
वॉशिंगटन। जो बाइडेन की जीत की औपचारिक घोषणा से पहले अमेरिका की संसद में हिंसा देखने को मिली। वोटिंग के 64 दिन बाद जब अमेरिकी संसद बाइडेन की जीत पर मुहर लगाने जुटी तो ट्रम्प के समर्थक दंगाइयों में तब्दील हो गए। संसद में घुसे। तोड़फोड़ और हिंसा की। गोली भी चली और इसमें एक महिला मारी गई। तीन अन्य लोगों की भी मेडिकल इमरजेंसी में मौत हो गई। मिलिट्री की स्पेशल यूनिट ने दंगाइयों को खदेड़ा। पुलिस ने इस मामले में 52 लोगों को गिरफ्तार किया है। कई घंटे बाद संसद की कार्यवाही फिर शुरू हुई। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव (HOR) की स्पीकर नैंसी पेलोसी ने कहा- हम बिना डरे अपना काम जारी रखेंगे।

रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर मिट रोमनी ने घटना के बाद कहा- मैं इस घटना की निंदा करता हूं। मैं शर्मिंदा हूं कि हमारे राष्ट्रपति ने दंगाइयों को संसद में घुसने के लिए भड़काया। लोकतंत्र में जीत और हार को स्वीकारने की हिम्मत होनी चाहिए। दंगाइयों को साफ मैसेज है कि वे सच को कबूल करें। मैं अपनी पार्टी के सहयोगियों से भी यही उम्मीद करता हूं कि वे लोकतंत्र को बचाने के लिए आगे आएंगे। इस बीच, CNN ने दावा किया है कि ट्रम्प कैबिनेट के कुछ मेंबर्स ने एक अर्जेंट मीटिंग की है। इसमें संविधान के अनुच्छेद 25 के जरिए ट्रम्प को हटाने पर विचार किया गया है। हालांकि, इस बारे में कोई बयान जारी नहीं किया गया।

समझिए पूरा मामला
3 नवंबर को हुए राष्ट्रपति चुनाव में बाइडेन को 306 और ट्रम्प को 232 वोट मिले। हालांकि इसके बावजूद ट्रम्प ने हार नहीं कबूली। उन्होंने आरोप लगाया कि वोटिंग के दौरान और फिर काउंटिंग में बड़े पैमाने पर धांधली हुई। कई राज्यों में केस दर्ज कराए। ज्यादातर में ट्रम्प समर्थकों की अपील खारिज हो गई। दो मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी याचिकाएं खारिज कर दीं। चुनाव प्रचार के दौरान और बाद में ट्रम्प इशारों में हिंसा की धमकी देते रहे हैं। बुधवार को हुई हिंसा ने साबित कर दिया कि सुरक्षा एजेंसियां ट्रम्प समर्थकों के प्लान को समझने में नाकाम रहीं।
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