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शीर्ष नेतृत्व को नकारना, अपमानित करना बीजेपी की पुरानी आदत - शोभा ओझा
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शीर्ष नेतृत्व को नकारना, अपमानित करना बीजेपी की पुरानी आदत - शोभा ओझा

भोपाल, 9 नवंबर, न्यूज़मंच, महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुकीं शोभा ओझा जून 2018 में मध्य प्रदेश कांग्रेस की नई मीडिया प्रभारी बनीं थी। हालांकि शोभा कांग्रेस के दिग्‍गज नेता सुरेश पचौरी और कांग्रेस के कुछ अन्‍य वरिष्‍ठ नेताओं की करीबी हैं, परंतु चुनावों में अब तक उन्होंने कोई विजयश्री प्राप्‍त नहीं की है। उन्होंने इंदौर से महापौर और इंदौर 5 से विधानसभा चुनाव लड़ा था, जिसमें वे हार गई थीं। 

बहरहाल महिला कांग्रेस की अध्‍यक्ष होने के नाते आगामी चुनावों में उनकी भूमिका कांग्रेस के लिए महत्‍वपूर्ण है।

कांग्रेस की पहली लिस्ट आने के बाद शोभा ओझा इस बात से बहुत संतुष्ट दिखी कि  लिस्ट में ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं के नाम थे।  155 उम्मीदवारों में से 22 महिलाएं थी। अब तक कांग्रेस पार्टी ने मध्य प्रदेश विधान सभा इलेक्शन 2018 के लिए 230 में से 229 सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है।  

पहली लिस्ट आने के बाद मीडिया द्वारा लिस्ट के बारे में पूछे जाने पर ओझा ने कहा था कि कांग्रेस की लिस्ट बहुत अच्छी है और बहुत मंथन के बाद आयी है।  उन्होंने इस लिस्ट पर अपना पूरा भरोसा दिखाते हुए कहा कि बीजेपी को मध्यप्रदेश में ज़बरदस्त शिकस्त मिलेगी।  इतना ही नहीं, उन्होंने ये भी कहा की ये लिस्ट देखकर बीजेपी के आधे से ज़्यादा नेता चुनाव लड़ने से ही इंकार कर देंगे।  (देखें वीडियो)

हाल ही में जब मीडिया ने शोभा ओझा से सरताज सिंह को टिकट दिए जाने के बारे में पुछा तो ओझा ने बहुत ही विश्वास से कहा की सरताज सिंह होशंगाबाद सीट से कांग्रेस को जिताएंगे।

उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा की बीजेपी की पुरानी आदत है की वो अपने शीर्ष नेतृत्व, जिनकी अच्छी छवि है, उन्हें नकारती रहती है, उन्हें अपमानित करती रहती है।  उन्होंने कहा की बीजेपी ने अटलजी, आडवाणीजी मुरली मनोहर जी जैसे तमाम नेताओं का अपमान किया है। सरताज सिंह जी का भी बीजेपी ने अपमान किया है और कांग्रेस ने उनका हाथ थामा है। (देखें वीडियो )

अपने नेताओं की बेरुखी से रो पड़े सरताज सिंह - वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें 

शोभा ओझा चार साल तक महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष रही हैं। वे अभी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की प्रवक्ता टीम में भी हैं। उन्‍होंने 2003, 2005 और 2008 में विभिन्‍न चुनाव लड़े, परंतु जीत हासिल नहीं कर सकीं। बहरहाल महिला कांग्रेस की अध्‍यक्ष होने के नाते आगामी चुनावों में उनकी भूमिका कांग्रेस के लिए महत्‍वपूर्ण है। 

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