
भोपाल। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के खिलाफ दुनिया में कई जगहों पर प्रदर्शन हो रहे हैं। ऐसा ही एक प्रदर्शन गुरुवार को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के इक़बाल मैदान में भी हुआ। कांग्रेस विधायक आरिफ़ मसूद की अगुवाई में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने यहां ज़ोरदार प्रदर्शन किया। हालांकि इस दौरान कोरोना वायरस की गाइडलाइन का पूरी तरह से उल्लंघन किया गया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस पर सख़्ती दिखाई है और आरिफ मसूद समेत करीब 200 लोगों के खिलाफ थाना तलैया में धारा 188 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
सीएम शिवराज ने कहा, मध्य प्रदेश शांति का टापू है। इसकी शांति को भंग करने वालों से हम पूरी सख्ती से निपटेंगे। इस मामले में 188 आइपीसी के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, वो चाहे कोई भी हो। बता दें कि इकबाल मैदान में भोपाल में मध्य क्षेत्र के विधायक आरिफ मसूद के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान कई लोग मास्क नहीं लगाए थे। सुरक्षित शारीरिक दूरी का पालन भी नहीं किया गया। भीड़ के कारण पीरगेट, कमला पार्क जाने वाले मार्ग पर ट्रैफिक जाम हो गया था। इससे लोग काफी परेशान हुए।
बता दें कि कट्टरपंथी इस्लाम की निंदा कर रहे फ्रांस का भारत पुरजोर समर्थन कर रहा है। करीब दो सप्ताह पहले 16 अक्टूबर को फ्रांस में एक मुस्लिम अप्रवासी अब्दुल्लाख अंजोरोव ने एक शिक्षक सैमुअल पैटी का सिर कलम कर दिया था। इस घटना के बाद से ही फ्रांस में कट्टरपंथी इस्लाम की निंदा की जा रही है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों ने अपने बयान में कट्टरपंथी इस्लाम की आलोचना की थी और शिक्षक की हत्या को 'इस्लामिक आतंकवादी हमला' कहा था। मैक्रों के बयान को लेकर दुनिया के कई देशों में विरोध हो रहा है। लेकिन भारत फ्रांस का समर्थन कर रहा है।
सामुअल पैटी ने अपने छात्रों को अभिव्यक्ति की आजादी का उदाहरण देते हुए पैगंबर मुहम्मद को दशार्ते हुए चार्ली हेब्दो के कार्टून दिखाए थे। इसे मुस्लिम अप्रवासियों ने अपने अपमान के तौर पर लिया। यहां तक कि शिक्षक ने मुस्लिम छात्रों को उनकी कक्षा में उपस्थित न होने का विकल्प भी दिया था। बाद में स्कूल से बाहर एक चेचेन शरणार्थी ने टीचर का सिर काटकर उनकी हत्या कर दी। पुलिस की कार्रवाई में चेचेन शरणार्थी अंजोरोव भी मारा गया। इस घटना को पिछले दो दशकों में फ्रांस के कई इस्लामी आतंकवादी हमलों में से एक माना गया। राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने पैटी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए बच्चों को पढ़ाने के लिए देश के नाम शहीद के रूप में वर्णित किया। फ्रांस के राष्ट्रपति ने इस घटना को इस्लामिक आतंकवाद से जुड़ा कृत्य कहा था।
इसके बाद ही देश में कट्टरपंथी इस्लाम के बारे में एक बड़ी बहस शुरू हो गई है। फ्रांस में कट्टरपंथी इस्लाम के खिलाफ कई बड़ी विरोध रैली आयोजित की गईं। हालांकि दुनिया भर के इस्लामिक प्रतिनिधियों ने मैक्रों और फ्रांसीसी अधिकारियों को ऑनलाइन भला बुरा कहते हुए अपशब्द भी कहे। एक जनमत सर्वेक्षण के अनुसार, फ्रांस में 87 प्रतिशत लोगों को लगता है कि उनका धर्मनिरपेक्ष समाज खतरे में है और 79 प्रतिशत का मानना है कि इस्लाम धर्म ने फ्रांसीसी गणतंत्र के खिलाफ युद्ध की घोषणा की है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कड़े शब्दों में जारी एक बयान में बर्बर आतंकवादी हमले की निंदा की। मंत्रालय ने कहा कि इस घटना ने पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है। हम पीड़ित परिवार और फ्रांस के लोगों के साथ अपनी संवेदना प्रकट करते हैं। आतंकवाद को किसी भी वजह से और किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता। बयान में कहा गया है, 'हम राष्ट्रपति इम्मैन्युअल मैक्रों पर अस्वीकार्य भाषा में किए गए व्यक्तिगत हमलों की कड़ी निंदा करते हैं। यह अंतरराष्ट्रीय विमर्श के सबसे बुनियादी मानकों का उल्लंघन है।'
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