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संसद के दोनों सदनों में हुआ 10% सवर्ण आरक्षण बिल पास, समर्थन देना विपक्षी दलों की मजबूरी थी, नहीं तो 2019 के चुनाव में उठाना पड़ता भरी नुक्सान
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संसद के दोनों सदनों में हुआ 10% सवर्ण आरक्षण बिल पास, समर्थन देना विपक्षी दलों की मजबूरी थी, नहीं तो 2019 के चुनाव में उठाना पड़ता भरी नुक्सान

नई दिल्ली, 9 जनवरी, न्यूज़ मंच, संसद के दोनों सदनों में 10% सवर्ण आरक्षण बिल पास हो गया है। संविधान संशोधन प्रक्रिया के अनुसार, कल लोक सभा में विशेष बहुमत से पास होने के बाद आज राज्य सभा में भी बिल प्रस्तुत किया गया।  यहाँ भी यह 7 के मुकाबले 165 के बहुमत से पास हो गया।  अब यह राष्ट्रपति के दस्तखत के लिए भेजा जायेगा, और राष्ट्रपति के पास उसे अस्वीकार करने या लौटने का कोई विकल्प नहीं।  तो अब यह बिल एक्ट बन जायेगा। 

इस बिल के पास होने से बीजेपी के नेताओं के बीच खुशियों की लहर देखी गयी।  सवर्णों की नाराज़गी का परिणाम था, जो बीजेपी के हाल में हुए विधान सभा चुनावों में हार हुई थी। इस नाराज़गी को कम करने के लिए बीजेपी ने लोक सभा चुनाव के ठीक पहले यह कदम उठाया। बीजेपी को इस बिल के पास होने से उम्मीद है कि अब सवर्णो का बहुत बड़ा वोट बैंक उनके पास आ जायेगा। 

कहीं न कहीं विपक्षी दलों की मजबूरी हो गयी थी की इस बिल को समर्थन दें, नहीं तो 2019 के चुनाव में उन्हें इसका भरी नुक्सान उठाना पड़ता। तो न चाह कर भी, विपक्षी दलों को इस बिल को पास करने के लिए सरकार के साथ खड़ा होना पड़ा।  हालांकि बीजेपी की इस चाल से विपक्षी दल पहले ही बैकफुट पर आ गए थे। 

विपक्षी दलों ने बिल का विरोध किया, पर वोट पक्ष में डाला
इस बिल पर राज्यसभा में बुधवार को करीब 8 घंटे चर्चा की गई और 30 से ज्यादा नेताओं ने इस पर चर्चा के दौारन अपनी बात रखी। महत्वपूर्ण बात यह है कि लगभग हर एनडीए विरोधी दल ने बिल का विरोध करते हुए सरकार से तीखे सवाल किए, लेकिन चर्चा के बाद इसके पक्ष में मतदान किया।

कपिल सिब्बल दिखे खासे असंतुष्ट 

पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल का कहना है कि विधेयक तीन मामलों में जांच में विफल हो जाएगा। प्रयोगसिद्ध डेटा की का अभाव है, आय सीमा और भूमि की सीमा के आंकड़े बिना सोचे समझे बनाये गए हैं। उनका कहना है की देश भर में सिर्फ 5000 लोग इस बिल का फायदा उठा पाएंगे। कपिल सिब्बल का कहना है कि परिवार की आय का डेटा नहीं होगा और इसके अभाव में, नकली आय प्रमाण पत्र बना कर नौकरी पसंदीदा लोगों में दे दी जाएगी।  

बीएसपी के सतीश चंद्र मिश्रा बिल के सपोर्ट में लेकिन ऊँची सीलिंग से नाखुश 
बीएसपी के सतीश चंद्र मिश्रा ने बिल का समर्थन किया, लेकिन अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण की मांग की। गुर्जर जैसी जातियों को सवर्णों के बीच रखना उन्हें अनुचित लगा। उन्होंने यह भी कहा की, इस तरह की ऊँची सीलिंग लगाना 'सवर्णों में गरीबों के लिए एक धोखा' है।

DMK के कनिमोझी भी नाखुश 
DMK के कनिमोझी का कहना है कि विधेयक को जिस तरह से, किसी चुनिंदा समिति या स्थायी समिति को भेजे बिना और सदस्यों को प्रतिक्रिया के लिए मौका दिए बिना, केंद्र द्वारा लाया गया था, उसे संविधान का मखौल उड़ाना कहा जाता है।

कोटा बिल 'आधी रात की लूट' और न बजने वाला झुनझुना : मनोज कुमार झा 
मनोज कुमार झा (RJD) का कहना है कि उनकी पार्टी विधेयक के इरादे और तर्क दोनों पर सवाल उठाती है। वे कहते हैं गरीबी ज्यादातर SC / ST, OBC और मुसलमानों में है। आरक्षण को मनरेगा कार्यक्रम के रूप में नहीं माना जा सकता है। उन्होंने कोटा बिल को 'आधी रात की लूट' और न बजने वाला झुनझुना नाम दिया। 

49.5% से बढ़कर 59.5% हो जाएगा कुल आरक्षण
इस समय आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण दिया जाता है। एस और एसटी को क्रमश: 15 फीसदी और 7.5 फीसदी आरक्षण मिलता है। अब सवर्णों को भी दस फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। इस तरह कुल आरक्षण 49 फीसदी सेबढ़ कर अब 59.5 फीसदी हो जाएगा। 

इन मापदंडों पर मिलेगा सवर्णों को आरक्षण 
1. परिवार की सालाना आमदनी 8 लाख रु. से ज्यादा न हो।
2. परिवार के पास 5 एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि न हो।
3. आवेदक के पास 1,000 वर्ग फीट से बड़ा फ्लैट नहीं होना चाहिए। 
4. म्यूनिसिपलिटी एरिया में 100 गज से बड़ा घर नहीं होना चाहिए। 
5. नॉन नोटिफाइड म्यूनिसिपलिटी में 200 गज से बड़ा घर न हो।

राज्यों को आय की सीमा घटने का अधिकार
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष से कहा आप विधेयक में 8 लाख की आय सीमा पर सवाल उठा रहे हैं। लेकिन बिल में प्रावधान है कि राज्य अपनी मर्जी से जनरल कैटेगरी के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का पैमाना तय कर सकेंगे। उदाहरण के लिए किसी राज्य को लगता है कि आमदनी का पैमाना 8 लाख रुपए नहीं 5 लाख रुपए होना चाहिए तो उसे ऐसा करने का अधिकार होगा।  

राज्य सरकार की नौकरियों और कॉलेजों पर भी होगा लागू  
रविशंकर प्रसाद ने कहा यह आरक्षण सिर्फ केंद्र सरकार की नौकरियों या केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों पर लागू नहीं होगा। यह राज्य सरकारों की नौकरियों और कॉलेजों पर भी लागू होगा। आप हमसे सवाल पूछ रहे हैं कि अभी इस बिल को क्यों ला रहे हैं। आपको किसने रोका था इस बिल को लाने के लिए? हम सभी राजनीतिक कार्यकर्ता हैं और मैं मानता हूं कि इस मुद्दे को समझने की कोशिश सभी ने की है। गांव में जाइए और आपको पता चलेगा कि अगड़े वर्ग के लोग भी गरीब हैं। 

संसद में बिल पास होान सामाजिक न्याय की विजय  : मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बिल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे समतामूलक समाज के निर्माण का सपना पूरा होगा। संसद के दोनो सदनों में इस बिल के पास होना सामाजिक न्याय की विजय है। आरक्षण की इस नई व्यवस्था से बहुत बड़ी युवा शक्ति को राष्ट्रनिर्माण में अपना योगदान देने का अवसर प्राप्त होगा। उन्होंने कहा यह ऐतिहासिक क्षण है।  

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