• Last Update 05:37 am

10 फीसदी आरक्षण पर लोकसभा में आज सरकार की अग्निपरीक्षा - अगर संविधान हुआ संशोधित तो हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, पटेल, जाट, मराठा - सबको मिलेगा फायदा
Politics

10 फीसदी आरक्षण पर लोकसभा में आज सरकार की अग्निपरीक्षा - अगर संविधान हुआ संशोधित तो हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, पटेल, जाट, मराठा - सबको मिलेगा फायदा

नई दिल्ली, 8 दिसंबर, न्यूज़ मंच, आर्थिक रुप से पिछड़े सवर्णों के लिए 10 फीसदी आरक्षण पर लोकसभा में आज सरकार की अग्निपरीक्षा है। सरकार आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को शिक्षा व सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करने वाला 124वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश कर चुकी है। अब शाम करीब 5 बजे से इस पर बहस शुरू होगी। लोकसभा में बिल को पास कराने के लिए सरकार के पास संख्याबल पूरा है। इसके बावजूद एकराय बनाने के लिए वह विपक्षी दलों से संपर्क साध रही है। 

सूत्रों के मुताबिक बिल पर बहस और वोटिंग से पहले सरकार प्रमुख विपक्षी दल से बातचीत कर रही है। बड़े वोट बैंक से जुड़ा मुद्दा होने के कारण प्रमुख विपक्षी दल संशोधन विधेयक का सीधे तौर पर विरोध करते नजर नहीं आ रहे हैं। बीएसपी प्रमुख मायावती ने बिल के लिए अपने खुला समर्थन तो दिया, लेकिन साथ ही बीजेपी पर चुनावी स्टंट का तंज भी किया। एसपी ने बिल के समर्थन की बात तो कही, लेकिन साथ में ओबीसी आरक्षण बढ़ाने की ऐसी शर्त जोड़ दी, जिसको पूरा करना मोदी सरकार के लिए संभव नहीं होगा। 

मायावती का तंजभरा समर्थन
मायावती ने तंज के साथ बिल को संसद में समर्थन की बात कही है। मायावती ने कहा कि देश में गरीब सवर्णों को भी आरक्षण की सुविधा देने की बीएसपी की वर्षों से लंबित मांग को आधे-अधूरे मन और अपरिपक्व तरीके से स्वीकार किया गया है। इसके बावजूद वह इसका स्वागत करती हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार यह फैसला पहले करती तो बेहतर होता। बीएसपी अध्यक्ष ने कहा लोकसभा चुनाव से पहले लिया गया यह फैसला हमें सही नीयत से लिया गया फैसला नहीं बल्कि चुनावी स्टंट लगता है, राजनीतिक छलावा लगता है। 

समाजवादी पार्टी ने लगाई शर्त 
समाजवादी पार्टी (एसपी) का इस बिल पर स्टैंड अब तक गोलमोल ही है। समाजवादी पार्टी नेता रामगोपाल यादव ने कहा ओबीसी के लिए भी आबादी के हिसाब से आरक्षण होना चाहिए था, सरकार इस लक्ष्मण रेखा (50 फीसदी आरक्षण सीमा) को पार कर रही है, तो ओबीसी को उनकी आबादी के हिसाब से 54 फीसदी आरक्षण होना चाहिए। हालांकि उन्होंने आखिर में जोड़ा कि आरक्षण के प्रस्ताव का उनकी पार्टी समर्थन करती है। 

राज्यसभा का सत्र एक दिन के लिए बढ़ा 
आरक्षण का कोटा मौजूदा 49.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 59.5 प्रतिशत करने के लिए सरकार ने अपनी तरफ से पूरी तैयारी की है। कैबिनेट से प्रस्ताव मंजूर होने के ठीक एक दिन बाद सरकार ने जहां बिल को लोकसभा के पटल पर रख दिया, वहीं इसे राज्यसभा से भी पास कराने के लिए ऊपरी सदन का सत्र भी एक दिन यानी 9 जनवरी तक के लिए बढ़ा दिया। लोकसभा से आज बिल मंजूर होने के बाद बुधवार को उच्च सदन में इसे पेश किया जा सकता है।

नरेंद्र मोदी सरकार ने सोमवार को सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण देकर ऐतिहासिक निर्णय किया. लोकसभा चुनाव से ऐन पहले सरकार द्वारा आर्थिक आधार पर गरीब सवर्णों को सरकारी नौकरी और शिक्षा के क्षेत्र में 10 फीसदी आरक्षण दिया गया. विपक्ष ने सरकार के इस फैसले को सिर्फ एक चुनावी दांव बताया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी और सरकार ने इसे ऐतिहासिक कदम करार दिया है. अगर आपके मन में इस फैसले से जुड़े कुछ सवाल हैं तो जवाब आपको यहां मिलेंगे...

सवर्णों को आरक्षण किसके हिस्से का मिलेगा

संविधान के अनुसार 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा सकता है जो अभी, समाज के पिछड़े वर्ग को मिलता है। इसके ऊपर, केंद्र सरकार ने गरीब सवर्णों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐलान किया है। ऐसे अतिरिक्त आरक्षण के लिए, संविधान में संशोधन की ज़रुरत होगी। मंगलवार को लोकसभा में संविधान संशोधित बिल पेश किया जा चूका है। केंद्र सरकार संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में बदलाव करेगी।  दोनों अनुच्छेद में बदलाव कर आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का रास्ता साफ हो जाएगा। 

इसके अलावा, संविधान के अनुसार आरक्षण सिर्फ सामाजिक असमानता के आधार पर दिया जाता है यानी आर्थिक आधार पर मिलने वाला आरक्षण गैर-संवैधानिक है। कई राज्य सरकारों ने आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की कोशिश की है, लेकिन जब मामला कोर्ट में जाता है तो गैर-संवैधानिक होने के आधार पर खारिज कर दिया जाता गया है। ऐसे में केंद्र सरकार के सामने संविधान में संशोधन करने की चुनौती होगी। 

यह आरक्षण सिर्फ हिन्दू सवर्णों के लिए नहीं 

इस संविधान संशोधन के बाद सिर्फ हिन्दू सवर्ण ही नहीं, मुस्लिम और ईसाई धर्म के लोगों को भी सरकारी नौकरियों और शिक्षा के क्षेत्र में लाभ मिलेगा और ये फैसला पूरे देश में लागू होगा। इसके अंतर्गत किसी भी धर्म के व्यक्ति को उस स्तिथि में लाभ मिलेगा :
- अगर वो सामान्य श्रेणी का है
- अगर वो आर्थिक रूप से कमज़ोर है
- जो भी किसी आरक्षण के अंतर्गत नहीं आते होंगे
- जिन सवर्णों के पास 1000 स्क्वायर फीट से कम का घर होगा, 
- जिनके पास निगम की 109 गज से कम अधिसूचित जमीन होगी, 
- 209 गज से कम की गैर-अधिसूचित जमीन होगी
- जिनकी आय 8 लाख रुपये सालाना से कम हो
- जिसके पास 5 हेक्टेयर से कम की जमीन होगी

ऐसे में जिन क्षेत्रों में आरक्षण का प्रावधान है उसमें केंद्र-राज्य और निगम की नौकरी में इस फैसले का लाभ सीधे तौर पर मिलेगा.

पटेल-जाट-मराठा आंदोलन को इससे होगा फायदा
पटेल, जाट, मराठा, ये सभी जातियां सवर्ण के अंतर्गत आती हैं। इस वजह से इन सभी जातियों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण से लाभ मिलेगा। 

  • Tags

You can share this post!


Leave Comments