
भोपाल, 8 जनवरी, न्यूज मंच, मध्यप्रदेश की नवगठित 15वीं विधानसभा सत्र के दुसरे दिन की कार्यवाही शुरू हुई | मुख्यमंत्री कमलनाथ ने नए विधायकों और नेता प्रतिपक्ष को बधाई दी। कार्याही शुरू होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष पद के प्रस्ताव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में बहस शुरू हो गयी, जिसके बाद कार्यवाही दस मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होते ही प्रोटेम स्पीकर दीपक सक्सेना ने बिना वोटिंग के ध्वनिमत के आधार पर एनपी प्रजापति को स्पीकर घोषित कर दिया। इसके बाद भाजपा के विधायक नारेबाजी करने लगे। हगांमा बढ़ने पर प्रोटेम स्पीकर ने सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए दोबारा स्थगित कर दी। भाजपा प्रोटेम स्पीकर द्वारा कांग्रेस के एनपी प्रजापति को बिना वोटिंग के विधानसभा अध्यक्ष घोषित करने का विरोध कर रही थी।
इसके बाद प्रोटेम स्पीकर ने ऐलान कर दिया, मत विभाजन के ज़रिये विधान सभा के स्पीकर को चुना जायेगा। प्रक्रिया शुरू होने से पहले भाजपा विधायकों ने सदन से वॉक आउट कर दिया। भाजपा वोटिंग के दौरान अनुपस्थित रही। एनपी प्रजापति को 120 वोट मिले जिसके बाद उन्हें विधान सभा अध्यक्ष घोषित किया गया । दीपक सक्सेना ने प्रोटेम स्पीकर होने के कारण वोट नही डाला।
शिवराज सिंह चौहान ने इस पूरी प्रक्रिया को इतिहास का काला दिन बताया है। पैदल मार्च करते हुए विपक्ष राजभवन जाएगा, बीजेपी राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेगी। राजभवन के बाहर बड़ी संख्या मे पुलिस बल तैनात किया गया है। विपक्ष का कहना है कि यह एकतरफा फैसला है।
शाह ने एक, प्रजापति ने जमा किए चार सेट
कांग्रेस से स्पीकर पद के प्रत्याशी एनपी प्रजापति ने नामांकन के चार सेट जमा किए। एक में उनके प्रस्तावक संसदीय कार्य मंत्री डाॅ. गोविंद सिंह एवं समर्थक आरिफ अकील थे तो अन्य नामांकन में सत्तापक्ष के दूसरे विधायक उनके प्रस्तावक एवं समर्थक बनें। इनमें सपा, बसपा के साथ निर्दलीय विधायक भी शामिल हैं। भाजपा के विजय शाह ने नामांकन का सिर्फ एक सेट दाखिल किया। जिसमें प्रस्तावक शिवराज सिंह चौहान एवं समर्थक नरोत्तम मिश्रा रहे।
दरअसल, आज की सदन की कार्य सूचि के अनुसार पांच सेट जमा किए जाने थे। एक ही नाम, एनपी प्रजापति, के चार प्रस्ताव के बाद पांचवा प्रस्ताव विजय शाह के नाम का था, जिसे प्रस्तावित भी नहीं होने दिया गया। नरोत्तम मिश्रा ने भी आरोप लगाया की कांग्रेस ने मान्य परम्पराओं का खंडन किया है। कार्य सूचि में होने के बाद भी नाम नहीं बुलाया गया।
प्रो-टेम स्पीकर नियुक्ति पर भी हुआ था विरोध
सोमवार को दीपक सक्सेना को कांग्रेस के द्वारा प्रो-टेम स्पीकर नियुक्ति किये जाने पर गंभीर आपत्ति जताते हुए, मुख्य विपक्षी दल बीजेपी की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सदन कहा, "सभी सत्तारूढ़ दलों की एक परंपरा हुआ करती थी कि नई विधानसभा में प्रो-टेम स्पीकर हमेशा वरिष्ठतम विधायक होते हैं। हालांकि, दीपक सक्सेना को नियुक्त करते हुए, कांग्रेस ने इस परंपरा को तोड़ दिया।"
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने भी प्रो-टेम स्पीकर नियुक्त करने के कांग्रेस के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "राज्य का लोकतांत्रिक सेटअप में परंपरा निभाने का एक लंबा इतिहास रहा है। लेकिन, कांग्रेस ने स्थापित परंपराओं से तोडा है, चाहे यह वंदे मातरम का नवीनीकरण हो या विधानसभा में प्रो-टेम स्पीकर की नियुक्ति हो। आम तौर पर, नव निर्वाचित विधानसभा में सबसे वरिष्ठ विधायक को अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया जाना चाहिए था, चाहे वो किसी भी पार्टी का हो, लेकिन कांग्रेस ने इस परंपरा को तोड़ा, इसलिए हमने अपने उम्मीदवार विजय शाह को मैदान में उतारने का फैसला किया।
बीजेपी ने प्रो-टेम स्पीकर की नियुक्ति पर विरोध करते हुए विधानसभा अध्यक्ष पद की दौड़ में प्रवेश किया, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ आदिवासी नेता, विजय शाह को कांग्रेस के नर्मदा प्रसाद प्रजापत के खिलाफ मैदान में उतारा गया। पहले कांग्रेस की ओर से एनपी प्रजापति ने मुख्यमंत्री कमलनाथ, संसदीय कार्यमंत्री डाॅ. गोविंद सिंह एवं आरिफ अकील के साथ स्पीकर के लिए अपना नामांकन दाखिल किया और इसके तत्काल बाद भाजपा की ओर से विजय शाह ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के साथ जाकर अपना पर्चा भरा था।
बोपैया, विखे पाटिल, बलमुचू वरिष्ठतम विधायक नहीं, पर रह चुके प्रो-टेम स्पीकर
हालांकि, हाल ही में, कांग्रेस की ओर से कपिल सिब्बल ने कर्नाटक विधान सभा में के जी बोपैया की प्रो-टीम स्पीकर की नियुक्ति को कोर्ट में चुनौती दी थी। कर्नाटक विधान सभा में सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस-जद (एस) के गठबंधन को यह साफ़ किया कि प्रो-टेम स्पीकर बनने के लिए वरिष्ठतम विधायक होने का कोई कानूनी नहीं है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने पिछले उदाहरणों की ओर इशारा भी किया था। न्यायमूर्ति बोबडे ने कहा कि कैसे बालासाहेब विखे पाटिल को, वरिष्ठतम सांसद नहीं होने के बावजूद, 2004 में (जब यूपीए सत्ता में आई), प्रो-टेम स्पीकर नियुक्त किया गया था। सिस राम ओला उस समय लोकसभा में वरिष्ठतम सदस्य थे। न्यायमूर्ति बोबडे ने सिब्बल से कहा, "कृपया इसकी जांच करें, मैं आपका विरोध नहीं करना चाहता।"
येदियुरप्पा के वकील मुकुल रोहतगी ने 2005 के झारखंड उदाहरण का हवाला दिया जहां प्रदीप बलमुचू को वरिष्ठतम विधायक इंदर सिंह नामधारी के आगे प्रो-टेम स्पीकर नियुक्त किया गया था। सिब्बल ने स्वीकार किया कि यह अनिवार्य नहीं था कि वरिष्ठतम सदस्य को प्रो-टेम स्पीकर बनाया जाए।
वहीं बीजेपी ने मध्य प्रदेश में इसी तरह से की गयी नियुक्ति को इतिहास का कला दिन बताया, सदन से वॉक आउट किया और विरोध में नारे बाज़ी और मार्च भी की। बीजेपी ने उस उदहारण का हवाल दिया, जब लोक सभा में एनडीए सरकार के पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने कमल नाथ को वरिष्ठतम विधायक होने की वजह से प्रो-टेम स्पीकर नियुक्त किया था।
विधान सभा में यह है सदस्यों की स्थिति
सदस्यों की संख्या के लिहाज से कांग्रेस के 114 जबकि भाजपा के 109 सदस्य हैं। बसपा के 2, सपा का 1 एवं निर्दलीय 4 विधायक जीत कर आए हैं। इन 7 विधायकों ने कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए समर्थन दिया है। इनमें से एक निर्दलीय प्रदीप जायसवाल मंत्री भी बन चुके हैं।
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