
नई दिल्ली। सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि जब तक हम कोई फैसला ना सुना दे, तबतक कोई निर्माण या कुछ भी तोड़फोड़ नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि शिलान्यास से हमें कोई परेशानी नहीं है, लेकिन कोई निर्माण का काम आगे नहीं होना चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने नए संसद भवन के गुरुवार को भूमिपूजन की योजना की घोषणा की थी। इसे लेकर बेंच ने कहा कि ऐसा नहीं सोचा था कि केन्द्र इसके निर्माण के लिए इतने आक्रामक तरीके से आगे बढ़ेगा।
केन्द्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार को यह निर्देश स्पष्ट तौर पर समझना चाहिए कि जब तक मामला अदालत द्वारा तय नहीं किया जाता है, तब तक कोई निर्माण कार्य नहीं होगा। मेहता ने शीर्ष अदालत को बताया कि जब तक कि अदालत अपना फैसला नहीं दे देती तब तक सेंट्रल विस्टा में कोई निर्माण, तोड़फोड़ या पेड़ों की शिफ्टिंग नहीं होगी।
बता दें कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत नए संसद भवन, कॉमन केंद्रीय सचिवालय और तीन किलोमीटर लंबे राजपथ को रीडेवलप किया जाएगा। साथ ही उपराष्ट्रपति के आवास को नॉर्थ ब्लॉक और प्रधानमंत्री के आवास को साउथ ब्लॉक के करीब शिफ्ट किया जा सकता है। इस प्रोजेक्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई, जिस पर सुनवाई चल रही है।
5 नवंबर को शीर्ष अदालत ने इस प्रोजेक्ट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा था, जिनमें आरोप लगाया गया था कि भूमि के उपयोग में अवैध रूप से बदलाव किया गया है और अदालत से इस प्रोजेक्ट को रद्द करने का आग्रह किया। याचिकाकर्ताओं ने पुनर्विकास के लिए भूमि उपयोग में बदलाव को लेकर 21 दिसंबर, 2019 को दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा जारी की गई एक अधिसूचना को चुनौती दी है।
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