
नई दिल्ली, 9 जनवाय, न्यूजमंच, तृणमूल कांग्रेस सांसद सौमित्र खान ने लोकसभा चुनाव के लिए पश्चिम बंगाल में बीजेपी के अभियान को बल देते हुए बुधवार को भगवा पार्टी का दामन थाम लिया। जबकि, दूसरे कुणाल घोष को भाजपा से निकटता से कारण निलंबित कर दिया गया है। खान भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ मुलाकात करने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में पार्टी में शामिल हो गए। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री धर्मेद्र प्रधान व पश्चिम बंगाल के नेता मुकुल रॉय भी मौजूद थे। सौमित्र खान 2014 में 16वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। वह विष्णुपुर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। इससे भाजपा को आगामी लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में अभियान में मजबूती मिली है।
टीएमसी से निलंबित घोष को बनाया टेलीफोन एडवाइजरी समिति का अध्यक्ष
केंद्र सरकार के टेलीकॉम विभाग ने तृणमूल कांग्रेस के निलंबित सांसद कुणाल घोष को कोलकाता के लिए गठित टेलीफोन एडवाइजरी समिति में शामिल किया है। पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी टीएमसी के लिए केंद्र का यह फैसला चौंकाने वाला है। दूरसंचार विभाग ने घोष की नियुक्ति के लिए हाल ही में भारत संचार निगम लिमिटेड के चेयरमैन व एमडी को आधिकारिक चिट्ठी भेजी है। इसमें कहा गया है कि टीएमसी सांसद घोष को टेलीफोन एडवाइजरी समिति में अध्यक्ष का दर्जा दिया जाए। चिट्ठी में बीएसएलएन को इस बाबत घोष की मंजूरी लेने को भी कहा गया है।
पश्चम बंगाल में टीएमसी की मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरी भाजपा
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तौर जबरदस्त गहमागहमी चल रही है। पंचायत चुनाव के समय हिंसा की व्यापक घटनाओं के साथ ही सांप्रदायिक झड़प के मामले भी सामने भी आए हैं। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस तथा माकपा की जगह भाजपा ही हर जगह सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को चुनौती देती नजर आते दिख रही है। इससे यह साबित हो गया है कि कांग्रेस और माकपा को पीछे छोड़ते हुए भाजपा सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को चुनौती देने में मुख्य प्रतिद्वंद्वी के तौर पर सामने खड़ी नजर आ रही है। तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों का मानना है कि आगामी लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में उन्हें अच्छी कामयाबी मिलेगी। राज्य में लोकसभा की कुल 42 सीटें हैं और दोनों पार्टियां अधिकतम सीटों पर जीत के दावे कर रही है।
ममता के पांच सांसद भाजपा के संपर्क में, बदल सकते हैं पाला
ममता बनर्जी के लिए यह बात और झटका देने वाली हो सकती है कि उनकी पार्टी के कम से कम पांच वर्तमान सांसद उनका साथ छोड़ भाजपा में शामिल हो सकते हैं। इसके लिए उचित मौके की तलाश हो रही है। भाजपा ने मुकुल राय को राज्य में पार्टी के विस्तार की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी के तहत मुकुल राय ने तृणमूल कांग्रेस के अपने पुराने सहयोगियों को टटोलना शुरु कर दिया था। सौमित्र खान के लगभग साल भर पहले ही भाजपा में आने की बात तय हो गई थी। लेकिन राज्य में राजनीतिक हिंसा का माहौल देखते हुए उन्हें रुकने के लिए कहा गया था। आने वाले समय में तृणमूल कांग्रेस के कई और नेता पाला बदल कर सकते हैं।
भाजपा का अब पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर पर ज्यादा जोर
भाजपा सत्ता में वापसी के लिए इस बार पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर को खास निशाना बना रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि उत्तर भारत में वह पहले ही लगभग अधिकतम की सीमा के करीब पहुंच गई है। उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में अब उसके आगे बढ़ने की बजाय बदलते समीकरणों में पीछे होने की आशंका ज्यादा है। यही कारण है कि भाजपा अब अपने लिए उन क्षेत्रों में संभावनाएं तलाश रही है जहां उसने 2014 में सफलता नहीं पाई थी।
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