण पर ही नहीं, उत्तर प्रदेश में मायावाती, अखिलेश के गठबंधन को भी रघुवंश प्रसाद सिंह ने गलत बताते हुए कहा कि बिना कांग्रेस को साथ लिए भाजपा का विकल्प नहीं बना जा सकता है। दूसरी ओर, इस मुद्दे पर तेजस्वी यादव के विचार विल्कुल अलग हैं। वह गठबंधन होने के बाद बसपा प्रमुख मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश यादव को बधाई देने लखनऊ जा पहुंचे थे।
तेजस्वी ने किया था आरक्षण का विरोध
आरजेडी ,के सर्वेसर्वा तेजस्वी यादव ने सवर्ण गरीबों को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए किए गए संविधान संशोधन विधेयक का खुला विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि आरक्षण दलित, पिछड़ों और आदिवासियों को मिलने वाले आरक्षण को खत्म करने की साजिश है। उन्होंने कहा था कि 15 फीसदी सवर्ण आबादी को अगर 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने की कोशिश हो रही है तो फिर 52 फीसदी ओबीसी के 27 फीसदी आरक्षण के दायरे को भी बढ़ाया जाना चाहिए। तेजस्वी के बयान के बाद लोकसभा में आरजेडी सांसद इस विधेयक का विरोध करते हुए वॉकआउट कर गए थे। राज्यसभा में सदस्यों ने भी बिल के विरोध में मतदान किया था।
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